क्या ग्लैमर की राह में बाधक है शादी
क्या ग्लैमर की राह में बाधक है शादी

आज से पांच दशक पहले की बात है गुजरात के एक गांव से एक युवक कमल राय हीरो बनने का सपना लेकर मुंबई आया। उसके साथ थी उसकी ठेठ देहाती पत्नी कोकिला। एक फिल्म निर्माता से मिलने यह युवक स्टूडियो आया। निर्माता से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि आपके लिए मैं कुछ नहीं कर पाऊंगा, लेकिन यदि आप चाहें तो आपकी पत्नी को जरूर रोल दे सकता हूं। सुझाव अकल्पनीय था लेकिन सपने बहुत से हों और हकीकत कुछ और, तो जो मिल रहा हो उसे स्वीकार कर लेने में ही भलाई है, यही सोचते हुए कमल ने हां कर दी और वह विवाहिता स्त्री कोकिला निरूपा राय के नाम से रॉनक देवी नामक गुजराती फिल्म में हीरोइन बन कर आई। उसके बाद उन्होंने अनगिनत फिल्मों में हीरोइन का काम किया। उस समय, जब घर की बहू-बेटियों के लिए फिल्मों की बात करना भी गुनाह समझा जाता था, किसी विवाहिता के लिए परदे की रानी बनना आसान नहीं था, लेकिन यह भी सच है कि उस समय बडे पर्दे पर स्त्रियों की संख्या सीमित होने के कारण और निर्माताओं के पास उनके बहुत विकल्प न होने की वजह से उनका विवाहित होना या न होना कोई मायने नहीं रखता था। इसके बाद बहुत सी ऐसी हीरोइनें आई, जो विवाहिता होने के बाद भी सराही जाती रहीं व उनकी मार्केट वैल्यू पर भी विवाह का कोई विपरीत असर नहीं पडा।

जगमगाती दुनिया है यह

ग्लैमर की जगमगाती दुनिया ऐसी है, जिसकी चकाचौंध से हर शख्स प्रभावित होता है। एक बार इस क्षेत्र में आने के बाद वहां से कोई जाना नहीं चाहता। यह जानने के बाद भी ग्लैमर की दुनिया में करियर की आयु बहुत कम होती है, युवतियां हर तरह का समझौता करने के लिए तैयार रहती हैं। सवाल केवल इस फील्ड का ही नहीं है, आधुनिक समाज की हर युवती व स्त्री इस शब्द के मोह से ग्रसित है। वह भी दिखना चाहती है ग्लैमरस व आकर्षक।

आत्मविश्वासी है आज की स्त्री

आज हर स्त्री अपनी पहचान अपने बलबूते बनाना चाहती है। वह जो कुछ भी है और जैसी भी है, अपने अस्तित्व को अपने काम के जरिए जिंदा रखना चाहती है। पहले जहां युवतियों को ग्लैमर से जुडे क्षेत्र में काम करने में संकोच होता था, आज वहीं वे अपने को ग्लैमरस दिखाने में कहीं कोई झिझक नहीं महसूस करतीं। उन्हें चाहिए खुला आसमान और उडने के लिए मजबूत पंख, जो मिल सकते हैं मनचाहा काम करके ही।

आज की युवती बेहद आत्मविश्वासी व सजग है। वह अच्छी तरह जानती है कि उसमें क्या खूबियां हैं और वह कैसे उनका फायदा ले सकती है। वह ऐसा कोई काम करने में नहीं झिझकती, जिसे करके उसे पहचान मिलती है। ग्लैमर के क्षेत्र में वह किसी प्रलोभन में नहीं फंसती, न ही आलोचनाओं से घबराती है। झिझक का दामन उसने कब का छोड दिया। वह अपने हर अच्छे-बुरे काम की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेती है।

आया है बदलाव

आज से कुछ समय पहले तक जब बहुत प्रतियोगिता नहीं थी ग्लैमर की फील्ड में, तब करियर के लिए विवाह से जुडी कोई शर्त नहीं थी। यदि आप आकर्षक और फिट हैं तो विवाहित होने पर भी आपको काम करने की पूरी आजादी थी। उस समय विवाहिताओं के सफल होने की एक मुख्य वजह यह थी कि उस समय अपनी छवि बनाने के लिए किसी प्रकार के ग्लैमर की जरूरत नहीं थी। अपनी जगह बनाने में अभिनय क्षमता व काम के प्रति निष्ठा पर बल दिया जाता था। आज हीरोइन हो या मॉडल, अपनी ग्लैमरस छवि के बल पर ही अपनी पहचान बनाती हैं। रैंप हो या परदा ग्लैमरस होना पहली अनिवार्यता है। विवाह के बाद ग्लैमर में कमी आने पर व जिम्मेदारियां बढने पर उनके करियर के लिए भी चुनौती आ खडी होती है। आज कॉम्पटीशन के बढने से चॉइस भी बढ गए हैं। आज यदि आपके सामने एक की जगह बीस विकल्प हैं तो आप एक ही पर निर्भर नहीं हैं। अब वह जमाना गया जब एयरहोस्टेस को शादी करने या मां बनने के बाद यह एहसास करा कर कि आप सक्षम नहीं, जॉब से हटा दिया जाता था।

ग्लैमर क्या है

ग्लैमर ऐसी विशेषता है जिसे लेकर कोई लडकी जन्म नहीं लेती। यह किसी प्रकार का कुदरती तोहफा भी नहीं। इसे केवल प्रयासों के बल पर प्राप्त किया जा सकता है।

इस उक्ति ने सिद्ध कर दिया कि ग्लैमर कुदरत की देन नहीं, बल्कि अपने प्रयासों से कोई भी ग्लैमरस छवि पा सकता है। आकर्षक दिखना, प्रभावशाली व्यक्तित्व का होना, मुस्कराती छवि के साथ फोटोजनिक होना इस फील्ड में जगह बनाए रखने के लिए जरूरी होता है। यह सकारात्मक बदलाव है कि हमारे यहां काम करने वाली मेड भी अच्छे कपडे पहनना चाहती हैं और अपने को आकर्षक बनाने के लिए पार्लर भी जाती हैं।

क्यों जरूरी है विवाह

अपवाद को छोड दें तो ऐसी कोई स्त्री नहीं जो विवाह संबंधों या रिश्तों में विश्वास न रखती हो। विवाह करने में थोडी देर भले हो जाए, शादी के निर्णय को कुछ दिनों के लिए टाला भले ही जाए, पर प्राय: ठुकराया नहीं जाता। विवाह वह सत्य है जो जीवन को पूर्णता देता है, आधार देता है। जीवन के विविध रंगों से परिचित कराता है।

यह भी कठोर सत्य है कि विवाह के बाद अपना काम किसी भी फील्ड की स्त्री के लिए आसान नहीं होता। ग्लैमर की फील्ड में काम करने वाली स्त्रियों के लिए शादी और भी मुश्किल इसलिए होती है क्योंकि वहां काम करने के घंटे नियत नहीं होते, उनका नेचर ऑफ जॉब एकदम अलग होता है।

भारतीय समाज की जो परिपाटी चली आ रही है, उसमें आज भी स्त्री के लिए पुरुष के मुकाबले कहीं अधिक जिम्मेदारियां हैं। वह अपने काम के साथ घर, बच्चों व समाज की तमाम जिम्मेदारियों को अकेले उठा रही होती है। ऐसे में वह एक ही समय में कई भिन्न रोल निभा रही होती है। अपने को घडी की सुइयों के साथ चलाते परिवार की जरूरतों को निभाते-निभाते वह मशीन बनती जा रही है। अपने को भूल कर उसने इस चुनौतीपूर्ण भूमिका में स्वयं को ला खडा दिया। घर व बच्चों को कौन कब संभालेगा, यह महत्वपूर्ण प्रश्न रहता है।

बदली है पुरुष की भूमिका

ऐसा नहीं है कि पुरुषों ने अपने को बदला नहीं है। आज समाज में बहुत से बदलाव आए हैं। पुरुषों ने भी स्त्री की ग्लैमरस क्षेत्र में चुनौतीपूर्ण भूमिका को समझा व सराहा है और अपने को भी बहुत बदला है।

आज का पति केवल टीवी या न्यूज पेपर पढने तक केंद्रित नहीं है वह बच्चे की नैपी बदलने से लेकर उसे पढाने व किचेन में खाना बनाने तक का काम खुशी-खुशी कर रहा है। उसे गर्व होता है जब उसकी पत्नी की बाहर तारीफ होती है। अब उसके लिए घर के कामों में मदद करना शर्मिदगी का कारण नहीं बनता।

क्या कहना है विशेषज्ञों का

दिल्ली की वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. जयंती दत्ता का कहना है कि मेरे पास एक सज्जन आए, वह अपनी पत्नी को शादी के पंद्रह साल बाद तलाक देना चाहते थे। कारण था उनकी पत्नी उन्हें गर्म चपाती नहीं देती थी। मैं हैरान रह गई कि पढा-लिखा यह व्यक्ति इस तरह की मानसिकता रखता है। दोनों पढे-लिखे थे, दोनों कामकाजी थे फिर यह शिकायत। शायद उन्होंने खुद से कभी एक कप चाय भी नहीं बनाई होगी। दूसरी तरफ एक मॉडल का पति था जो सुबह उठकर बच्चों को तैयार कर स्कूल छोड कर आता था उसका कहना था कि देर रात तक काम करने के कारण पत्नी ये जिम्मेदारी खुशी से उठा नहीं पाएगी।

डॉ. दत्ता का कहना है कि समाज में जो चेंज आए हैं उसकी प्रतिछाया ग्लैमर के क्षेत्र में भी दिखाई दे रही है। आज विवाहित स्त्रियां बेहद निष्ठा से अपने काम को अंजाम दे रही हैं। कहीं किसी प्रकार की कोई घबराहट या झिझक उन्हें विचलित नहीं करती।

चीजें आसान नहीं

इसमें संदेह नहीं कि सारी चीजें आसान नहीं हैं। निरंतर कई प्रकार के दबावों ने कामकाजी स्त्री को परेशान किया है। एक खलबली-सी सारे माहौल में है। ग्लैमरस क्षेत्र के लिए अपनी इमेज के साथ पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वाह उतना आसान नहीं, जितना ऊपर से दिखता है।

एक पत्नी और मां के कर्तव्य को कोई और पूरा नहीं कर सकता। ऐसे में जो विवाहित होने पर भी काम कर पा रही हैं उनके पीछे है सहयोग पति व ससुराल वालों का। हर कामकाजी स्त्री की आवश्यकाएं भिन्न होती हैं और उसे उन्हें निभाना पडता है। चुनौतियों से डर कर जो काम छोड देते हैं, यह उनका खुद का फैसला होता है, इसके लिए किसी और को जिम्मेदार ठहराना गलत होगा।

मैंने झुठलाया है इस वाक्य को

मंदिरा बेदी (एंकर एवं अभिनेत्री)

मैंने इस जुमले को झुठला दिया है कि शादी के बाद स्त्री का करियर चौपट हो जाता है। मैं इसका जीता-जागता उदाहरण हूं। मैंने छोटे परदे से अपने करियर की शुरुआत की और मेरा पहला धारावाहिक शांति था। उसके बाद जब मेरी शादी हुई, तब से लेकर आज तक लगातार मैं सक्रिय हूं और मुझे विवाहित होने के बाद काम भी मिल रहा है। टीम इंडिया के साथ विश्व भ्रमण और एंकरिंग के लिए मैं पहली भारतीय महिला एंकर हूं। इससे साबित हो जाता है कि शादी करियर के रास्ते में आडे नहीं आती। मेरे इरादे बुलंद थे, मेरे पति और परिवार का मुझे पूरा सहयोग मिला, साथ ही किस्मत ने भी साथ दिया, इस लिए आज मैंने अपना एक मकाम हासिल कर लिया है। मैं अकेली नहीं, मेरे अलावा भी ऐसे कई उदाहरण हैं। मलाइका अरोडा को देखिए वे घर-बाहर का काम, मॉडलिंग व एंकरिंग सब बडे मजे में कर रही हैं। उन्हें लगातार काम मिल रहा है। मुझे कोई न कोई ऑफर हमेशा मिलता रहा है। जो मुझे ठीक लगता है मैं साइन कर लेती हूं। मुझे ध्यान रखना पडता है कि काम का शेडयूल ऐसा हो, जिसमें मेरी फैमिली लाइफ बहुत डिस्टर्ब न हो। थोडी-बहुत अडचनें तो आती ही हैं। इसीलिए मैं रविवार को काम करने से बचती हूं कोशिश करती हूं कि इस दिन छुट्टी रखूं। शादी करियर की राह में तभी बाधक बन जाती है, जब आपको फैमिली का सपोर्ट न मिले, आप की ही इच्छाशक्ति क्षीण हो जाए या फिर पति को आपके काम करने पर एतराज हो। कई बार स्त्री खुद ही अपनी जिम्मेदारियों व मजबूरियों को समझ कर काम करना छोड देती है। मेरा भी मानना है कि अगर स्त्री के काम करने से बच्चे की परवरिश सही ढंग से नहीं हो पा रही है, फैमिली लाइफ डिस्टर्ब हो रही है तो काम न करने में ही भलाई है। बच्चे की देखभाल और परवरिश, जो एक मां कर सकती है, वह कोई नहीं कर सकता। यह भी सच है कि घर की जिम्मेदारी जो एक स्त्री निभा सकती है, एक पुरुष उस तरह से कभी नहीं निभा सकता। हर काम का नियत समय होता है। शादी भी समय से हो जाए तो अच्छा रहता है, करियर तो बनता-बिगडता रहता है।

शादी बाधक नहीं

परीजाद कोलाह मार्शल (एंकर)

शादी करियर में बाधक नहीं हो सकती। अगर पति समझदार है तो शादी कभी भी करियर में आडे नहीं आती। रही बात ग्लैमर व‌र्ल्ड में बने रहने की, तो अगर आपमें टैलेंट के साथ-साथ एक अदा है तो मैं मानती हूं कि आपको काम मिलता रहता है। हर वक्त सिर्फ ग्लैमर ही काम नहीं आता। मेरी शादी हुए लगभग एक साल हो गया है। मुझे बॉलीवुड का तजुर्बा नहीं, लेकिन एंकरिंग कर रही हूं मैं। इतना जरूर कह सकती हूं मैं कि एंकरिंग की फील्ड में विवाह का आडे आना जैसा कुछ भी नहीं है। इसका सबसे बडा उदाहरण मंदिरा बेदी, मलाइका अरोडा खान और मिनी माथुर हैं। मलाइका को तो एक बेटा भी है, फिर भी आज वह कितना काम कर रही हैं। इसलिए कि उनके भीतर हुनर और सौंदर्य होने के साथ ही पति का पूरा सपोर्ट भी है। इसी तरह फिलहाल मुझे भी मेरे पति पूरा सहयोग देते हैं। वह जानते हैं कि मुझे काफी मेहनत करनी पडती है अपने काम के लिए। सिर्फ सौंदर्य ही सब कुछ नहीं होता किसी भी काम के लिए, आपको इंटैलिजेंट और पे्रजेंटेबल होना आवश्यक होता है। दूर से हमारा क्षेत्र ग्लैमर भरा दिखता है, लेकिन यहां कोई कम मेहनत नहीं करनी पडती। टिके रहने और दर्शको के दिलों पर राज करने के लिए बडे पापड बेलने पडते हैं, काम करने के नियत घंटे नहीं होते, जब जैसी जरूरत हो काम करना पडता है। तब कहीं जाकर एक मकाम हासिल कर पाते हैं आप। पति को अपनी पत्नी पर गर्व होना चाहिए, अगर वह आगे बढती है। मेरे पति का इंजनियरिंग ग्रुप है। उनका बिजनेस है, वे जानते हैं कि कितनी मेहनत करनी पडती है मुझे। अपने पति में मैंने बेस्ट फ्रेंड खोजा है और वास्तव में वह मेरे सच्चे दोस्त हैं। मैं मानती हूं शादी के बाद लडकी की पूरी दुनिया ही बदल जाती है। एक नये परिवार के साथ उसका संपर्क होता है। नई जिम्मेदारियां होती हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि उसका करियर बस वहीं समाप्त हो जाता है। आज सभी समझदार हो गए हैं। अगर फैमिली का पूरा सपोर्ट हो तो काम करना असंभव नहीं। हां, फिल्मी दुनिया में ऐसा होता है कि शादी के बाद उन्हें उतना काम नहीं मिलता, पर वहां भी अपवाद हैं- काजोल। जिनकी वापसी भी बेहद उम्दा तरीके से हुई। मुझे याद है जब मैं शादी के बाद लाफ्टर चैलेंज की एंकिरिंग के लिए आई तो लोगों ने मुझसे कहा था कि शादी के बाद तुम्हारे चेहरे पर एक अलग ही ग्लो आ गया है। मेरी शादी के बारे में जानते हुए भी मुझे काम मिला और लोगों ने मेरे काम को पसंद भी किया। अनुभव भी मायने रखता है। शादी के बाद व्यक्तित्व में एक जिम्मेदारी और गंभीरता की झलक दिखती है। आप और परिपक्व तरीके से काम करते हैं। ग्लैमर की राह में शादी बाधक तक होती है जब लडकी के ससुराल पक्ष वाले बहू का काम करना पसंद नहीं करते। कई बार स्त्रियां शादी के बाद अपने स्वास्थ्य और फिटनेस के प्रति लापरवाह हो जाती हैं। बॉलीवुड की दुनिया में दर्शक किसी भी अभिनेत्री को पर्सनल प्रॉपर्टी की तरह समझने लगते हैं और शादी होते ही उन्हें लगता है कि उनकी पर्सनल प्रॉपर्टी को किसी ने छीन लिया। इससे टीआरपी कम होने पर फिल्म फ्लॉप होने के डर से निर्माता-निर्देशक ऐसी अभिनेत्री पर पैसा लगाने से डरने लगते हैं।

शादी नहीं परिस्थितियां बाधक होती हैं

मिनी माथुर (टीवी एंकर)

मैं इस बात से एकदम सहमत नहीं हूं कि ग्लैमर की राह में शादी बाधक होती है। मेरे खयाल से यह व्यक्तिगत रुचि पर भी काफी हद तक निर्भर करता है। मुझे शादी के बाद भी उतना ही काम मिल रहा है, बल्कि शादी में बाद अधिक काम मिल रहा है। अब तो मेरा तीन साल का बेटा भी है। लेकिन मेरे करियर के ग्राफ में कभी कोई उतार-चढाव नहीं आया। क्या इस बात से कोई इंकार कर सकता है कि उन अभिनेत्रियों के ग्राफ में भी उतार-चढाव नहीं आता, जो अविवाहित होती हैं। फिर इसके लिए विवाह को दोष देना कहां तक उचित है। वजह कोई भी हो कहानी में दम न हो, निर्देशन अच्छा न हो, पटकथा में रवानगी न हो, सहनायक का काम ठीक न हो तो कुल मिलाकर गाज अभिनेत्री के करियर पर ही गिरती है। वास्तव में बाधक शादी नहीं होती परिस्थितियां बाधक होती हैं।

अगर क्वालिटी का काम मिले और परिवार और पति को पूरा सपोर्ट हो तो करियर हमेशा बरकरार रह सकता है। यह पति पर भी निर्भर करता है, अगर वह समझदार है तो कभी भी काम करने से पत्नी को मना नहीं करता। दोनों साथ मिलकर या एक-दूसरे को सहयोग देकर अपनी जिम्मेदारियां बहुत आसानी से निभा लेते हैं। ऐसा एक नहीं, तमाम उदाहरण हैं हमारी फील्ड में।

शादी करियर का अंत नहीं

जूही चावला (फिल्म अभिनेत्री)

मैं इस बात का स्वीकार करती हूं कि ग्लैमर की राह में शादी बाधक नहीं, पर बाधक होने की संभावना हो सकती है। पिछले चंद सालों से फिल्में काफी हद तक ग्लैमर पर निर्भर हैं, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता। ग्लैमर रहित हिंदी फिल्मों की कल्पना करना अब के हालातों में मुश्किल होगा। मुन्नाभाई जैसी फिल्म जिस में ग्लैमर न के बराबर है, फिर भी इस फिल्म ने कमाल का बिजनेस किया। इस बात पर हमें गौर करना चाहिए कि मुन्नाभाई फिल्म में हीरोइन का कोई खास रोल नहीं था तो ग्लैमर कहां से होगा? हॉलीवुड फिल्मों की जहां तक बात करें, तो वहां हीरो और हीरोइन दोनों को उम्र के 50-60 साल तक काफी महत्वपूर्ण किरदार मिलते हैं। एलिजाबेथ टेलर 70 साल तक अहम किरदार करती रहीं। हमारे बॉलीवुड ने तकनीकी दृष्टि से काफी तरक्की कर ली पर अभी स्क्रिप्ट लेवल पर हमें काफी आगे जाना होगा। आज भी हिंदी फिल्मों की नायिका को सीधे-सीधे ग्लैमर से ही जोडा जाता है। बेशक श्रीदेवी आज पत्नी-मां बनने के बाद भी काफी सुंदर दिखती हैं पर जो ग्लैमरस रोल वे पहले करती रहीं, क्या आज उसी तरह कर पाएंगी? इसका मुख्य कारण जो मैं मानती हूं, हमारी भारतीय मानसिकता। आज भी नायिकाएं शादी के बाद पर्दे पर बोल्ड दृश्य देने में हिचकिचाती हैं।

मैं शादी और मातृत्व के बाद भी फिल्मों से जुडी हूं। मेरी कई फिल्में आने वाली हैं, कुछेक आ चुकी हैं, पर जो रोल मैंने शादी के बाद किए हैं, वो 18 वर्षीय या 22 वर्षीय चंचल युवा-युवती के नहीं थे। खुशनसीबी है मेरी कि मुझे अब मेरी उम्र को जंचनेवाले किरदार भी मिल रहे हैं। जो रोल मैंने फिल्म डर या लुटेरे में किया था, क्या मैं आज करूंगी, शायद नहीं। शादी के बाद करियर पर फुल स्टॉप नहीं लगता, बशर्ते आप शुरू से अपने मानसिकता वैसी बना लें। रोल चुनने में सावधानी बरतें।

मेरा करियर ही विवाहोपरांत बना

फिरोज गुजराल (मॉडल)

मैं इस कथन से बिल्कुल सहमत नहीं हूं। मैं जब 17 साल की थी, तभी मेरी शादी हो गई। मेरा असली जीवन ही विवाह के बाद शुरू हुआ। कॉलेज की पढाई से लेकर लॉ करने व मॉडलिंग में करियर बनाने तक के सभी काम शादी के बाद मैंने अपने पति के सहयोग से पूरे किए। ऐसा भी नहीं कि मैंने अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियां देर से निभाई। मैंने बेटे को जन्म दिया 23 साल की उम्र में और बेटी को 25 साल की उम्र में। अपनी जिम्मेदारियों को कभी अनदेखा नहीं किया। अपने बच्चों के जन्मदिन तो कोई भी नहीं भूलता, लेकिन सास-ससुर के बर्थडे भी मैंने हमेशा याद रखे। पति के सभी विशेष दिनों में मैंने हमेशा साथ रहने की कोशिश की।

मुझे यह जरूर लगता है कि कुछ करने के लिए फेमिनिस्ट बनने की जरूरत नहीं। आप में कुछ करने की इच्छा है और प्रयास करें तो रास्ते अपने-आप बनने लगते हैं। एक औरत केवल इसलिए तो पैदा नहीं होती कि उसे शादी करनी है और परिवार आगे बढाना है। उसकी अपनी भी तो कोई मर्जी हो सकती है, वह भी अपनी पहचान चाहती है। यह भी ठीक है कि एक लडकी के लिए आसान कुछ भी नहीं। वह पत्नी, मां, बहू और कामकाजी स्त्री की भूमिका निभाते हुए वह अपने लिए कम चुनौतियां नहीं उत्पन्न करती। लेकिन ये सभी चुनौतियां आसान हो जाती हैं, जब वह अपना मनचाहा कुछ भी कर लेती है।

आज स्त्री पढी-लिखी हो या अनपढ वह अपने पैरों पर खडी होना चाहती है। स्त्री को अपने लिए भी स्पेस चाहिए। यदि ठीक से ऑर्गेनाइज करें तो मुश्किलें कम आती हैं। घर से दूर रहने की स्थिति में मैंने सभी जरूरी नंबर बडे अक्षरों में हिंदी में लिख कर अपने फ्रिज पर लगा रखे हैं, ताकि आवश्यकता होने पर संपर्क किया जा सके। सप्ताह भर का मेन्यू बना कर मैं जाती हूं। लगातार बच्चों से संपर्क बनाए रखती हूं। चुस्त-दुरुस्त रहने के लिए मैं बहुत कुछ नहीं करती। मैं वैसे ही स्लिम हूं। हां, खाने के प्रति सजग रहती हूं। अभी हाल ही में मैंने प्रकाश झा की एक आर्ट फिल्म में एक छोटे से सीन में अभिनय किया, जिसे देख कर मेरे बच्चे देर तक हंसते रहे।

हमारे भारतीय समाज की एक खासियत यह भी है कि यहां विविधता बहुत है जो अपने आप में सुंदर लगती है। पश्चिमी देशों में हर लडकी एक ही पोशाक व एक से गेटअप में मिलेगी। यहां साडी सलवार-कुरता, चूडीदार, स्कर्ट, रैप अराउंड, जींस व कपरी के साथ तमाम ड्रेस हैं जो मन को लुभाते हैं। ऐसे ही कभी बिंदी, कभी काजल तमाम श्रृंगार हैं जो उसे खूबसूरत बनाते हैं।

जहां तक प्रश्न शादी के बाद स्त्रियों के ग्लैमर का है तो परिवर्तन तो पुरुषों में भी आता हैं वे भी तो कई बार बेडौल हो जाते हैं। लेकिन आज कोई भी हो अपने व्यक्तित्व को लेकर बहुत सजग है। यह अच्छी बात है, बेहतर शुरुआत है। मीठा मुझे पसंद है रोटी व दाल नहीं पसंद। ड्रिंक व स्मोक मैं करती नहीं कॉफी व मीट नहीं लेती। डाइट यदि सही हो तो आप भी फिट रहती हैं।

सपोर्ट सिस्टम मजबूत हो

नोयनिका चटर्जी (मॉडल)

यह ठीक है कि रैंप पर चलना हो या एक्टिंग के क्षेत्र में अपनी जगह बनाना स्त्रियों के लिए सभी कुछ चुनौतीपूर्ण है। घर और बाहर में सामंजस्य बना कर चलना और अपनी खुद की पहचान बनाना भी आवश्यक है। जब आप काम करते हैं तो आपके कुछ कमिटमेंट भी होते हैं जिन्हें पूरा करने की जिम्मेदारी आप ही की होती है किसी और की नहीं। जब आपके बच्चे हो जाते हैं तो जिम्मेदारियां भी बढ जाती हैं। फिर भी ऐसा नहीं कि शादी करके आपका करियर खत्म हो जाता है। यदि करना चाहें और रास्ता ढूंढे तो मंजिल भी मिलेगी ही। मुश्किल तभी आती है जब आपका सपोर्ट सिस्टम बेहतर न हो। यदि घर में कोई बच्चों को देखने वाला नहीं है तो कठिनाई तो आएगी ही। मैं इस मामले में किस्मतवाली हूं मुझे अपने पति के साथ परिवार वालों का भी पूरा सहयोग मिलता है। घर की चिंता से मुक्त होकर ही आप घर के बाहर निश्चिंतता से काम कर सकते हैं, अन्यथा नहीं। मेरे पति का काम भी ऐसा है कि हम अपने काम के घंटों को घर की जरूरत के हिसाब से बांट लेते हैं। कभी-कभी अफसोस भी होता है। जब मेरी बच्ची का एडमिशन हुआ, मैं कोलकता में थी। उसका पहला दिन था और मैं चाह कर भी उसके पास नहीं थी। ऐसे में कभी मन होता है कि सब छोड दूं पर लगता है कि समझौते जीवन की जरूरत हैं। यदि आज काम पर हूं तो बच्चा याद आता है, जब बच्चों के साथ होंगी तो काम याद आएगा। फिट व चुस्त-दुरुस्त रहना हमारे प्रोफेशन की सबसे बेसिक अनिवार्यता है। इस मामले में मैं खुशनसीब हूं कि मुझे जीन्स में ही फिट बॉडी मिली। इसके लिए बहत कुछ नही करना पडा। काम करना आत्मसंतुष्टि के लिए जरूरी है, लेकिन जब वह बोझ लगने लगे तो उससे किनारा करना बेहतर होता है।

शादी कोई मुद्दा नहीं

नीना मैन्युअल (मॉडल)

मुझे मॉडलिंग के क्षेत्र में तकरीबन 8 वर्ष हो चुके हैं, फिर भी लगता है, जैसे मुझे अभी काफी कुछ करना है इस क्षेत्र में। इसखयाल ने मुझे शादी के विचार से दूर रखा है।

बहरहाल, जहां तक शादी का स्त्रियों के जीवन में ऑब्सटिकल के रूप में जो प्रचार किया जाता है, मैं उससे सहमत नहीं हूं। हां, निसंदेह यह दौर भी कभी था, जब स्त्रियों का शादी के पश्चात ग्लैमर से जुडा क्षेत्र लगभग छोडना पडता था। कोई भी नहीं सोच सकता था कि एक विवाहित स्त्री शादी के बाद अपने करियर और घर की जिम्मेदारी को भली प्रकार संभाल सकेगी। शादी संभवत: इस कारण बाधक थी क्योंकि अन्य कामों की अपेक्षा इस काम में वक्त अधिक देना पडता है। जैसा मैं कह चुकी हूं,अब वक्त बदला है, अब शादी बाधक नहीं रही। मुझे अभिनेत्री काजोल का नाम अचानक से याद आया, जिसने अपनी मर्जी से शादी की, मां बनी, करियर से गैप भी लिया और फिर उसकी वापसी भी शानदार हुई। ऐसी और भी फिल्म अभिनेत्रियां हैं, जो शादीशुदा है और फिर भी उनके मनमुताबिक काम कर रही हैं। मॉडलिंग क्षेत्र में वलूशा रॉबिन्सन (मार्क रॉबिन्सन की पत्नी और प्रसिद्ध मॉडल) की शादी और फिर मां बनने पर उनके मॉडलिंग के करियर पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पडा। वलूशा आज भी जानीमानी मॉडल है। मेरा मानना है कि शादी और फिर मातृत्व के बाद महिलाओं को अपने -आप पर अपनी सेहत और फिटनेस पर आवश्यक ध्यान देना चाहिए। मुझे लगता है अब शादी करना और घर बसाना कोई समस्या नहीं रही. न ही यह बाधक है।

बदल गई है मानसिकता

मेघना नायडू (अभिनेत्री)

मेरी राय में इस बात में कोई सच्चाई नहीं कि ग्लैमर की राह में शादी बाधक बन जाती है। हांलाकि मैंने बहुत बडी फिल्में अब तक की नहीं, पर मेरा काम ग्लैमर से जुडा ही है। मेरी हाल ही में प्रदर्शित हुई साउथ की फिल्म जांबवन सफल हुई है, और साउथ के सुपर स्टार शरद कुमार के साथ बतौर नायिका फिल्म वैदिश्वरम अब प्रदर्शित होने जा रही है। फिल्में साउथ की हों या बॉलीवुड की ग्लैमर हर लिहाज से इस फील्ड का अनिवार्य पहलू है। पर अब हम भारतीयों की मानसिकता काफी बदल गई है। आज का भारतीय दर्शक इस सच्चाई को स्वीकार करने लगे हैं कि जिन नायिकाओं को वे रुपहले पर्दे पर देखते हैं, उनकी अपनी निजी जिंदगी है और वे शादीशुदा भी हो सकती हैं।

मेरे खयाल से अभिनेत्री काजोल इसका सबसे बडा उदाहरण है कि उनके शादीशुदा होने से भी उनके ग्लैमर के प्रोफेशन पर कोई फर्क नहीं पडा। काजोल न केवल शादीशुदा हैं बल्कि एक बच्ची की मां भी हैं। शादी के बाद उनकी फिल्मों को जिस तरह से दर्शकों का रिस्पॉन्स मिला इससे दर्शकों की बदलती मानसिकता जाहिर होती है।

मुझे लगता है, लोगों की बदली मानसिकता का यह परिवर्तन हम आज अपने देश में देख रहे हैं, जो विदेश में काफी पहले से ही है। वहां फिल्म अभिनेत्रियों की शादी और अलगाव कोई अचरज की बात नहीं थी। मैं तो इस बात पर यकीन नहीं करती कि फिल्मी नायिकाओं का शादीशुदा होने या न होने से फिल्म के निर्माता-निर्देशकों को कोई फर्क पडता है। अब माधुरी दीक्षित भी फिर से बॉलीवुड में दस्तक देने जा रही हैं। जहां तक मेरी बात है मैं शादी के बाद भी काम करना चाहूंगी। हां, यह फिल्म नायिकाओं पर है कि वे अपने-आपके फिटनेस पर कितना ध्यान देती है।

विवाह जिंदगी का अंतिम पडाव नहीं

मॉरीन वाडिया (मैनेजिंग डायरेक्टर बॉम्बे डाइंग व आयोजक ग्लैडरैग्स मिसेज इंडिया कॉन्टेस्ट)

क्या शादी किसी भी स्त्री के करियर के लिए अंतिम पडाव है? नहीं, यह सच नहीं। मुझे लगता है कि किसी को भी कोई हक नहीं कि वह ऐसा सोचे। यह मानसिकता भारतीय समाज की ही है कि विवाह को अंतिम मंजिल समझ लेते हैं। जिसमें योग्यता है उसे प्रयास जरूर करने चाहिए। अपने दिमाग को चलाने में कोई हर्ज नहीं है। यही सोच कर मैंने मिसेज इंडिया कॉन्टेस्ट की शुरुआत की। यह ऐसा प्लेटफार्म था जहां विवाह के बाद भी स्त्रियों के लिए एक नया रास्ता मिला। उनके सपनों को साकार करने की कोशिश की गई। उन्हें यह जताना बहुत जरूरी था कि विवाह अंतिम पडाव नहीं। जीवन के हर पल को अपनी मर्जी से जीना आना चाहिए। विवाह कर अपनी एक्सपायरी डेट का इंतजार करने में कहां की समझदारी है। किसी को भी सजी-सजाई ट्रे में लग कर सब कुछ नहीं मिलता, उसके लिए प्रयास तो करने ही पडते हैं। यह गुण एक स्त्री में ही हो सकते हैं कि वह एक ही समय में तमाम जिम्मेदारियों को संतुलित ढंग से निभा सके। स्टाइल व ग्लैमर की दुनिया में विवाहित स्त्री भी अपनी जगह बना सकती है, न केवल बना सकती है बल्कि सफलतापूर्वक खडी हो सकती है। यह हकीकत मैं दुनिया के सामने ला चुकी हूं।

कुछ आवश्यक शर्ते

हर क्षेत्र की तरह ग्लैमर की फील्ड की भी कुछ आवश्यक शर्ते हैं। क्या हैं वे, आइए जानें-

1. फोटोजनिक होना जरूरी

आप सामने से देखने में कैसी भी हों, भले ही साधारण हों, लेकिन आपका फोटोजनिक होना इस फील्ड की सबसे बडी अनिवार्यता है। कई बार बेहद सामान्य लुक की लडकियां भी इतनी फोटोजनिक होती हैं, कि देखने वाले दंग रह जाते हैं।

2. सहज रहना, सक्षम बनना भी

विभिन्न तरह की स्थितियों का सामना इस क्षेत्र में करना पडता है। कभी शूटिंग, कभी एडिटिंग, कभी प्रेस कांन्फ्रेंस, कभी पिक्चर शूट तो कभी दर्शकों का दरबार। इसमें हर समय मुस्कराते हुए सहज बने रहना पडता है। अकेले यात्रा करने की क्षमता भी आप में होनी चाहिए। अपने काम के सिलसिले में कभी एक शहर तो कभी दूसरे शहर से निकल विदेश यात्रा तक के लिए तैयार रहना पडता है। आप अपने लिए किसी दूसरे पर निर्भर न रहें। खुद सक्षम बनें।

3. ऑर्गेनाइज्ड रहें

अपनी डेट, टाइम और लोकेशन को लेकर आर्गेनाइज्ड रहें और पाबंदी से उसका पालन करें।

4. महत्वाकांक्षी रहना भी जरूरी

जीवन में महत्वाकांक्षा के बिना सब अधूरा है। लक्ष्य होंगे तभी उन्हें पूरा कर पाएंगी। इसलिए महत्वाकांक्षी जरूर बनी रहें। इसके अलावा सर्दी हो या गरमी, तेज बारिश हो या स्नो फॉल सभी परिस्थितियों के लिए शारीरिक व मानसिक रूप से तैयार रहें।

5. आत्मविश्वासी भी रहें

आत्मविश्वास आपके अंदर एक चमक ले आता है, इसका सकारात्मक प्रभाव आपके व्यक्तित्व पर स्पष्ट नजर आता है, इसलिए अपने अंदर लाएं इसे। 6. स्टैमिना और विल पॉवर बढाएं

आपको अपने अंदर विशेष रूप से स्टैमिना बढाना पडेगा। कभी आप ठंड में काम कर रही हैं तो कभी गर्मी में। स्टैमिना के साथ ही आपकी विल पॉवर यानी इच्छाशक्ति भी दृढ होनी चाहिए।

(साक्षात्कार : दिल्ली से प्रीति सेठ, इला श्रीवास्तव, मुंबई से पूजा सामंत)

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