जागरण यात्रा

नॉर्वेजियन क्रूज लाइन का सबसे बडा, सबसे शानदार और अनूठा क्रूज जहाज नॉर्वेजियन एपिक अपने पहले सफर पर 24 जून 2010 को अटलांटिक महासागर पार करेगा। लंदन (साउथैम्पटन) से रवाना होकर यह न्यूयार्क पहुंचेगा। कुल 4200 यात्रियों की क्षमता वाले इस जहाज...
रोमांच , आयुर्वेद, समुद्र तट, अंडरवाटर, संस्कृति, पहाडि़यां, प्रकृति, चाय, झरने, होटल व स्पा, वाइल्डलाइफ, बुद्ध, विरासत.. श्रीलंका में तफरीह के कई सारे कारण हो सकते हैं। हाथी तो उनमें से सिर्फ एक छोटा.. ना ना बड़ा सा कारण है। श्रीलंका का राष्ट्रीय पशु भले ही शेर है, लेकिन उसके समूचे जनजीवन में हाथी रचा-बसा है। एक झलक ,
ज्वाला देवी का मंदिर धूमावती की पवित्र स्थली है। इसकी मान्यता 51 शक्तिपीठों में सर्वोपरि है। मान्यता है कि इस स्थान पर सती की महाजिह्वा गिरी थी। यहां भगवान शिव उन्मत्त-भैरव रूप में स्थित हैं। इस मंदिर में देवी के दर्शन पवित्र ज्योति के रूप में किए जाते हैं।,
आप क्या कभी गोवा गए हैं? अगर समुद्र तट के अलावा वहां की गलियों और पुराने गोवा में घूमने का अवसर निकाल पाए हों, वहां की इमारतें, सडकें, चर्च और मंदिर याद हों तो मकाऊ में उनकी झलक आप महसूस करेंगे। भारत के पश्चिम में स्थित गोवा और चीन के...
हम बात कर रहे हैं कनाडा के मनितोबा में हडसन खाडी के मुहाने पर स्थित चर्चिल की। इसे दुनिया की पोलर बीयर (ध्रुवीय भालू) राजधानी कहा जाता है। 2006 में चर्चिल शहर की आबादी महज 923 थी। लेकिन इस शहर में ट्रेन जाती है, यहां बंदरगाह है और रोजाना...
कालिंजर को कालजयी यूं ही नहीं कहा जाता है। इसने कालखंड के प्रत्येक प्रसंग को, चाहे वो प्रागैतिहासिक काल के पेबुल उपकरण हों, पौराणिक घटनाएं हों या 1857 का विद्रोह हो, सबको बहुत ही खूबसूरती से अपने आंचल में समा रखा है। वेदों में उल्लेख के...
हिमालय प्रदेश की खूबसूरत गोद में पसरी एक झील है पद्मसंभव। लेकिन कोई कहे कि पद्मसंभव झील चलें तो पता नहीं चलेगा, हां कहा जाए कि रिवालसर चलें तो बनेगी बात। पद्मसंभव व रिवालसर अब एक-दूसरे का पर्याय हैं। रिवाल गांव अब कस्बा हो चुका है, सर यानी...
हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग शोभा वाले अनेक मंदिरों में से एक है हणोगी माता मंदिर। राष्ट्रीय राजमार्ग 21 पर मंडी और कुल्लू के बीच बने पंडोह बांध से कुछ आगे चलकर व्यास नदी के दूसरी ओर यह एक पर्वत पर शोभायमान है जिसका सौंदर्य देखते ही बनता है।...
अब इंडियन महाराजा के नाम से उसकी एक शाही रेलगाड़ी महाराष्ट्र से शुरू होकर उन्हीं जगहों को छूने वाली है जिन्हें राजस्थान पर्यटन की दोनों शाही रेलगाडि़यां छूती हैं। वहीं महाराष्ट्र टूरिज्म डेवलेपमेंट कॉरपोरेशन की डेक्कन ओडिसी का सफर औरंगाबाद, नासिक, पुणे वगैरह की तरफ है।
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