अहिंदी शब्द से मुझे घृणा है

अहिंदी शब्द से मुझे घृणा है   


¨हदी और तेलुगू के यशस्वी साहित्यकार, चंदामामा के पूर्व सम्पादक, प्रसिद्ध बालसाहित्य सर्जक, अनन्य हिन्दी साहित्य साधक डॉ. बालशौरि रेड्डी का जन्म आन्ध्र प्रदेश में हुआ। मातृभाषा तेलुगू है। और जीवन हिन्दी में लेखन के लिए समर्पित। 14 उपन्यास, लगभग दर्जनभर नाटक, कहानी संस्मरण, संस्कृति एवं साहित्य से संबंधित पुस्तकें। ...

संस्कृत को हॉबी की तरह पढ़ना चाहिए   


साहित्य के सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ सम्मान से वर्ष 2006 के लिए संस्कृत के उद्भट विद्वान डा. सत्यव्रत शास्त्री को बुधवार को सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में थाइलैंड की राजकुमारी सुश्री महाचक्री सिरिंथौर्न ने दिया। अपनी अस्सी वर्ष की आयु में डॉ. सत्यव्रत शास्त्री ने कई ऊंचे मुकाम हासिल किए हैं। ...

उनके जैसा कोई दूसरा नहीं देखा   


वरिष्ठ कथाकार उषा महाजन अपनी कहानियों के अलावा सुप्रसिद्ध अंग्रेजी लेखक खुशवंत सिंह की चर्चित कृतियों के हिंदी रूपांतरण से जानी जाती है। प्रस्तुत है उनसे बातचीत के अंश-

[आपका अधिकांश रचनात्मक लेखन कहानियां, लेख, शोध, (भारतीय शहरी समाज के दांपत्य संबंधों के बदलते मूल्य) स्त्री-पुरुष संबंधों पर ही ...

मन की इंजीनिय¨रग ही लेखन है : राजेश जैन   


इंजीनियरिंग और लेखन जैसे दो विपरीत ध्रुवों को अपने भीतर संतुलित रखने वाले रचनाकार राजेश जैन की विभिन्न विधाओं में बत्तीस से अधिक मौलिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। वे लेखन को भी मन की इंजीनियरिंग मानते हैं और शायद इसीलिए पहले सात इंजीनियर कवियों की तकनीकी मूल्य क्रेंद्रित कविताओं का संकलन यंत्र सप्तक संपादित किया फिर पंद्रह इंजीनियर कथाकारों की टेक्नो-लिटरेरी कहानियों के संग्रह कथा ऊर्जा डॉट कॉम [पेंगुइन बुक्स] की साहित्यिक गलियारों में बहुत चर्चा हुई। ...

पचहत्तर के युवा परमानन्द   


इसी 9 फरवरी को 75वें में प्रवेश करने वाले ख्यातिलब्ध आलोचक प्रो. परमानन्द श्रीवास्तव जीवन के चौहत्तर वर्षो से लबालब भरे हैं। लगभग चार दशकों की कविता-कहानी-आलोचना की गहमागहमी; लेखन-सम्पादन; साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों के जीवंत साक्षी और नए रचनाकारों के संरक्षक-आलोचक, परमानन्द श्रीवास्तव से इस अवसर पर की गई बातचीत अपेक्षा ...