बारहवीं कक्षा में पढने वाली अनुराधा इस बात को लेकर दुविधा में थी कि आगे किस क्षेत्र में पढाई करना बेहतर होगा। वह बडी बहन की तरह सोच विचार करने में एक साल बर्बाद नहीं करना चाहती थी। ऐसा कोर्स करना चाहती थी, जिसमें अधिक समय भी न लगे और कोर्स के बाद नौकरी भी आसानी से मिल जाए। एक दिन उसकी दोस्त ने बताया कि उसके मामा की बेटी ने दो वर्ष पहले हार्डवेयर एंड नेटवर्किग का कोर्स किया था। उसे कोर्स करते हीनौकरी मिल गई थी। आइए जानेंहार्डवेयर एंड नेटवर्किग के अंतर्गत किस तरह का कार्य होता है।
प्रशिक्षण में क्या सीखते हैं
इस कोर्स में कंप्यूटर के हार्डवेयर और एक कंप्यूटर को दूसरे कंप्यूटर से जोडने के बारे में समझा जाता है। हार्डवेयर प्रोफेशनल हार्डवेयर में उत्पन्न होने वाली समस्याओं को दूर करते हैं। साथ ही इंस्टॉलेशन और ट्रबल शूटिंग का कार्य भी करते हैं। सॉफ्टवेयर कंप्यूटर प्रोफेशनल को हार्डवेयर संबंधी जानकारी नहीं होती, लेकिन हार्डवेयर प्रोफेशनल को सॉफ्टवेयर के कार्यो की भी समझ होती है। हार्डवेयर प्रोफेशनल कंप्यूटर के सभी हार्डवेयर की मेंटेनेंस करने में सक्षम होते हैं। ऐसे लोग कंप्यूटर मदरबोर्ड, नेटवर्क कंपोनेंट्स और डिवाइसेस, सर्वर, डाटाबेस, कीबोर्ड, मॉडम, प्रिंटर, स्कैनर आदि से भली-भांति परिचित होते हैं। टेक्नोलॉजी में आए दिन होने वाले बदलावों के कारण इन प्रोफेशनल्स को हमेशा अपने को अपडेट रखना होता है। ये प्रोफेशनल्स हार्डवेयर के जानकार होने के साथ ही नेटवर्किग का काम भी करते हैं। इसके अंतर्गत लेन (लोकल एरिया नेटवर्क) और वेन (वाइड एरिया नेटवर्क) आता है। लेन के अंतर्गत एक स्थान के कंप्यूटरों को आपस में जोडा जाता है, जबकि वेन के अंतर्गत एक शहर से दूसरे शहर और अलग-अलग देशों में स्थित कंप्यूटर की नेटवर्किग की जाती है। इसके अलावा ऐसे लोग कंप्यूटर को सुरक्षा कवच से लैस भी करते हैं, जिससे कंप्यूटर में सभी डाटा सुरक्षित रहें।
क्या हैं संभावनाएं
देश में सॉफ्टवेयर सेक्टर की तरह हार्डवेयर सेक्टर बहुत लोकप्रिय नहीं था, लेकिन पिछले कुछ समय से इस सेक्टर के विस्तार में भी तेजी देखी जा रही है। अर्नस्ट भंग और हार्डवेयर इंडस्ट्री एसोसिएशन की रिपोर्ट के अनुसार देश की हार्डवेयर इंडस्ट्री वर्ष 2010 के अंत तक 62 अरब डॉलर की हो जाएगी। हार्डवेयर और नेटवर्किग उत्पाद मसलन चिप, सेमीकंडक्टर बनाने वाली कंपनियों के अलावा बीपीओ, आईटीएस, टेलीकॉम, बैंकिंग, फाइनेंस, इंश्योरेंस, मीडिया एजुकेशन और इंटरटेनमेंट क्षेत्र से जुडी कंपनियों द्वारा नेटवर्किग और हार्डवेयर प्रोफेशनल्स की सेवा ली जाती है। इसके अलावा कंप्यूटर के शोरूम और एएमसी (एनुअल मेंटेनेंस कॉन्ट्रेक्ट) वेंडर्स भी ऐसे प्रोफेशनल को रिक्रूट करते हैं। माइक्रोसॉफ्ट, डेल, आईएनएम, एचपी, आईमेट जैसी हार्डकोर आईटी कंपनियां भी ऐसे प्रोफेशनल्स को प्लेसमेंट देती हैं। जेटकिंग के दिल्ली स्थित सेंटर हेड सुधीर गौड बताते हैं, मंदी के दौर में कई सेक्टर्स की कंपनियों ने कॉस्ट कटिंग के लिए प्रोफेशनल्स की छंटनी की, लेकिन हार्डवेयर सेक्टर में बीते महीनों में भी भर्तियां हुई। मंदी में बडी संख्या में आईटी प्रोफेशनल्स के जॉब से हाथ धोने के बावजूद युवाओं का आईटी के प्रति आकर्षण कम नहीं हुआ है। उनका इस सेक्टर में दूसरे विकल्पों की ओर झुकाव बढ रहा है। इसमें नेटवर्किग और हार्डवेयर भी शामिल है। कॉम्प टीआईए (कंप्यूटिंग टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री एसोसिएशन) के अनुसार ज्यादातर क्षेत्र की कंपनियों का कामकाज आईटी कंपनियों की सघनता से होता है। कंपनियों की आईटी पर निर्भरता बढ रही है। हार्डवेयर और नेटवर्किग प्रोफेशनल्स ऐसी कंपनियों को सेवा देते हैं, जिस तरह दूसरे देशों से आईटी के काम भारत कर रहा है। इसे आउटसोर्सिग कहते हैं। उसको देखते हुए ऐसा कोर्स करने वाले नौजवानों को जॉब पाने में दिक्कत पेश नहीं आएगी।
कैसे होती है पढाई
हार्डवेयर एंड नेटवर्किग का कोर्स संचालित करने वाले ज्यादातर संस्थानों में कोर्स की अवधि 15 से 18 महीने है। कुछ संस्थानों ने विश्वविद्यालय से तालमेल करके तीन वर्षीय डिग्री कोर्स भी शुरूकिया है। हाल ही में स्पटेक के हार्डवेयर एंड नेटवर्किग विंग एन पॉवर ने कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी के साथ तालमेल कर डिग्री कोर्स लांच किया है। अधिकांश संस्थानों में यह कोर्स चार मॉड्यूल में पढाया जाता है। प्रत्येक मॉड्यूल तीन से चार महीने का होता है। पहले मॉड्यूल में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से संबंधित बेसिक मसलन सोल्डरिंग, करंट वोल्टेज और ऑफिस टूल्स एक्सेल, एमएस वर्ड, पॉवर पॉइंट आदि की पढाई होती है। दूसरे मॉड्यूल में पीसी असेंब्लिंग और कंप्यूटर के अलग-अलग पुर्जो के कार्यो के बारे में शिक्षा दी जाती है। तीसरे मॉड्यूल में ऑपरेटिंग सिस्टम मसलन माइक्रोसॉफ्ट ऑपरेटिंग सिस्टम और सिक्युरिटी एडमिनिस्ट्रिेशन के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाती है। ज्यादातर संस्थानों में चौथा और अंतिम मॉड्यूल नेटवर्किग और पर्सनालिटी डेवलपमेंट पर केंद्रित होता है।
प्रवेश कौन ले सकता है
हार्डवेयर एंड नेटवर्किग कोर्स में दाखिला लेने के लिए बारहवीं पास होना जरूरी है। बीए, बी.एस-सी. और एम.ए., एम.एस-सी. पासछात्र भी ऐसे कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं। ज्यादातर संस्थानों में संक्षिप्त साक्षात्कार के आधार पर उम्मीदवारों को दाखिला मिलता है।
इंटरनेशनल सर्टिफिकेट लें
इस क्षेत्र में कुछ प्रतिष्ठित संस्थानों द्वारा प्रोफेशनल्स को इंटरनेशनल सर्टिफिकेट भी दिए जाते हैं। करियर में आगे बढने के लिए ऐसे सर्टिफिकेट काफी मददगार साबित होते हैं। माइक्रोसॉफ्ट द्वारा एम.सी.एस.ई. (माइक्रोसॉफ्ट सर्टिफाइड सिस्टम इंजीनियर), जिसको द्वारा सीसीएनए (जिसको सर्टिफाइड नेटवर्क एसोसिएट्स), रेड हैट द्वारा आरएचसीई (रेड हैट सर्टिफाइड इंजीनियर) सर्टिफिकेट दिए जाते हैं। इन संस्थानों द्वारा समय-समय पर लिखित परीक्षा आयोजित की जाती है। परीक्षा में उत्तीर्ण होकर प्रोफेशनल्स ऐसे सर्टिफिकेट हासिल कर सकते हैं। परीक्षा में शामिल होने के लिए कोई क्लास अटेंड नहीं करनी पडती।
क्या वेतनमान हैं
ऐसे प्रोफेशनल्स को संस्थानों में अच्छे खासे वेतन पर रखा जाता है। कंपनियां ट्रेनी को 5 से 7 हजार रुपये वेतन देती हैं। अनुभव हो जाने पर ये प्रोफेशनल्स सर्विस इंजीनियर और टेक्निकल सपोर्ट इंजीनियर के तौर पर नियुक्त होते हैं। ऐसे प्रोफेशनल्स को 10 से 12 हजार रुपये प्रति महीना वेतन मिलता है। इसमें अनुभव होने के बाद प्रोफेशनल्स को नेटवर्क एडमिनिस्ट्रेटर और नेटवर्क एनालिस्ट का जॉब मिलता है। कंपनियां नेटवर्क एनालिस्ट और नेटवर्क एडमिनिस्ट्रेटर को प्रति महीना 20 से 25 हजार रुपये वेतन देती हैं।
स्वरोजगार भी संभव
हार्डवेयर एंड नेटवर्किग का कोर्स करने के बाद कोई चाहे तो स्वरोजगार भी कर सकता है। कंप्यूटर हार्डवेयर रिपेयरिंग और कंप्यूटर असेंब्लिंग का काम किया जा सकता है। इसमें लागत भी बहुत अधिक नहीं आती। हार्डवेयर रिपेयरिंग और असेंब्लिंग में काम आने वाले इंस्ट्रूमेंट खरीदने में महज दो हजार रुपये की लागत आती है। काम साफ-सुथरा और अच्छी कमाई वाला है। ऐसे लोग छोटी फर्म स्थापित कर कंपनियों से एएमसी (एनुअल मेंटेनेंस कॉन्ट्रेक्ट) लेने का कार्य भी कर सकते हैं। इसके तहत कंपनी में लगे सभी कंप्यूटरों के हार्डवेयर मेंटेनेंस और नेटवर्किग का काम करना होता है।
लडकियों के लिए भी मौका
हार्डवेयर एंड नेटवर्किग इंस्टीट्यूट जेटकिंग के जॉइंट एम.डी. नंदू जी मारवानी का कहना है, मंदी का थोडा बहुत असर तो जरूर हुआ है। लेकिन सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री की तरह यह इंडस्ट्री प्रभावित नहीं हुई। पिछले साल के मुकाबले इस साल जॉब की उपलब्धता जरूर कम रही। लडकों के समान ही लडकियों के लिए भी इसमें अवसर है। दो तीन साल पहले कम संख्या में लडकियां ऐसे कोर्स करती थीं लेकिन अब उनकी संख्या में वृद्धि हो रही है।
हार्डवेयर एंड नेटवर्किग का कोर्स करके बतौर टेक्निकल सपोर्ट इंजीनियर नोएडा स्थित कंपनी में काम कर रहे दीपक कुमार कहते हैं, मैं बीसीए कर रहा था, उसी दौरान मैंने इस क्षेत्र में करियर बनाने का मन बना लिया था। ज्यादा संभावनाएं होने के कारण मैं इस ओर आकर्षित हुआ। अपनी क्षमता के हिसाब से भी लोग इस क्षेत्र में ग्रो करते हैं। कोर्स समाप्त होने के बीस दिन बाद ही जॉब मिल गया।
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