
पिछले साल एक गैर सरकारी कवायद में दुनिया के जो नए सात आश्चर्य चुने गए थे, पेरू में माचू-पिच्चू के शिखर भी उनमें से एक थे। ये शिखर इंका सभ्यता के अवशेषों को अपने में समेटे हुए हैं। इन्हीं की यात्रा कराती है एक राजसी ट्रेन। ज्यादातर लोगों के लिए समुद्र तल से 2350 मीटर की ऊंचाई पर स्थित माच्चू-पिच्चू के शिखरों की यात्रा अपने आप में एक दुर्लभ अनुभव होती है। यह ट्रेन इस जादुई यात्रा को और भी यादगार बना देती है। इंका सभ्यता के इस गुमशुदा शहर (लॉस्ट सिटी) जाने के दो ही तरीके हैं, या तो पेरू रेल की ट्रेनों से या फिर पैदल।
यूं तो इस इलाके में पेरू रेल की कई सेवाएं हैं लेकिन इनमें से सबसे ज्यादा लोकप्रिय है उसकी राजसी ट्रेन। इस ट्रेन का नाम है हिरम बिंघम। इसे उसी खोजी आदमी के नाम पर रखा गया है जिसने 23 जुलाई 1911 को इन अद्भुत इंका अवशेषों को खोज निकाला था। हिरम बिंघम को कस्को और माच्चू-पिच्चू के बीच यात्रा का सबसे आलीशान जरिया माना जाता है। इसकी सेवाएं 2003 से शुरू हुईं। नीले व सुनहरे रंग में रंगे इसके डिब्बे 1920 के दशक की पुलमैन ट्रेनों की शानो-शौकत की याद दिलाते हैं। ट्रेन में दो डाइनिंग कार, एक ऑब्जर्वेशन कार और एक किचन कार है और एक बार में 84 यात्रियों को ले जाने की इसकी क्षमता है। हर डाइनिंग कार में 42-42 लोग बैठ सकते हैं।
यह दुनिया की बाकी शाही रेलगाडियों की तरह नहीं क्योंकि इसमें बिस्तर, अलग केबिन या रात बिताने की सुविधा नहीं है। यह ट्रेन कस्को के पास परोय स्टेशन से माच्चू-पिच्चू तक का सफर साढे तीन घंटे में पूरा करती है। सवेरे नौ बजे शुरू होने वाली यात्रा साढे 12 बजे माच्चू-पिच्चू पर खत्म होती है और वापसी में शाम को सवा छह बजे सफर शुरू होता है जो दस बजे परोय में खत्म होता है। दिन में बीच के चार-पांच घंटे एक जानकार गाइड के निर्देशन में इंका सभ्यता के अद्भुत अवशेषों को देखने में लगाए जाते हैं। वैसे गाइड पूरे रास्ते में भी आपको तमाम जानकारियां देते रहते हैं।
सफर में जिस समय आप डाइनिंग कार में नाश्ता या भोजन न कर रहे हों तो समय बिताने, आराम से बैठने व गपशप करने के लिए एक ऑब्जर्वेशन सह बार कार है। इस डिब्बे की चौडी खिडकियां जहां आपको बाहर की प्राकृतिक खूबसूरती का शानदार नजारा दिखलाती हैं, वहीं अंदर मौजूद बार आपको तर करता रहता है। ट्रेन का रास्ता एंडीज पर्वतश्रृंखला के बीच नदियों, गांवों व हरी-भरी वादियों से होकर गुजरता है। इसलिए सफर में भी पूरा लुत्फ मिलता है। सवेरे कस्को से चलने के बाद ट्रेन में ब्रंच (ब्रेकफास्ट और लंच के बीच की चीज) मिलता है। दोपहर में माच्चू-पिच्चू पहुंचने पर वहां चाय मिलती है। शाम को ट्रेन में वापसी के सफर पर रवाना होने के बाद एक बार फिर चाय मिलती है। उसके बाद कॉकटेल और लजीज डिनर। शाम के समय की एक और खास बात लाइव म्यूजिक और मनोरंजन होता है। पेरू के पारंपरिक कलाकार ट्रेन के भीतर अपने संगीत व कला से आपको रू-ब-रू कराते हैं।
हिरम बिंघम पूरे साल रविवार को छोडकर सप्ताह में हर दिन चलती है। यूं तो इसकी क्षमता 84 सैलानियों की है लेकिन गाडी चलाने के लिए कम से कम 15 सैलानी होना जरूरी है। अप्रैल से अक्टूबर का समय व्यस्त सीजन का होता है। नवंबर से मार्च का समय मंदी का होता है। विशेष मांग की स्थिति में ट्रेन को चार्टर भी किया जा सकता है। ट्रेन का किराया 588 डॉलर यानी लगभग साढे तेईस हजार रुपये है। इस किराये में ट्रेन का किराया, वेलकम ड्रिंक, पानी, कॉफी, लाजवाब वाइन, जाते समय ब्रंच, 15 यात्रियों पर एक प्रोफेशनल टूर गाइड, ट्रेन से उतरने के बाद माच्चू-पिच्चू आना-जाना, वहां का प्रवेश शुल्क, माच्चू-पिच्चू लॉज में ही दोपहर की चाय, वापसी के सफर में गरम-ठंडे पेय, वाइन, कॉकटेल और तमाम तरह का खाना- सब कुछ शामिल है। यानी एक बार ट्रेन में पहुंचने के बाद आपको किसी चीज की चिंता करने की जरूरत नहीं है। यहां तक कि शाकाहारी लोगों के लिए भी विशेष मेनू की व्यवस्था है। ट्रेन चार्टर की जाए तो मेनू भी अपनी पसंद से तैयार कराया जा सकता है।