आज की पीढ़ी कर्ज में गले-गले तक डूबी है। बैंकों की आसान किस्तें और बढ़ती आमदनी उन्हें लोन लेने के लिए प्रेरित कर रही हैं। पुरानी पीढ़ी को ऋण लेना बुरा लगता था, भले ही वह बैंक से लेना हो। बहुत मुश्किल हालात में ही इसके बारे में सोचा जाता था। इस कहानी के पात्र हरि बाबू ने भी ऐसी ही मुश्किल स्थितियों में कर्ज ले तो लिया, लेकिन फिर न चुकाने की स्थिति में उनके साथ क्या हुआ और कैसे निकले वे इस हालात से, पढि़ए इसी कहानी में।