एकला चलो रे..

एकला चलो रे..


राहुल गांधी या सलमान खान, रतन टाटा या ए.पी.जे. अब्दुल कलाम.. लंबी लिस्ट है अकेले रहने वालों की। कभी समय नहीं मिलता तो कभी विचार, कभी करियर की आपाधापी तो कभी आजादी का सवाल..। कुल मिलाकर जिंदगी तो हर हाल में चलती है कभी खुशी कभी गम की तरह। इस एकला चलो रे में यकीन रखने वालों की लाइफस्टाइल कैसी होती है? कभी अफसोस होता है या मौज में गुजरता है जीवन, कुछ ऐसे ही सवाल हमने जानने चाहे हैं इस कवर स्टोरी में। थोड़ी सी ताक-झांक करें इनकी जिंदगी में इंदिरा राठौर के साथ।  
 
सीजन ऑफ रोमांस

सीजन ऑफ रोमांस


सर्दियों के जाते ही सोशियलाइज करने का टाइम आ जाता है। इस मौके के लिए रॉयल ब्ल्यू कलर का वेल-फिटेड फ्री-फ्लोइंग गाउन एकदम उपयुक्त है। डिजाइनर्स ने यह गाउन फॉर्मल और कैजुअल दोनों ही मौकों को ध्यान में रखते  
सर्वश्रेष्ठ सखी रेसिपी प्रतियोगिता नं.- 33

सर्वश्रेष्ठ सखी रेसिपी प्रतियोगिता नं.- 33


स्टफ्ड मशरूम सामग्री: , 16 बड़े मशरूम, 1 बड़ा चम्मच क्रीम, 2 बड़े चम्मच बारीक कटा प्याज, एक पिंच गार्लिक सॉल्ट। , विधि: , 1. मशरूम को अच्छी तरह धोकर उनके कैप और स्टेम अलग कर लें। , 2. अब स्टेम्स को बारीक काट लें और उन पर गार्लिक सॉल्ट छिड़क दें। , 3. इसमें प्याज और क्रीम डालकर अच्छी तरह मिला लें। इसके बाद मशरूम कैप्स में यह मिश्रण बराबर-बराबर भरें। ,  
रंगीन चूडि़यों का सच

रंगीन चूडि़यों का सच


चूडि़यां एक स्त्री के लिए खुशी का सबब होती हैं। रंग-बिरंगी चूडि़यां उनकी इंद्रधनुषी दुनिया का पता देती हैं। लेकिन सुहाग का प्रतीक चूडि़यां किसी-किसी को दर्द भी देती हैं। लेखक की कल्पना में भी चूडि़यां आती हैं कभी। कथाकार सहितचूडि़यों, राजनीति और अवसरवादिता के अद्भुत मेल पर आधारित एक मार्मिक कहानी।  


सखियों की राय