वह यात्रियों के आगे हाथ फैलाकर याचना कर रहा था। बडी आशा से उसने गोपाल के सामने खडे होकर हाथ बढाया। गोपाल ने उसे एक रुपए का सिक्का दिया। उस मांगने वाले की आंखें आश्चर्य से चमकने लगीं।
अरे बाबूजी! क्या दे रहे हैं?
क्यों क्या दे दिया ...
रमेश और दिनेश फैक्ट्री से आने के बाद ज्यों ही कोठी में घुसे दुर्गन्ध के कारण उसका बुरा हाल हो गया था। जब वह दोनों अम्मा के कमरे के सामने गये तब उल्टी सी आने लगी उनकी दुर्दशा देखकर।
अम्मा गंदगी में सनी हुई थीं, और कराह रही थीं। ...
महेन्द्र प्रताप की छवि ईमानदार कर्त्तव्यपरायण व अनुशासनप्रिय अधिकारी के रूप में रही। उनका यही गुण उनके अधीनस्थों के लिए सिर दर्द था। कार्यालय में सिर्फ उनकी तूती बोलती।
उनका स्थानान्तरण हुआ तब उनके अधीनस्थ महेन्द्र प्रताप का विदाई समारोह ही भूल गए। कोई उन्हें कार्यालय के फाटक तक ...
सोसायटी के लोग इकट्ठा थे। मिश्रा जी बोले, बाप रे, क्या गर्मी पड रही है, तापमान कितना बढ गया है। वर्मा जी ने बात बढाई, हां, और इस बार तो बरसात भी नहीं हुई। बिजली-पानी की भी कितनी परेशानी हो रही है। यादव जी ने टिप्पणी दी, यह सब ग्लोबल ...
एक के बाद एक हो रही आतंकवादी घटनाओं के विरोध में शहर की सभी साहित्यिक इकाईयों ने शांति मार्च करने का निर्णय लिया, आयोजकों ने सारी कार्य योजना बना ली, बस एक ही बात खटक रही थी कि इसमें अच्छी संख्या कैसे हो? एक महोदय ने इस समस्या का समाधान ...
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