
श्रीनगर/नई दिल्ली। सेना ने सुरक्षा कारणों से जम्मू-कश्मीर के खिलाफ श्रीनगर में मंगलवार से शुरू होने वाले रणजी ट्राफी मैच नहीं खेलने के फैसले पर भारतीय क्रिकेट बोर्ड [बीसीसीआई] से माफी मांग ली और श्रीनगर में मैच खेलने के लिए नई तारीखें मांगी हैं। हालांकि नाराज बोर्ड ने सेना पर एक साल के लिए लगाए प्रतिबंध को हटाने से इनकार कर दिया है।
शेरे-ए-कश्मीर स्टेडियम में पांच साल बाद मैच होना था लेकिन सेना की टीम के श्रीनगर नहीं जाने से जम्मू एवं कश्मीर की टीम को चार अंक मिले। सेना की टीम के इस फैसले पर जम्मू-कश्मीर क्रिकेट संघ के अध्यक्ष फारूख अब्दुल्ला बहुत नाराज थे। अब्दुल्ला ने सेना की टीम के सुरक्षा कारणों से श्रीनगर आकर रणजी क्रिकेट मैच खेलने से इनकार करने पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा है कि सेना के इस फैसले से देश की छवि खराब होगी और वे इस मामले को प्रधानमंत्री के समक्ष ले जाएंगे।
मामले की गंभीरता को भांपते हुए बीसीसीआई ने सेना खेल नियंत्रण बोर्ड [एसएससीबी] क्रिकेट टीम को श्रीनगर में प्लेट डिवीजन मैच में खेलने से इनकार करने पर इस साल की रणजी ट्राफी से प्रतिबंधित कर दिया। वहीं लगातार आलोचना के बीच सेना ने इस फैसले के लिए बीसीसीआई से माफी मांग ली है और श्रीनगर में मैच खेलने के लिए नई तारीखें मांगी हैं। सेना की इस पेशकश का बोर्ड पर कोई असर नहीं हुआ है जो टीम को बाहर करने के अपने फैसले पर अडिग है। बीसीसीआई प्रवक्ता राजीव शुक्ला ने कहा, 'हमने इस साल सेना को रणजी ट्राफी से बाहर कर दिया है। फैसला पहले ही चुका है और हम उसे नहीं बदलेंगे।' सेना के माफी मांगने के बाद बीसीसीआई के आला अधिकारियों ने इस मसले पर बात की और फैसले पर कायम रहने का ऐलान किया।
इससे पूर्व बीसीसीआई सचिव एन श्रीनिवासन ने कहा, 'सेना की क्रिकेट टीम को श्रीनगर में तीन से छह नवंबर तक रणजी ट्राफी प्लेट डिवीजन मैच खेलना था। हालांकि, एसएससीबी ने मैच में हिस्सा नहीं लिया और अपनी क्रिकेट टीम को श्रीनगर भेजने में असमर्थता जता दी। एसएससीबी को इसलिए बीसीसीआई के घरेलू टूर्नामेंटों से संबंधित नियमों के मुताबिक रणजी ट्राफी 2009-10 सत्र में हिस्सा लेने से डिस्क्वालीफाई किया जाता है।' उन्होंने कहा, 'एसएससीबी के खिलाफ आगे की कार्रवाई का फैसला बीसीसीआई की कार्यकारी समिति की बैठक में किया जाएगा।'
नाराज अब्दुल्ला ने कहा, 'सेना के इस कदम ने प्रधानमंत्री, रक्षामंत्री और गृहमंत्री के कश्मीर की स्थिति को सामान्य बताने को बेअसर कर दिया। कुछ लोगों के निजी स्वार्थ कश्मीर में स्थिति को सामान्य नहीं होना देना चाहते।' उन्होंने कहा, 'मैं यह मामला भारत सरकार के पास ले जाऊंगा। हम सेना की क्रिकेट टीम का इंतजार कर रहे थे। हम उनका स्वागत करने को तैयार थे। हमें यह जानकर काफी निराशा हुई कि सेना की टीम नहीं आ रही है। यह कदम भारत की छवि खराब करेगा।'
इससे पहले सेना की टीम के सहायक कोच जेपी पांडेय ने एक अखबार से कहा, 'हम जेएंडके से होने वाला पहला मैच नहीं खेलने जा रहे हैं और अगले मुकाबले के लिए तैयारी में जुटे हैं।' वहीं जम्मू और कश्मीर के कप्तान विनायक माने ने कहा, 'हमें आज सुबह ही पता चला कि जिस टीम से हमारा मैच हैं वह खेलने के लिए नहीं आ रही है। मैं नहीं जानता कि सेना की टीम श्रीनगर आकर क्यों नहीं खेलना चाहती है। अगर वह सुरक्षा के मुद्दे से यहां नहीं आना चाहते हैं तो उन्हें मैचों के लिए घटनास्थल तय होने से पहले बीसीसीआई से इस बारे में बात करनी चाहिए थी।'