नई दिल्ली। बीजिंग से बैरंग लौटने के बाद भारतीय खिलाडियों ने पुराना राग अलापते हुए हार के लिए कोई न कोई बहाना बनाना शुरू कर दिया था लेकिन मुक्केबाज अखिल कुमार ऐसे एकमात्र खिलाड़ी थे जिन्होंने ऐसा कोई बहाना नहीं बनाया। उन्होंने क्वार्टर फाइनल में हार के बाद कहा कि मैं उन लोगों में नहीं हूं जो आंसू बहाते हैं। यदि मैं जीत का जश्न मना सकता हूं तो हार स्वीकार करने का दम भी मेरे अंदर होना चाहिए।
किसी खिलाड़ी ने कहा कि उसका प्रतिद्वंद्वी बहुत कड़ा था तो किसी ने चोट का बहाना बनाया। किसी को बीजिंग की परिस्थितियां पसंद नहीं आई तो कोई प्रारूप को लेकर परेशान रहा। कुछ खिलाडियों ने तो यहां तक कहा कि वह अपनी सर्वश्रेष्ठ फार्म में नहीं थे। भारत को निशानेबाज राज्यवर्धन सिंह राठौड़, अंजलि भागवत, अवनीत कौर सिद्धू, मानवजीत सिंह, गगन नारंग आदि से पदक की आस थी लेकिन ये सब अपने सर्वश्रेष्ठ तक भी नहीं पहुंच पाए।
एथेंस ओलंपिक के रजत पदक विजेता राठौड़ ने डबल ट्रैप में फाइनल्स के लिए क्वालीफाई न कर पाने के बाद कहा कि उन्हें निशाना पढ़ने में दिक्कत हुई। उन्होंने कहा, 'पिछले दस दिन से मैं निशाने पढ़ने का प्रयास कर रहा था लेकिन आज मुझे इसमें कुछ परेशानी हुई।' ट्रैप में 12वें नंबर पर रहने वाले मानवजीत ने इसके लिए अपनी खराब फार्म को दोषी माना। उन्होंने हार के बाद कहा, 'मैं 2006 और 2007 की तरह अपनी सर्वश्रेष्ठ फार्म में नहीं था। मुझसे काफी अपेक्षाएं थी लेकिन फार्म और भाग्य में उतार-चढ़ाव आता रहता है।'
अंजलि भागवत को दस मीटर एयर रायफल में तालमेल बिठाने में दिक्कत हुई तो अवनीत ने कहा, 'मैं मानसिक रूप से मजबूत नहीं थी। मैं अपने दिमाग पर नियंत्रण नहीं कर रख पाई।' ये दोनों महिला निशानेबाज जब 50 मीटर रायफल थ्री पोजीशन में हार के बाद चुपचाप निकल गई तो भारतीय टीम के हंगेरियन कोच लाजलो जुसाक ने कारतूस की कमी का बहाना बनाने में देर नहीं लगाई। उन्होंने कहा, 'जैसे हालात हैं उनमें ओलंपिक पदक नहीं जीते जा सकते हैं।'
गगन नारंग दस मीटर एयर रायफल के बाद आगे भी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए। हैदराबाद के इस निशानेबाज ने 50 मीटर रायफल प्रोन में लचर प्रदर्शन के बाद देश में निशानेबाजी की बुरी दशा का रोना भी रोया। उन्होंने कहा, 'मैंने पहले यह इसलिए नहीं कहा क्योंकि लोग कहते कि हम ओलंपिक में उतरने से पहले ही बहाना बना रहे हैं।' टेनिस में भारत को पदक की आस थी लेकिन लिएंडर पेस और महेश भूपति की जोड़ी क्वार्टर फाइनल में रोजर फेडरर और स्टानिस्लास वावरिंका की स्विस जोड़ी से 2-6, 4-6 से आसानी से हार गए। बाद में पेस ने फेडरर जैसे मजबूत प्रतिद्वंद्वी का सामना होने की बात कहकर दिल बहलाने की कोशिश की।
पेस ने कहा, 'दुनिया का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी जब आपका प्रतिद्वंद्वी हो तो आप कुछ नहीं कर कर सकते हैं लेकिन वह इस बात को भूल गए की स्पेन के राफेल नडाल ने फेडरर को लाल बजरी और उनके पसंदीदा ग्रॉस कोर्ट पर मात देकर उनकी बादशाहत को खत्म किया। अब पेस को यह बात अच्छी तरह से जाने लेनी चाहिए कि बहाना बनाने की बजाय अपने खेल में सुधार करना होगा नहीं तो उन्हें ऐसे ही हार का मुंह देखना पड़ेगा। वहीं बड़बोली एथलीट अंजू बाबी जार्ज भी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पाई और क्वालीफाइंग के तीनों प्रयास में फाउल करके बाहर हो गई। विश्व चैंपियनशिप की कांस्य पदक विजेता अंजू ने हालांकि इसे अपनी गलती नहीं माना और टखने की चोट का बहाना बनाया।
अंजू ने हार के बाद कहा, 'ट्रायल्स के दौरान टखना चोटिल हो जाने के बाद मैं जानती थी कि परिणाम क्या होगा। मुझे लगता है कि एक बार पैर में चोट लग जाने के बाद आपके पास करने के लिए कुछ नहीं बचता।' तीरंदाज मंगल सिंह चंपिया ने पुरुषों की व्यक्तिगत स्पर्धा में हार के बाद प्रारूप पर गुस्सा निकाला। उन्होंने कहा, 'प्रारूप ऐसा था कि मैं खुलकर नहीं खेल पाया।' मुक्केबाज ए एल लाकड़ा ने शुरू में ही कड़े प्रतिद्वंद्वी से मुकाबला होने की बात कही तो तैराकी कोच निहार अमीन ने अपने तैराकों को अनुभवहीन कहकर बचाव की मुद्रा अपनाई। पहलवान राजीव तोमर के कोच पीआर सोढ़ी ने कहा, 'राजीव ने मेरी सलाह नहीं मानी।'
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