जरूरी है स्टमक फ्लू से बचाव

      
जरूरी है स्टमक फ्लू से बचाव

अगर बच्चा पेट में दर्द की शिकायत करे तो उसे अनदेखा न करें, क्योंकि यह दर्द स्टमक फ्लू की वजह से भी हो सकता है। यह आंतों में दर्द से संबंधित ऐसी समस्या है, जिसे मेडिकल साइंस की भाषा में गैस्ट्रोएनट्राइटिस कहा जाता है, जिसका बच्चे की सेहत पर बुरा प्रभाव पडता है।

कारण

1. वातावरण में मौजूद वायरस और बैक्टीरिया से स्टमक फ्लू हो सकता है।

2. खाने-पीने में सफाई का ध्यान न रखने से भी यह समस्या हो सकती है।

3. सी फूड या खाने की किसी अन्य चीज से होने वाली एलर्जी के कारण भी यह समस्या हो सकती है।

4. अत्यधिक गरिष्ठ भोजन भी इस समस्या का कारण हो सकता है।

लक्षण

1. पेट में ऐंठन के साथ दर्द

2. लूज मोशन

3. उल्टियां आना

4. बुखार

5. कमजोरी महसूस होना

6. भोजन में अरुचि

7. शरीर में पानी की कमी की वजह से चेहरा मुरझा जाना

बचाव

1. अपने पूरे घर और खास तौर से किचन की सफाई का ध्यान रखें।

2. बच्चे को हमेशा ताजा और अच्छी तरह पकी हुई चीजें ही खिलाएं।

3. पहले से काट कर रखे हुए फल कभी न खिलाएं, क्योंकि इनमें बैक्टीरिया पनपने का खतरा बहुत अधिक रहता है।

4. अगर सफाई का ध्यान रखने के बावजूद बच्चे को स्टमक इन्फेक्शन की समस्या हो जाए तो उसे इससे बचाने के लिए हर दो-तीन मिनट के अंतराल पर दो-चार चम्मच ओआरएस (ओरल रिहाइडेट्रल सॉल्यूशन)का घोल पिलाती रहें। लेकिन 24 घंटे बीत जाने के बाद पुराना घोल हटाकर नया घोल बना लें।

5. अगर बच्चा एक साल से कम उम्र का है और वह मां का दूध पीता है तो आप उसे फीड कराना भी जारी रखें।

6. हर चार घंटे के अंतराल पर बच्चे के शरीर के तापमान की जांच करती रहें।

7. ऐसी समस्या होने पर बच्चे को हमेशा हल्का और सादा भोजन दें, घी-तेल से बनी और मसालेदार चीजों से उसे दूर रखें। मूंग दाल की खिचडी, छाछ, दही, केला आदि भी उसके लिए फायदेमंद साबित होता है।

8. बच्चे को ओआरएस के विकल्प के रूप में बाजार में बिकने वाला डिब्बाबंद जूस, कोल्डड्रिंक्स आदि न दें। इन चीजों में चीनी, पानी और नमक का अनुपात सही नहीं होता और इनसे दोबारा पेट में इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है।

9. बच्चे को खिलाने से पहले अपने हाथ अच्छी तरह धोएं।

10. बच्चे की आंखों के आसपास की त्वचा का सूख जाना, रोते समय उसकी आंखों से आंसू न आना, कई घंटे तक यूरिन न आना, मुंह सूखना, नींद न आना, तेज बुखार आदि इसके गंभीर लक्षण हैं। इनमें से अगर एक भी लक्षण दिखाई दे तो बिना देर किए उसे डॉक्टर के पास जरूर ले जाएं।

11. डॉक्टर से जांच कराए बिना अपने मन से बच्चे को कोई दवा न दें।

12. उल्टियां और लूज मोशन बंद होने केबाद भी बच्चे को 24 घंटे तक बिस्तर पर लेट कर आराम करने दें, क्योंकि इससे शरीर कमजोर हो जाता है और उसे सामान्य अवस्था में लाने के लिए आराम की जरूरत होती है।

(दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पी.के. सिंघल से की गई बातचीत पर आधारित)

सखी प्रतिनिधि
 
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