नई दिल्ली। आर्थिक अभावों और बिरादरी की आलोचना झेलने के बावजूद हाकी के लिए अपना जुनून बरकरार रखते हुए कजान में चैंपियंस चैलेंज टूर्नामेंट में भारत की खिताबी जीत की सूत्रधार बनी रानी देवी को मलाल है कि बेहतरीन प्रदर्शन के बावजूद कोई उनकी मदद के लिए आगे नहीं आया।
हरियाणा के शाहबाद में बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाली रानी के पिता ठेलागाड़ी चलाते हैं जबकि भाई कारपेंटर है। पिछले साल राष्ट्रीय महिला हाकी टीम में जगह बनाने वाली रानी ने कजान में बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर सभी को चौंका दिया। उन्होंने कहा, 'मेरा एक ही सपना है कि ऐसी खिलाड़ी बनूं जिस पर परिवार और देश को नाज हो। मेरी राह आसान नहीं है लेकिन मैं इस पर पूरी शिद्दत से चलूंगी।' उन्होंने बताया कि कजान में उनका बेहतरीन प्रदर्शन भारत में अनदेखा ही रह गया और कोई उनसे हाल चाल पूछने तक नहीं आया।
यह पूछने पर कि क्या उन्हें कोई नकद पुरस्कार मिला तो इस फारवर्ड खिलाड़ी ने कहा, 'कोई पूछने तक नहीं आया। कोच बलदेव सिंह, एमके कौशिक और कप्तान सुरिंदर कौर के अलावा आज तक किसी ने मेरी कोई मदद नहीं की। यदि मदद मिलती तो मैं अपने खेल में और सुधार कर सकती।' हाकी खेलने की प्रेरणा के बारे में पूछने पर रानी ने कहा, 'स्कूल में अपने सीनियर को देखकर मैंने भी हाकी खेलनी शुरू की। मेरे पास ना तो स्टिक थी और ना ही जूते। बाद में कोच बलदेव ने मुझे सामान दिया।' माता-पिता की प्रतिक्रिया के बारे में उन्होंने कहा, 'मेरी जिद के आगे वे मान गए लेकिन बिरादरी के लोगों और पड़ोसियों ने लड़की को हाकी खेलने की अनुमति देने पर उनकी काफी आलोचना की। हालांकि अब वे ही लोग अपने बच्चों को मेरी मिसाल देते हैं।'
सरकारी स्कूल में 11वीं की छात्रा रानी टूर्नामेंटों में इतनी व्यस्त रही कि स्कूल सिर्फ इम्तिहान देने ही जा सकी। आर्थिक तंगी के चलते वह ट्यूशन भी नहीं ले पा रही लेकिन उसे इसका मलाल नहीं और रोजाना अभ्यास के जरिए अपनी हाकी में निखार लाना ही उसका लक्ष्य है। उन्होंने कहा, 'अब हमें अगस्त में बोस्टन [अमेरिका] में अंडर 21 विश्व कप खेलना है और मैं उसमें भी इसी प्रदर्शन को दोहराना चाहती हूं।' कजान से लौटने पर दिल्ली में टीम का अपेक्षित स्वागत नहीं होने का मलाल रानी को भी है और उनका मानना है कि जब तक क्रिकेट का खुमार देशवासियों पर से नहीं उतरेगा, हाकी को उसका मुकाम नहीं मिल सकता। उन्होंने कहा, 'मुझे क्रिकेट और क्रिकेटर इसीलिए पसंद नहीं क्योंकि उनके चलते हाकी को उसकी जगह नहीं मिल पा रही। पता नहीं कब लोग हमारी उपलब्धियों को भी उतनी ही तवज्जो देंगे।'