
नई दिल्ली। पिछले चार मैदानों पर चूकने के बाद सचिन तेंदुलकर अब हैदराबाद के उस उप्पल स्थित राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में 17,000 रन के जादुई आंकड़े को छूने की कोशिश करेंगे जिसमें वह अभी तक अपेक्षानुरुप प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं। वहीं दो मैचों में दो शतक लगाने वाले युवराज को इस बार भी अपने इस पसंदीदा मैदान पर बेहतरीन बल्लेबाजी की उम्मीद होगी।
तेंदुलकर को इस मुकाम पर पहुंचने के लिए केवल सात रन की दरकार है और पूरी संभावना है कि हैदराबाद के दर्शकों को ही वह रन देखने को मिलेगा जो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक नया अध्याय जोड़ेगा। मास्टर ब्लास्टर ने सीरीज के चार मैच में अभी तक केवल 90 रन बनाए हैं जिससे उनके 17 हजार रन के मुकाम पर पहुंचने का इंतजार भी बढ़ गया है। उन्होंने नवाबों के शहर में ही अपने करियर का सर्वाधिक स्कोर 186 रन [बनाम न्यूजीलैंड 1999] बनाया है लेकिन तब मैदान लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम था जबकि अब उन्हें उप्पल के राजीव गांधी स्टेडियम में खेलना है जिसमें उनके नाम पर दो मैच में केवल 45 रन दर्ज हैं।
सचिन की निगाह जहां 17 हजारी बनने पर होगी वहीं भारतीय टीम को भी इस मैदान पर पहली जीत का इंतजार है। मोहाली में आस्ट्रेलिया की 24 रन से जीत के बाद दोनों टीमें सात वनडे मैचों की सीरीज में 2-2 से बराबरी चल रही हैं और अगला मैच जीतने वाली टीम का सीरीज के पलड़ा भारी हो जाएगा क्योंकि ऐसी स्थिति में दूसरी टीम को सीरीज जीतने के लिए अंतिम दोनों मैचों में जीत दर्ज करनी होगी।
भारत को हालांकि उप्पल का मैदान रास नहीं आता और उसे यहां खेले दोनों वनडे मुकाबलों में दक्षिण अफ्रीका और आस्ट्रेलिया के हाथों हार झेलनी पड़ी। ऐसे में उप्पल की बल्लेबाजों की अनुकूल पिच पर भारत ही नजरें एक बार फिर अपने अनुभवी बल्लेबाजों सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग, युवराज सिंह और कप्तान धौनी पर होगी जबकि टीम इंडिया को गौतम गंभीर के भी चोट से उबरकर टीम में वापसी की उम्मीद होगी जिससे बल्लेबाजी मजबूत हो सके। मेजबान के लिए यहां युवराज तुरुप का इक्का साबित हो सकते हैं। कोटला की मुश्किल विकेट पर 78 रन की पारी खेलकर भारत की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले युवराज के लिए उप्पल का मैदान काफी भाग्यशाली रहा है और वह यहां दो बार मैदान पर उतरे और दोनों बाद शतक बनाने के बाद ही वापस लौटे।
युवराज ने यहां दो मैचों में 112 की बेजोड़ औसत के साथ दो शतकीय पारियों की मदद से 224 रन बटोरे हैं। भारत को हालांकि दोनों मैचों में शिकस्त झेलनी पड़ी है। 16 नवंबर 2005 को इस मैदान पर हुए पहले मैच में भारत ने द. अफ्रीका के खिलाफ युवराज की 103 रन की पारी बदौलत नौ विकेट पर 249 रन का सम्मानजनक स्कोर खड़ा किया था लेकिन मेहमान टीम ने जैक कालिस की 68 और कप्तान ग्रीम स्मिथ की 48 रन की पारी की बदौलत पांच विकेट खोकर ही 49वें ओवर में लक्ष्य हासिल कर लिया। भारत और आस्ट्रेलिया के बीच भी लगभग दो साल पहले 10 अक्टूबर 2007 को यहां वनडे मैच खेला गया और इसमें भी मेजबान टीम के हाथ निराशा ही लगी। आस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए सात विकेट पर 290 रन का मजबूत स्कोर बनाया जिसके जवाब में भारतीय टीम युवराज की 115 गेंद में 121 रन आतिशी पारी के बावजूद 243 रन पर ढेर हो गई।
राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम की पिच बल्लेबाजी के अनुकूल है लेकिन फिर भी युवराज के अलावा भारत के अन्य बल्लेबाजों को यहां रन बनाने के लिए जूझना पड़ा है। रोचक तथ्य यह है कि युवराज के बाद इस मैदान पर सर्वाधिक रन बनाने वाला कोई भारतीय बल्लेबाज नहीं बल्कि ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह है जिन्होंने यहां दो मैचों में 56 रन बनाए हैं। धौनी यहां दो मैचों में 50 ही बनाए हैं। इसके अलावा गंभीर के नाम दो मैचों में सात रन है जबकि सीरीज में अच्छी शुरुआत के बावजूद बड़ी पारी खेलने में असफल रहे सहवाग ने एक मैच में केवल एक रन बनाया है जो भारत के लिए चिंता का सबब हो सकता है।
गेंदबाजी भी यहां टीम इंडिया की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं क्योंकि टीम के मौजूदा गेंदबाजों में सिर्फ हरभजन को ही अंतरराष्ट्रीय मैचों में यहां खेलने का अनुभव है और उनके नाम भी यहां केवल एक विकेट दर्ज है। दूसरी तरफ कंगारू टीम भले ही यहां अपना एकमात्र मुकाबला जीती हो लेकिन इस जीत में अहम भूमिका निभाने वाले तेज गेंदबाज ब्रेट ली चोट के कारण स्वदेश लौट चुके हैं जिनकी कमी टीम को काफी खल रही है। ली ने इस मैच में 37 रन देकर तीन विकेट चटकाए थे। ली के अलावा केवल कप्तान रिकी पोंटिंग और तेज गेंदबाज मिशेल जानसन ही यहां की पिच से वाकिफ हैं। पोंटिंग ने अपने एकमात्र मैच में यहां 25 रन की पारी खेली थी जबकि जानसन ने दो विकेट चटकाए।