रिपोर्ट में पर्सन्स ऑफ इंडियन ओरिजिन कार्ड (पीआईओ) योजना के तहत प्रवासी भारतीयों को दोहरी नागरिकता देने के लिए शर्तो को और आसान बनाने की बात कही गई है। सरकार द्वारा (चौथी पीढ़ी, पाकिस्तान, बांग्लादेश व कुछ अन्य देशों को छोड़कर) यह योजना मार्च 1999 में लागू की गई थी। इसमें 1000 डॉलर फीस के साथ 20 वर्षो के लिए मुफ्त वीजा देने का प्रावधान किया गया। अप्रैल 2001 में एक उच्च स्तरीय कमेटी ने अपनी रिपोर्ट दी, जिसमें कुछ संशोधन की सिफारिश की गई-
1. वीजा अवधि भले ही 10 वर्षो का रहे, लेकिन फीस को कम किया जाये।
2. 18 वर्ष से कम आयु के लोगों के लिए फीस कम की जाये।
3. दो आधार पर (उच्च व मध्य/निमन् आमदनी वाले आवेदकों) फीस तय किए जाएं।
4. विशेष भारतीय विकास बांड प्राप्त करने वाले उपभोक्ता को पीआईओ कार्ड जारी किया जाए।
5. वैसे वरिष्ठ पीआईओ कार्डधारक नागरिक, जो भारत की नागरिकता लेकर शेष जीवन यहां बिताना चाहते हैं उनके लिए मार्ग सुगम बनाया जाए।
इसके साथ ही कमेटी ने पीआईओ कार्ड की प्राप्ति को और आसान बनाने के लिए कुछ और सिफारिशें की। इसके लिए भारतीय अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर अलग से काउंटर बनाने की बात कही, भारत में ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने व बैंक एकाउंट खोलने के लिए आवासीय प्रमाण प्रस्तुत करने की आवश्यकता को समाप्त करने की सिफारिश की।
सिंघवी कमेटी ने प्रत्येक वर्ष 9 जनवरी (इसी दिन महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से स्वदेश लौटे थे) को प्रवासी भारतीय दिवस मनाने तथा इस दौरान प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार देने की बात कही। साथ ही इसमें व्यापारिक व शैक्षणिक विषय पर सेमीनार आयोजित करने की सिफारिश की गई।
1. प्रवासी भारतीय को अपनी सभ्यता और संस्कृति से जोड़े रखने के लिए इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेसंस, (आईसीसीआर) उनसे गहरा रिश्ता कायम करे।
2. विदेशों में हमारे सांस्कृतिक केंद्रों की गतिविधियां इतना प्रभावी हो कि प्रवासी भारतीयों को जोड़ा जा सके।
3. कई धार्मिक संगठन यथा भारतीय विद्या भवन, राम कृष्ण मिशन, चिन्मय मिशन आदि, जो विदेशों में भारतीय संस्कृति व भाषा से संबंधित कार्यक्रम आयोजित करते हैं, उन्हें आईसीसीआर द्वारा विशेष प्रशिक्षण दिया जाए।
4. प्रवासी भारतीय छात्रों को भारतीय परिप्रेक्ष्य में मानवता व समाज शास्त्र से संबंधित विषयों की पढ़ाई के लिए विश्वविद्यालय में छात्रवृत्ति, सीटों की संख्या निर्धारित की जाए। साथ ही भारतीय संस्कृति व भाषाओं के लिए अध्ययन के लिए पत्राचार पाठयक्रम की शुरुआत की जाए।
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