नागरिकता कानून में परिवर्तन के साथ ही दुनिया के 16 देशों के प्रवासी भारतीयों को अब दोहरी नागरिकता की सुविधा हासिल हो गई है। गौरतलब है कि गत 9-11 जनवरी को दिल्ली में आयोजित पहले प्रवासी भारतीय दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसकी घोषणा की थी। नागरिकता विधेयक 2003 में परिवर्तन के मौके पर संसद में हुई बहस के दौरान उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी ने बताया कि इसके माध्यम से विदेशों में बसे भारतवासी और भारतवंशियों को देश के विकास में योगदान करने का मौका मिलेगा। साथ ही 1955 के नागरिकता कानून में परिवर्तन करने वाले इस विधेयक से विदेशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों और पूर्व भारतीयों के बालिग बच्चों को नागरिकता हासिल करने में सुविधा होगी। इस कानून के पारित होने के साथ ही 16 विशेष देशों के भारतीय मूल के नागरिकों या ऐसे भारतीय, जो बाद में इन देशों की नागरिकता हासिल करते हैं, को भारतीय नागरिकता का अधिकार मिल जाएगा।
मुख्यत: विकसित देशों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों के लिए दोहरी नागरिकता की मांग बहुत पुरानी रही है। प्रवासी भारतीय दिवस वह सुनहरा मौका रहा, जहां इसे जोरदार तरीके से उठाया गया। प्रवासी भारतीय दिवस के मौके पर हुई घोषणा को कार्यरूप देने के लिए सबसे पहले नागरिकता कानून 1955 में परिवर्तन का विधेयक राज्य सभा में 9 मई 2003 को पेश किया गया।
इस विधेयक की मुख्य बातें इस प्रकार हैं-
*दोहरी नागरिकता हासिल करने वाले विदेशी पासपोर्टधारियों के भारत आने-जाने में अब कोई बाधा नहीं होगी, क्योंकि इसके बाद उनके पास कई तरह के वीजा की कोई जरूरत नहीं है।
*आर्थिक रूप से संपन्न एवं आधुनिक देशों में रहने वाले भारतीय मूल के नागरिकों के पास दिमाग के साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में दक्षता हासिल है। इसमें कोई दुविधा नहीं कि निवेश के माहौल और वर्तमान वाणिज्यिक दौर में इसका मुख्य ध्येय निवेश बढ़ाना है। दोहरी नागरिकता के माध्यम से निवेश और संसाधनों के लेन-देन के मामले में यह सुविधा बेहद मददगार साबित होगी।
*हालांकि प्रवासी भारतीयों के लिए दोहरी नागरिकता की मांग के पीछे मुख्य कारण देश के प्रति भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक लगाव रहा है। भारतीय मूल के नागरिकों के अपने मूल देश की संस्कृति से भावनात्मक जुड़ाव को और मजबूत करने के लिहाज से यह पहल बेहद प्रासंगिक है। गौरतलब है कि प्रवासी भारतीय अपनी गतिविधियों के माध्यम से मौके-मौके पर भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अपना योगदान करते रहते हैं। दोहरी नागरिकता इस बंधन को और मजबूत करने के साथ ही प्रवासी भारतीयों को देश के सामाजिक विकास में सीधा योगदान के लिए प्रेरित करेगी।
*दोहरी नागरिकता विदेशों में रहने वाली नई पीढ़ी के भारतवंशियों की अपने मूल देश के साथ रिश्तों को और मजबूती करेगी। इसके साथ उन्हें अपनी जड़ों से जुड़े रहने का भी मौका मिलेगा।
पहले प्रवासी भारतीय दिवस ने दुनिया के विभिन्न कोनों में रहने वाले भारतवंशियों को एक मंच पर लाने का दुरूह कार्य पूरा कर दिया है। इस सफल आयोजन के माध्यम से ही पहली बार महान भारतीय परिवार की उपलब्धियों का लोगों को जानकारी मिली। दूसरा प्रवासी भारतीय दिवस इस प्रयास को और आगे बढ़ाने के साथ ही परिवार के आपसी विश्वास को और मजबूत करेगा। दूसरा प्रवासी दिवस पहले प्रवासी दिवस पर होने वाली घोषणाओं के पूरे होने का गवाह भी बनेगा। इसके अलावा अभी खाड़ी बीमा योजना और विदेशी सहायता कानून में परिवर्तन संबंधी कई घोषणाएं बाकी हैं। इस मौके पर पहले प्रवासी दिवस पर ली गई सामूहिक पहल को आगे बढ़ाने के साथ ही प्रवासी भारतीयों को एक साथ एकत्रित करके वैश्विक भारतीय परिवार की क्षमता को सूत्रबद्ध करने का काम सर्वप्रमुख एजेंडे में होगा।
पहले प्रवासी भारतीय दिवस के प्रतिनिधियों से मिली प्रतिक्रिया के आधार पर कार्यक्रम के आयोजक फिक्की का मानना है कि इससे देश को महत्वपूर्ण राजनयिक उपलब्धियां हासिल हुई हैं। इस आयोजन से प्रवासियों के मन में भारत के प्रति एक सकारात्मक सोच विकसित हुई है।
दोहरी नागरिकता हासिल करने वाले देश-
1. अमेरिका
2. कनाडा
3. ब्रिटेन
4. हालैंड
5. इटली
6. आयरलैंड
7. पुर्तगाल
8. स्विटजरलैंड
9. ग्रीस
10. साइप्रस
11. इस्त्राइल
12. ऑस्ट्रेलिया
13. न्यूजीलैंड
14. फ्रांस
15. स्वीडन
16. फिनलैंड
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