नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 12 साल के सफर के दौरान कई बार चयनकर्ताओं की टेढ़ी नजर का शिकार हुए वीवीएस लक्ष्मण ने कहा कि उन्होंने देश को जो भी योगदान दिया उससे वह खुश है और कप्तानी के लिए कभी उनके नाम पर विचार नहीं होना उनके लिए मायने नहीं रखता है।
लक्ष्मण ने इन सुझावों को खारिज कर दिया कि उनकी उपलब्धियों को कभी पहचान नहीं मिली। उन्होंने कहा, 'अगर ऐसा होता तो मैं कभी 100 टेस्ट नहीं खेलता जिस उपलब्धि को मुझसे पहले सात महान खिलाड़ी ही हासिल कर पाए है।' इस 32 वर्षीय कलात्मक बल्लेबाज ने कहा, 'अगर मेरे प्रदर्शन को पहचान नहीं मिलती तो मैं 100 टेस्ट नहीं खेलता। मेरे लिए सबसे बड़ी पहचान 100 टेस्ट मैच में टीम का प्रतिनिधित्व करना और पिछले 12 साल से भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा रहना है। महत्वपूर्ण यह है कि मैंने भारतीय क्रिकेट में योगदान दिया है।'
लक्ष्मण ने कहा, 'मैं भाग्यशाली हूं। सभी भारत के लिए खेलने का सपना देखते हैं और भारत के लिए 100 मैच खेलना निश्चित तौर पर मेरे जीवन के सबसे गौरवपूर्ण लम्हों में से एक है।' यह पूछने पर कि कप्तानी के लिए कभी उनके नाम पर विचार नहीं किए जाने से क्या उन्हें मलाल है तो हैदराबाद के इस बल्लेबाज ने कहा, 'मैं एक बार इसके करीब आया जब दक्षिण अफ्रीका दौरे पर मुझे उप कप्तान बनाया गया। मैं ऐसे क्रिकेटरों के साथ खेला जो मेरे सीनियर थे और जिन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया। मैंने इस बारे में कभी नहीं सोचा। यह मेरे नियंत्रण से बाहर है।'
लक्ष्मण ने कहा, 'मैंने भारतीय टीम के अलावा भारत ए, रणजी और दलीप ट्राफी में भी कप्तानी की। मुझे लगता है कि जब भी मुझे मौका मिला मैंने अच्छा किया और जब भी मौका मिला तो मैं इसे लेकर उत्सुक रहा।' उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि मुझे और अधिक योगदान देना चाहिए और देश के लिए और अधिक मैच जीतने चाहिए। मेरे लिए इतने सारे टेस्ट खेलना मेरे खेल को पहचान मिलना है जोकि संतोषजनक है।'
लक्ष्मण को हालांकि देश के लिए अधिक एक दिवसीय मैच नहीं खेलने और दक्षिण अफ्रीका में 2003 विश्व कप में नहीं खेल पाने की निराशा है। उन्होंने कहा, 'मुझे इसका दुख है क्योंकि मुझे लगता है कि मैं और अधिक वनडे खेल सकता था। मुझे लगता है कि मैं एक दिवसीय मैचों में भी योगदान दे सकता था। मुझे 2004 में टीम से हटा दिया गया जबकि मुझे लगता था कि खेल के दोनों प्रारूपों में मैं ठीक ठाक प्रदर्शन कर रहा हूं। आस्ट्रेलिया और पाकिस्तान में मैं काफी सफल रहा और इसके बाद मुझे हटा दिया गया।'
अपने कप्तानों के बारे में लक्ष्मण ने कहा, 'मेरे कप्तानों सौरव गांगुली, सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ ने एक दिवसीय मैच खेलने की उनकी इच्छा का हमेशा समर्थन किया।' दिसंबर 2006 में अंतिम एक दिवसीय मैच खेलने वाले लक्ष्मण ने कहा, 'उन्होंने मेरा समर्थन किया। मुझे याद है कि सचिन ने एक दिवसीय मैचों के लिए मुझे आस्ट्रेलिया में ही रुकने को कहा था। गांगुली ने ऐसा किया। राहुल ने भी ऐसा किया। इसलिए उनके खिलाफ मेरी कोई शिकायत नहीं है। चयनसमिति की बैठक में जो हुआ मैं उसके बारे में जानना नहीं चाहता। यह गोपनीय बैठक होती है।'
टीम को कई बार मुश्किल हालातों से निकालने वाले लक्ष्मण से जब 2003 विश्व कप टीम से हटाए जाने का कारण पूछा गया तो वह अपनी निराशा नहीं छिपा पाए। उन्होंने कहा, 'वर्ष 1999 में मैं इसके काफी करीब आया और मैं 2003 विश्व कप में खेलने को लेकर उत्सुक था। मध्यक्रम के बल्लेबाज के रूप में टीम में वापसी के बाद से यह मेरे लक्ष्यों में से एक था और उस समय यह करारा झटका था क्योंकि मैं काफी अच्छा प्रदर्शन कर रहा था और अचानक मुझे टीम में नहीं चुना गया। मुझे कारण कभी समझ में नहीं आया।' उन्होंने कहा, 'मैं निराश था। मैं समझ सकता था अगर मैं अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहा होता लेकिन मैं योगदान दे रहा था और अच्छा प्रदर्शन कर रहा था। इसके बाद भी मुझे विश्व कप के लिए नहीं चुना गया जिसका मैंने हमेशा सपना देखा था। मैंने 83 एक दिवसीय मैच खेले लेकिन मैंने कभी विश्व कप में हिस्सा नहीं लिया।'