आल्हा और वीर भूमि महोबा एक दूसरे के पर्याय हैं। यहां की सुबह आल्हा से शुरू होती है और उन्हीं से खत्म। यहां नवजात बच्चों के नामकरण भी आल्हखंड के नायकों के नाम पर रखे जाते हैं। कोई भी सामाजिक संस्कार आल्हा की पंक्तियों के बिना पूर्ण नहीं होता। यहां...
दुनिया में रुकने के लिए सर्वश्रेष्ठ जगह का खिताब किसी के लिए भी बेहद सम्मानजनक है, चाहे वह किसी की भी ओर से आए। इसमें और भी तारीफ की बात तब है जब खिताब इसलिए आए कि वह जगह पर्यावरण के लिहाज से सबसे अनुकूल है, स्थानीय जनजीवन को बदले में कुछ दे रही...
ब्रिटेन से हमारा खास नाता रहा है। लेकिन ब्रिटेन को भारत से ज्यादा से ज्यादा सैलानियों की दरकार है। इसीलिए वह अपने यहां आने वाले हिंदुस्तानी सैलानियों को ज्यादा से ज्यादा सहूलियतें देने में लगा है।
ब्रिटेन का पर्यटन उद्योग 140 अरब पाउंड का है।...
फूलों की घाटी का नाम तो आपने सुना ही होगा। जी हां चमोली जनपद की प्रसिद्ध तीर्थ स्थली बद्रीनाथ धाम के पास गंधमादन पर्वत पर स्थित फूलों की घाटी या वैली ऑफ फ्लावर्स। इतनी ही सुंदर पर अपेक्षाकृत कम प्रसिद्ध फूलों की एक और घाटी उत्तराखंड राज्य में...
कोई आए तो
बडे धूम-धाम के साथ चलाई गई रॉयल राजस्थान ऑन व्हील्स को सैलानियों का इंतजार है। दूसरे चक्कर के बाद ही उसका दम फूलने लगा था। उसके बाद उसका परिचालन रोकना पडा। आखिर इतनी शानौ-शौकत वाली गाडी को चलाने का खर्च भी खासा आता है। पिछले हफ्ते इसका...
ट्रैकिंग का शौक फैलने लगा है तो लोग अपने आस-पास भी इसका मौका निकालने लगे हैं। पहाड़ों में ट्रैकिंग के लिए दूर जाना आखिर हमेशा तो मुमकिन नहीं होता। फिर एक-दो दिन की छुट्टी हो तो आसपास ही कहीं ट्रैकिंग करना मजेदार रहता है। अरावली पहाडि़यां ऐसे कई मौके उपलब्ध कराती हैं
सोमनाथ का ज्योतिर्लिंग सर्पो की कुंडलियों से आवेष्ठित सूर्यदेव की रश्मियों के समान दैदीप्यमान मुर्गी के अंडे के आकार का भूमि के मध्य में स्थित था। कहा जाता है कि चंद्रमा ने इसे सादर उठाकर ब्रह्म शिला के ऊपर इसकी स्थापना की। मंदिर का बार-बार खंडन और जीर्णोद्धार होता रहा पर शिवलिंग यथावत रहा
अमेरिका-कनाडा सीमा पर स्थित नियाग्रा फॉल्स उत्तर अमेरिका की सबसे मुखर प्राकृतिक छवि के रूप में पहचाने जाते रहे हैं। हम हिंदुस्तानियों में से कई ने महानगरों में फुटपाथ पर बिकते पोस्टरों से नियाग्रा को पहचाना है, उसकी विराटता को महसूस किया है और उसे नजदीक से देखने की लालसा पाली है
छत्तीसगढ स्थापत्य कला के अनेक उदाहरण अपने आंचल में समेटे हुए हैं। यहां के प्राचीन मंदिरों का सौंदर्य किसी भी दृष्टि से खजुराहो और कोणार्क से कम नहीं है। यहां के मंदिरों का शिल्प जीवंत है। छत्तीसगढ की राजधानी रायपुर से लगभग 116 किलोमीटर उत्तर दिशा...