जागरण यात्रा

त्तराखंड की संस्कृति यहां के लोक पर्व और मेलों में स्पंदित होती है। यूं तो राज्य में जगह-जगह साल भर मेलों का आयोजन चलता रहता है, लेकिन कुछ मेले ऐसे हैं जो अपनी अलग ही पहचान बनाए हुए हैं। कुमांऊ के देवीधुरा नामक स्थान पर लगने वाला बगवाल...
राजश्री टंडन जैसे लोगों ने खजुराहो, उसके वास्तु, उसके दर्शन का जमकर विरोध किया किन्तु खजुराहो का दर्शन और उसका शिल्प भारतीय कला पर अपनी छाप छोडता गया। बुंदेलखंड और उसके बाहर अनेक ऐसे मंदिर मिल जाएंगे जिन पर खजुराहो के दर्शन और वास्तु का स्पष्ट...
उदयपुर को झीलों की नगरी भी कहा जाता है तो वेनिस ऑफ ईस्ट भी। इन दिनों अब तक रूठे मानसून से झीलों के सूख जाने से परेशान उदयपुरवासियों के लिए यह खबर तन-मन को भिगो देने वाली होगी कि उनके शहर को हाल ही में एक सर्वे में दुनिया का सर्वश्रेष्ठ शहर...
पर्यटन के क्षेत्र में विश्व के नक्शे पर अपनी पहचान बनाने को आतुर सिक्किम पर्यटकोंको राज्य में आकर्षित करने के लिए नित नए-नए प्रयोग कर रहा है। चाहे वह विलेज टूरिज्म हो अथवा पारंपरिक खानपान, कैसिनो हो या औषधीय जडी-बूटियों से निर्मित तेल।...
वारसा की दो तिहाई आबादी ने दूसरे विश्व युद्ध में प्राण गंवाए थे। शहर 83 फीसदी ध्वस्त हो चुका था और हंसती चहकती नगरी सैकड़ों टन मलबे के ढेर में बदल गई थी। आज वारसा को देखकर मन खुश हो जाता है। यह पोलिश अस्मिता का प्रतीक है, बुलंद हौसलों की जीती जागती मिसाल
जिप टूर दरअसल वह सफर है जो लोहे के तारों पर हुक से बंधे होकर (लटककर) किया जाता है। आपने तस्वीरों, फिल्मों या हकीकत में लोगों को नदियां पार करते देखा होगा। ठीक उसी तरह अब यह जिपलाइन किसी जगह को नए अंदाज व नई निगाह से देखने का रोमांच है। पहाड़ पर आप एक जगह से दूसरी जगह तक का सफर इसी तार के जरिये करते हैं। दिल्ली से सटी अरावली की पहाडि़यों में राजस्थान की सीमा में घुसते ही स्थित नीमराना फोर्ट भारत के इस अकेले जिपलाइन टूर का मेजबान है।
स्वीडन भी लैपलेंड, रैनडीयर और रात के सूरज का देश है। प्रकृति यहां कितनी मेहरबान है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसके कुल भौगोलिक हिस्से का 53 फीसदी जंगलों से भरा है। यहां का 17 फीसदी इलाका पहाडों से और 9 फीसदी झीलों व नदियों से बना...
आम तौर पर चंबा का नाम आते ही लोगों के जेहन में हिमाचल की ही तस्वीर उभर कर सामने आती है, लेकिन यदि आप उत्तराखंड आएं तो यहां भी आप चंबा के दर्शन कर सकते हैं। इस चंबा की खूबसूरती भी देखते ही बनती है। फर्क सिर्फ इतना है कि हिमाचल का चंबा पर्यटन के नक्शे पर अपना मुकाम बना चुका है जबकि उत्तराखंड में स्थित चंबा अभी अपनी जगह बनाने की कोशिश में है।
लद्दाख हिमालयी दर्रो की धरती है। अपने अनूठे प्राकृतिक सौंदर्य के लिए लद्दाख दुनिया में बेमिसाल है। यहं बौद्ध संस्कृति की स्थापना दूसरी सदी में ही हो गई थी। इसी के चलते इसे मिनी तिब्बत भी कहा जाता है। लद्दाख की ऊंचाई कारगिल में 9000 फुट से काराकोरम में 25000 फुट तक है।
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