वयोवृद्ध लेखक सुशील कुमार का निधन
नई दिल्ली। हिंदी के वयोवृद्ध लेखक एवं पत्रकार सुशील कुमार का शुक्रवार को दिल का दौरा पडने से निधन हो गया। वह 73 वर्ष के थे। उनके परिवार में पत्नी के अलावा तीन पुत्र तथा चार पुत्रियां हैं। 1935 में इलाहाबाद में जन्मे कुमार हिंदी रीडर्स डाइजेस्ट पत्रिका सर्वोत्तम ...
हिंदी जगत में लेखक की वैचारिक प्रतिबद्धता ही लंबे समय तक लेखक के मूल्यांकन और आलोचकों के बीच उसकी स्वीकृति तथा प्रतिष्ठा का केंद्रीय आधार रही है। साहित्य जगत को इसका लाभ तो मिला है, पर नुकसान ज्यादा उठाने पडे हैं। आज के बदले संदर्भो में यह कितनी प्रासंगिक है, ...
कथा साहित्य में मेरा अपना फिंगरप्रिंट है: रामधारी सिंह दिवाकर
प्रेमचंद के बाद प्राय: यह समझा जाता रहा है कि उनके बाद गांव पर लिखने को क्या बचा है। किंतु समकालीन कथाकारों में लगभग चालीस वर्षो से लेखनरत रामधारी सिंह दिवाकर एक जमाने में धर्मयुग, सारिका, नई कहानियां जैसी पत्रिकाओं के स्टार कथाकार हुआ करते थे। 78 में नए गांव ...
सआदत हसन मंटो उर्दू जुबान के बहुचर्चित और विवादास्पद लेखक माने जाते हैं। मंटो का रचनाकाल आज के दौर से बहुत अलग था। समूचा देश उस समय आजादी के लिए छटपटा रहा था। साहित्य से भी अपेक्षाएं थीं कि वह आजादी के लिए, नवजागरण के लिए और उदात्त राष्ट्रीय भावनाओं की जाग्रति के लिए अग्रसर हो। ...
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