पढाई में ग्रेजुएशन के दौरान ही उसकी शादी के चर्चे शुरू हो गये। मां और दादी उसकी खूबसूरती पर मोहित होकर कहतीं कि उसकी जोड का दूल्हा मिलेगा कहां?
अन्तत: एक दिन ऐसा आया कि उसके घर के दरवाजे पर शहनाईयां बजने लगीं। घरवालों की पसंद पर नम्रता की ...
क्लॉस में काफी हंसी खुशी का वातावरण था। सभी काफी गंभीरता के साथ सर का लेक्चर समझने का प्रयास कर रहे थे। परन्तु पता नहीं, ये किसका दोष था- अध्यापक का, छात्र-छात्राओं का, सेलेबस का या पढाने के लिए प्रयोग की जा रही विधियों का, कि न तो पढाने वाले को ये समझ आ रहा था कि वो क्या पढा रहा है और न ही पढने वालों को ही पता लग रहा था कि वे क्या पढ रहे हैं। ...
एमबीए की काउंसलिंग में हमारा आमना-सामना हुआ। परिचय तो पहले से था, मनोविज्ञान विभाग इलाहाबाद से हम दोनों ने एक साथ ओबी [आर्गेनाइजेशनल बिहैबियर] स्पेशलाइजेशन में पीजी किया था। पूर्वाचल की गंवई संस्कृति में पले-बढे होने के कारण मैं हद से ज्यादा अन्तर्मुखी था और पिछले दो साल एक ही छत के नीचे लगभग रोज 4 घंटे साथ रहने के बावजूद सिवाय नाम के हम एक दूसरे के बारे में कुछ नहीं जानते थे। ...
महीने का आखिरी दिन था। कुसुम मैम और सविता मैं आपस में बातें कर रही थीं। अच्छा हुआ जो ये नई प्रिंसिपल आखिरी पीरियड्स आफिशियल वर्क के लिए दे देती हैं। सारा काम इन्हीं दो तीन पीरियड्स में निपट जाता है। वरना वो पुराने वाली तो..।
सविता मैम ने ...
साकेत नगरी का वसन्तोत्सव। सरयू के तट पर आज तैराकी प्रतियोगिता का आयोजन था। प्रतियोगिता आरंभ हुई। दो हाथ एक साथ ममत्व से हिलोरें खाती सरयू का आशीष पाने झुक गए। आनंदित सरिता ने मानो आंख उठाकर देखा। उसके तट चरण का स्पर्श करने वाला एक हाथ अत्यन्त कोमल था। सुंदर चारु उंगलियां! और दूसरा पौरुषपूर्ण बलिष्ठता से सम्पन्न था। दोनों प्रतियोगियों की दृष्टि भी एक साथ उठी। प्रतियोगिता कब सम्पन्न हो गई आभास ही न रहा। ...