यादगार रहा ओलंपिक का अनुभव   
 
 

(मानवजीत की कलम से)

ओलंपिक के लिए बीजिंग गए हम ज्यादातर प्रतियोगियों का अभियान खत्म हो गया है, लेकिन इस दौरान बीजिंग में मिला अनुभव यादगार रहा जो लंबे समय तक हमारे साथ रहेगा। हर छोटी-बड़ी प्रतियोगिता महत्वपूर्ण होती है, लेकिन ओलंपिक के मायने अलग और खास है। इससे बड़ा और प्रेरणादायी कुछ नहीं होता। इस दौरान हमें ओलंपिक खेलों में अपने देश का झंडा ऊंचा रखने के लिए समर्पित खिलाडि़यों के कितने ही प्रेरक किस्से सुनने को मिले। उनकी ये मेहनत और समर्पण विरोधियों के लिए भी प्रेरणा होता है।


मेरे लिए हालांकि ट्रैप शूटिंग फाइनल में जगह न बना पाना निराशाजनक रहा पर इसने मुझे भविष्य के लिए खुद पर भरोसा करना सिखाया। अब हमारे पास कामनवेल्थ और एशियन खेलों के अलावा लंदन में 2012 में होने वाले ओलंपिक खेलों की तैयारियों का मौका है। अभिनव बिंद्रा निश्चित ही हमारे लिए ओलंपिक की उपलब्धि रहे। उनके बारे में काफी कुछ लिखा जा चुका है। उनके प्रदर्शन से भारत में ओलंपिक खेलों और शूटिंग की लोकप्रियता बढ़ने की उम्मीद है। अपनी कड़ी मेहनत के बल पर वह उन सभी चीजों के हकदार थे जो उन्हें मिली। इन सभी के बीच तीनों मुक्केबाजों (अखिल, जितेंद्र, विजेंद्र) के उल्लेखनीय प्रदर्शन को भी नकारा नहीं जा सकता। ये तीनों ओलंपिक पदक से एक कदम की दूरी पर है। कितना अच्छा होगा अगर ये मुक्केबाज सेमीफाइनल में प्रवेश कर लें। हरियाणा में मुक्केबाजी काफी लोकप्रिय है। साथ ही भिवानी के इन मुक्केबाजों के प्रदर्शन से कई और युवा भी ओलंपिक खेलों के लिए आगे आएंगे।
बैडमिंटन में सायना नेहवाल दुर्भाग्यशाली रहीं जब शानदार प्रदर्शन के बावजूद वे सेमीफाइनल में जगह नहीं बना पाई। लिंएडर पेस और महेश भूपति अपने एक खराब दिन पर रोजर फेडरर और स्टेनिसलास वावरिंका के हाथों पराजित होकर बाहर हो गए, लेकिन इससे इस जोड़ी का भारतीय टेनिस में दिया गया योगदान कम नहीं हो जाता।

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:: Jagran Olympic 2008 Medals Tally ::
पदक तालिका
क्रम संख्या देश सोना चांदी कांसा कुल
1 चीन 51 21 28 100
2 अमेरिका 36 38 36 110
3 रूस 23 21 28 72
4 ब्रिटेन 19 13 15 47
5 जर्मनी 16 10 15 41