
नई दिल्ली। भारत के पूर्व हाकी कप्तान धनराज पिल्लै ने कहा कि मौका दिए जाने पर अपनी स्टिक के जौहर से देश का नाम रोशन करने के लिए वह अब भी तैयार हैं।
धनराज ने एक चैनल से कहा, 'किसी को इस मुगालते में नहीं रहना चाहिए कि मेरे लिए सब कुछ खत्म हो चुका है। अंतरराष्ट्रीय हाकी में खेलने के लिए जो कुछ चाहिए वह सब मेरे अंदर अब भी मौजूद है।' दिग्गज स्ट्राइकर धनराज से पूछा गया कि सचिन तेंदुलकर और लिएंडर पेस जैसे धुरंधर तो अब भी देश के लिए खेल रहे हैं फिर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मैचों में खेलना क्यों छोड़ दिया। इसके जवाब में उन्होंने कहा, 'मैंने खेलना छोड़ा नहीं है। मुझे अब भी विश्वास है कि मैं अंतरराष्ट्रीय मैचों में वापसी करूंगा।'
उन्होंने भारतीय हाकी की दुर्दशा पर अफसोस जाहिर किया। उन्होंने कहा, 'हम इतना नीचे गिर चुके हैं कि एशियाई खेलों में जापान और चीन जैसे देशों ने भी हमें कड़ी टक्कर दी।' भारतीय हाकी महासंघ के एक अधिकारी द्वारा टीम में चयन के लिए रिश्वत लेने के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, 'राष्ट्रीय टीम में चयन के लिए भारतीय हाकी महासंघ [आईएचएफ] के एक अधिकारी को घूस लेता देख मेरा दिल टूट गया। मैंने महसूस किया कि इससे मुझे मिले राजीव गांधी खेल रत्न और अन्य पुरस्कारों की गरिमा को ठेस लगी है।'
अपने बेहतरीन खेल से भारत को कई मुश्किल मैचों में जीत दिलाने वाले धनराज ने कहा, 'अगर मुझे एथेंस ओलंपिक खेलों में राष्ट्रीय टीम की कप्तानी दी जाती है तो मुझे बड़ी खुशी होगी।' उन्होंने कहा, 'अपने शुरुआती दो ओलंपिक में परगट सिंह की कप्तानी में खेलने का मुझे गर्व है। लेकिन कम से कम 2004 में मुझे कप्तानी मिलनी चाहिए थी। हर कोई जानता था कि यह मेरा आखिरी ओलंपिक होगा। मुझे एक सुविचारित साजिश के तहत कप्तानी से महरूम रखा गया।' साथ ही उन्होंने कहा, 'मैं अधिकारियों से आग्रह करूंगा कि वे 16 साल तक देश की सेवा करने वाले खिलाड़ी के योगदान का अपमान और उपेक्षा नहीं करें।'