सखी के पत्र

      
सखी के पत्र

सखी का अक्टूबर अंक पढा। गहनों की विविध जानकारियों से भरा पत्रिका का यह अंक बेहद रोचक था। गहनों की भाषा लेख बहुत पसंद आया। इसमें गहनों की शब्दावली से जुडी अनमोल जानकारियां समाहित हैं। सोने-चांदी में निवेश को लेकर मेरे मन में अनेक भ्रम थे, जिन्हें दूर करने के लिए मैं सखी की शुक्रगुजार हूं। लेख फल-सब्जी में छिपा स्वास्थ्य हमारा के माध्यम से कई नई बातें जानने को मिलीं।सखी एक ऐसा गुलदस्ता है, जिसे हर रंग और ख्शबू के फूलों से सजाया गया है। एक ही पत्रिका में ऐसी विविधता अद्भुत है। इसके विचारपूर्ण लेखों के माध्यम से हम पाठिकाओं का मार्गदर्शन होता है। ईश्वर करे सखी हमेशा उन्नति के मार्ग पर अग्रसर रहे।

शालिनी वाजपेयी, कानपुर

सखी के अक्टूबर अंक में प्रकाशित कवर स्टोरी कैसा सच, किसका सामना के जरिये रिअलिटी शोज की सच्चाई का पर्दाप ाश किया गया है। साथ ही इस अंक में आभूषणों के विषय में बहुत उपयोगी जानकारियां दी गई हैं। खास तौर पर 11 टिप्स ज्यूलरी खरीदने के पढकर मुझे कई उपयोगी जानकारियां मिलीं। आजकल हर उम्र की स्त्रियां शादी-विवाह जैसे समारोहों के अवसर पर कुछ अलग दिखना चाहती हैं। इसलिए मेरा सुझाव है कि आप पत्रिका के आगामी अंक में इस बात की जानकारी दें कि 40-45 वर्ष की स्त्रियों का पहनावा और मेकअप कैसा होना चाहिए ताकि वे अपनी उम्र के अनुरूप आकर्षक दिखें। सखी सचमुच बहुत अच्छी सखी है, जो उपयोगी सलाह व बेहतरीन जानकारियों का खजाना लेकर हर महीने हमारे घर आती है।

ममता त्रिपाठी, लखनऊ

शादी से पहले मुझे घर का कामकाज नहीं आता था। लेकिन अचानक एक दिन मुझे सखी के रूप में ऐसी सच्ची दोस्त मिल गई, जिसने मुझे खाना बनाने से लेकर घर संवारने और बच्चों की परवरिश तक सब कुछ सिखा दिया। पत्रिका का अक्टूबर अंक बहुत पसंद आया। इसके माध्यम से मुझे गहनों के बारे में कई ऐसी नई बातें जानने को मिलीं, जो अब तक मालूम नहीं थीं। सखी को मेरी ओर से ढेर सारी शुभकामनाएं।

दीप्ति सेठ, अमृतसर

प्रिय सखी,

सितंबर अंक में तुमने रंगों का महत्व बताकर मेरी गृहसज्जा संबंधी कल्पना को साकार किया है। अब मैं भी अपने घर में एलिगेंस, रॉयल्टी, आर्ट और पॉजिटिव एनर्जी का सही तालमेल रख पाऊंगी। टेरेस गार्डन और टाइल्स के बारे में नवीनतम जानकारियां देकर तुमने मेरे मन में उठी कई शंकाओं का समाधान कर दिया है। तुमसे मंत्रों की विधि और लाभ के बारे में जानकर मुझे सही ढंग से मंत्र जपने की बहुमूल्य जानकारी मिली। रिश्तों की बारीकियां तुम बहुत अच्छी तरह समझाती हो। इतनी अच्छी रचनाओं के लिए मैं तुम्हारी आभारी हूं।

डॉ. रजनी शर्मा, जालंधर

सखी के आने का इंतजार

करती हूं खोल नजरों के द्वार

महीने में सिर्फ एक ही बार

मिलता है सखी का उपहार

इसके बिना न पाऊं चैन

इसके बिना न पाऊं करार

ज्ञान का ये है भंडार

हल करती मेरी मुश्किलें हजार

यह खुशियों से भर दे संसार

चाहे इसे पूरा परिवार

नेहा कोचर, दिल्ली

सखी के अक्टूबर अंकमें दीपावली के व्यंजनों को देख कर दिल खुश हो गया। पारिवारिक रिश्तों पर आधारित लेख और मर्मस्पर्शी कहानियां जीवन की नीरसता को सरसता में बदल कर हमें हर पल आगे बढने की सीख दे जाती हैं। सही मायने में यह पत्रिका केवल स्त्रियों की ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार की मार्गदर्शिका है।

शकुंतला तिवारी, अजमेर

सखी का इंटीरियर स्पेशल वास्तव में उत्कृष्ट प्रस्तुति लगा। जानकारीपूर्ण लेखों के माध्यम से इस पत्रिका ने यह सिद्ध कर दिया है कि इससे बढकर कोई अन्य इंटीरियर स्पेशल हो ही नहीं सकता। कवर स्टोरी तो हमेशा की तरह शानदार थी ही, पत्रिका के अन्य लेख भी स्वयं को एक-दूसरे से ही इक्कीस सिद्ध करते नजर आए। सखी की यह खासियत रही है कि इसने परिवार के प्रत्येक सदस्य के लिए कुछ न कुछ संजोकर रखा है और यही वजह है कि पत्रिका हमारे पूरे परिवार की चहेती बन गई है।

विभव सक्सेना, पीलीभीत (उप्र.)

हर माह लगातार सखी के कई अंकों को पढने केबाद मैं इस निष्कर्ष पर पहुंची हूं कि जो स्त्री घर, सेहत और सौंदर्य को संवारना चाहती है उसे पत्रिका के सभी अंकों की फाइलें बनाकर सखी को अपनी बुक शेल्फ में स्थान देना चाहिए। जिंदगी में जब कोई समस्या आए तो पत्रिका के नए-पुराने अंकों से उसे सुलझाने में मदद मिल सकती है। पत्रिका के स्थायी स्तंभों और कहानियों का कोई जवाब नहीं। ऐसा प्रतीत होता है कि यदि सखी हमारे साथ नहीं है तो हम आधे-अधूरे हैं। सच कहूं, मैं तो सखी को दिल से चाहने लगी हूं।

मनोरमा सोगानी, उज्जैन

सखी का हर अंक अपने आपमें संपूर्ण और भारतीय नारी के लिए अनूठा उपहार है। सितंबर माह में प्रकाशित पत्रिका के इंटीरियर स्पेशल अंक ने मेरे लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाई। लेख 13 विंडो ड्रेसिंग टिप्स, ओपन किचन बनाने से पहले.. लेख के माध्यम से मुझे अपने घर को सजाने के लिए अमूल्य टिप्स मिले। जब बनाना चाहें अपना घर, घर खरीदें मुसीबत छोडकर लेख उन लोगों को सावधान करता है, जो बगैर बजट व दस्तावेजों को ध्यान में रखे घर या जमीन खरीद लेते हैं। कवर स्टोरी मेरे घर केआसपास विशेष रूप से पसंद आई।

अर्चना चौहान, गाजियाबाद

प्रिय सखी,

गत दो वर्षो से मैं तुम्हारी नियमित पाठिका हूं। अब तुम मेरे जीवन का अभिन्न अंग बन गई हो। तुम्हारा हर अंदाज निराला व प्रशंसनीय है। इस भीड में तुमने अपनी अलग पहचान बनाई है। जैसे आकाश में अनगिनत तारे हैं परंतु चंद्रमा एक है, उसी प्रकार तुम भी मेरे लिए अनमोल धरोहर हो। मेरी सबसे करीबी सखी बनने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद और उज्ज्वल भविष्य हेतु शुभकामनाएं।

पूजा श्रीवास्तव, इलाहाबाद

अक्टूबर माह में प्रकाशित सखी के स्वर्णिम अंक को मेरा हार्दिक अभिनंदन। मैं यूलरी डिजाइनिंग का कार्य सीख रही हूं। पत्रिका के इस अंक में प्रकाशित लेखों गहनों की भाषा, 11 टिप्स ज्यूलरी खरीदने के, युवतियों की पहली पसंद शैंपेन डायमंड माध्यम से हमें ज्यूलरी से संबंधित कई नई जानकारियां मिलीं। सखी ने अनुभवी टीचर के रूप में गहनों के विषय में और भी बहुत कुछ सिखाया है। कवर स्टोरी कैसा सच किसका सामना के माध्यम से रिअलिटी शोज की असलियत को निर्भीकता से उजागर किया गया है।

कृष्णा, सहारनपुर

मैं मेडिकल कॉलेज की छात्रा हूं। अपनी व्यस्त दिनचर्या के बावजूद सखी का कोई भी अंक पढना नहीं भूलती। यह पत्रिका मां की तरह मेरा मार्गदर्शन करते हुए मेरे भीतर अच्छे संस्कार विकसित करती है। पत्रिका का प्रत्येक अंक मेरे भीतर स्फूर्ति प्रदान कर मुझे तरोताजा कर देता है। ऐसी उत्कृष्ट पत्रिका के प्रकाशन हेतु आपको हार्दिक बधाई।

हर्षिता मनवानी, जयपुर

शंकित मन की सारी उलझनें

सखी ने झट सुलझाई

डगमगाते कदमों को वक्त पर

सही राह दिखलाई

निराशा के बादल हटा

आशा की झडी लगाई

जीवन के हर अंधेरे कोने में

सखी से रोशनी जगमगाई

जगाती है यह हर नारी में आत्मविश्वास

बनाती है उसे सबसे खास

गीता रानी, दिल्ली

सखी प्रतिनिधि
 
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