
ओलंपिक में स्वर्ण पदक का स्वाद भारत ने पहली बार 1928 में एम्सटर्डम में चखा। हालैंड की राजधानी में हुए इस ओलंपिक में भारत की पुरुष हाकी टीम ने फाइनल में मेजबान हालैंड को 3-0 से हराया। भारत की ओर से तीनों गोल हाकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद ने किए। ओलंपिक में भारतीय हाकी टीम की स्वर्णिम कामयाबी का सिलसिला 1956, मेलबर्न ओलंपिक तक निर्बाध रूप से चला। इस दरम्यान भारत ने लगातार छह स्वर्ण जीते। भारतीय हाकी टीम का विजय रथ 1960, रोम ओलंपिक में पाकिस्तान ने रोका। पाक टीम ने फाइनल में भारत को 1-0 से मात दी। फलस्वरूप भारत को रजत पदक से ही संतोष करना पड़ा। हालांकि भारत ने अगले ही ओलंपिक (1964, रोम) में पाकिस्तान से उस हार का बदला चुकता कर लिया। फाइनल में भारत ने अपने परंपरागत प्रतिद्वंद्वी को 1-0 से मात दी। टोक्यो ओलंपिक के बाद 1968 मैक्सिको ओलंपिक और 1972 म्यूनिख ओलंपिक में भारतीय हाकी टीम को कांस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा। 1968 में पाकिस्तान ने जबकि 1972 में पश्चिमी जर्मनी ने पुरुष हाकी का स्वर्ण जीता। इस तरह भारतीय पुरुष हाकी टीम ने ओलंपिक खेलों में देश को आठ स्वर्ण, एक रजत और दो कांस्य पदक दिलाए।