आंध्र प्रदेश के हैदराबाद शहर में सुष्मिता का जन्म हुआ। इनके पिता आर्मी ऑफिसर थे व मां फैशन आर्टिस्ट व ज्यूलरी डिजाइनर। घर में इनके अलावा इनके एक भाई राजीव व बहन नीलम थी। सुष्मिता पैदा भले ही हैदराबाद में हुई हों, लेकिन उनका बचपन बीता दिल वालों के शहर दिल्ली में। एयर फोर्स गोल्डन जुबली इंस्टीटयूट से उन्होंने पढाई की। इनकी तमन्ना अंग्रेजी की पढाई कर पत्रकारिता में जाने की थी, लेकिन भाग्य को शायद कुछ और ही मंजूर था।
नई दुनिया में कदम
सुष्मिता ने 1994 में 18 साल की कम उम्र में गोवा में नई दुनिया में कदम रखा और मिस इंडिया का खिताब जीता। हालांकि इसके लिए फॉर्म भरने के बाद यह जानने पर कि ऐश्वर्या राय भी मिस इंडिया प्रतियोगिता में हिस्सा ले रही हैं, जिन बाइस लडकियों ने अपना नाम वापस लेने का फैसला किया था, उनमें सुष्मिता भी एक थीं। लेकिन बाद में मां के समझाने पर उन्होंने इस चुनौती को स्वीकार किया। इस टक्कर में सुष्मिता व ऐश्वर्या अंत तक बराबरी पर रहीं लेकिन अंत में टाई ब्रेकिंग प्रश्न पर वह ऐश्वर्या पर भारी पडीं और ऐसी पहली भारतीय बनीं, जिसे मिस यूनीवर्स का खिताब मिला। यह शुभारंभ था मध्यमवर्गीय परिवार की सुष्मिता के करियर का। वहां से वह निरंतर आगे ही बढती गई। यह सच है कि उन्होंने कभी सपने में नहीं सोचा था कि वह एक दिन इन बुलंदियों को छुएंगी और अभिनेत्री बनेंगी।
एक दैनिक अखबार के साक्षात्कार में उन्होंने महेश भट्ट के साथ अभिनय करने की इच्छा जताई। जब महेश भट्ट ने दस्तक फिल्म के लिए सुष्मिता का नायिका के रूप में चयन किया तो उन्होंने बहुत ही बेबाकी से कहा कि उन्हें अभिनय नहीं आता लेकिन वह कोशिश जरूर करना चाहेंगी।
समय के साथ बदलाव में यकीन
सुष्मिता का मानना है कि जब बहुत कुछ परिवर्तित होता है तो बदलाव लोगों में भी आते ही हैं। मुझ में भी आए लेकिन कोई यह नहीं कह सकता कि मैं पूरे तौर पर बदल गई। आज भी मैं वहीं हूं। आरंभ में मैं इतनी सफलताएं पाकर खुद ही हैरान थी लेकिन तब मैं अठारह साल की थी अपरिपक्व, आज की तरह मेच्योर नहीं थी। कभी केवल बंगाली खाना पसंद करती थी, आज थाई, चाइनीज व कॉन्टीनेंटल फूड भी खाती हूं। मुझे लगता है कि समय के साथ बदलना चाहिए, लेकिन इतना ही, कि नैतिक मूल्यों को खतरा न हो। इसमें संदेह नहीं कि आप अपने जीवन के हर दिन अपनी भावनाओं व अनुभवों से कुछ न कुछ सीखते जरूर हैं, मैंने भी बहुत कुछ सीखा।
दस्तक व जोर की बॉक्स ऑफिस पर नाकामयाबी के बाद सुष्मिता की बीवी नं. वन फिल्म की जबरदस्त कामयाबी ने सुष्मिता को नई पहचान दी। दर्शकों ने उनके नए रूप को सराहा।
इसके बाद लगातार कई फिल्में सुष्मिता ने कीं, जिनमें सिर्फ तुम, मैं हूं ना, मैं ऐसा ही हूं, मैंने प्यार क्यों किया, बेवफा, किसना व पैसा वसूल आदि हैं। मेघना गुलजार के निर्देशन में उन्होंने फिलहाल फिल्म की है। सुष्मिता का कहना है कि एक अभिनेत्री के रूप में काम करते हुए यह महत्वपूर्ण नहीं कि आप अच्छा अभिनय कर पाएंगी या नहीं, बल्कि यह जरूरी है कि वह रोल आप पर ठीक लगेगा या नहीं। यह भी सच है कि वह जब से इस इण्डस्ट्री में आई हैं अपने करियर के ग्राफ को लेकर कभी चिंतित नहीं हुई, न ही उन्हें कभी किसी से खतरा महसूस हुआ।
खूबसूरती के साथ आत्मविश्वास भी
मिस यूनीवर्स प्रतियोगिता जीत कर सुष्मिता ने सौंदर्य को नई परिभाषा दी। शायद कभी उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि वह सौंदर्य के मापदण्ड पर इतनी खरी उतरेंगी। सेना की बंद छावनी जैसी जगह से बाहर निकल कर बॉलीवुड के आजाद संसार में उन्होंने आसानी से एडजस्ट कर लिया। उनकी असली खूबसूरती है उनका गजब का आत्मविश्वास। वह कुछ भी करने व कहने से नहीं हिचकतीं। यही कारण है कि अपने से जुडने वाले भिन्न नामों को लेकर वह हमेशा चर्चा में रहीं। किसी के साथ अपने संबंधों को छुपाने की कोशिश उन्होंने कभी नहीं की। अपने फैसले पर अडिग रहने वाली हैं वह।
यादगार पल
सुष्मिता का कहना है कि उनकी जिंदगी में बहुत से ऐसे पल हैं, जो यादगार हैं लेकिन 30 जून 2001 को जब कोर्ट ने उन्हें रिनी को गोद लेने की इजाजत दी तो उस पल की खुशी को वह आज तक नहीं भूली हैं। वह कहती हैं कि पहली बार रिनी को देखते ही मैं उसकी तरफ आकर्षित हो गई थी। कोर्ट में मेरे लिए कुछ भी आसान नहीं था क्योंकि मैं अकेली अभिभावक थी व सेलिब्रिटी भी और ये सब मेरे हक में नहीं था। रिनी को गोद लेने का निर्णय भी उनका खुद का बोल्ड फैसला था। आज वह खुश हैं अपनी बेटी के साथ।
पसंदीदा स्थल
सुष्मिता कहती हैं कि सी बीच उनके पसंदीदा पर्यटन स्थल हैं, इसलिए साउथ अमेरिका उन्हें पसंद है। वह अकसर वहां जाती हैं, विशेषकर वेनेज्यूएला व ब्राजील। स्पेन भी उन्हें भाता है। रेस्तरां में उन्हें पसंद है लॉस एंजिलिस का स्काई बार व न्यूयॉर्क का ताओ। पब वह कम ही जाती हैं। थकने पर वह तेज म्यूजिक पर डांस कर रिलैक्स होती हैं। ऐसा नहीं कि वह शादी नहीं करेंगी, लेकिन उसके लिए सही वक्त और सही पात्र का इंतजार है उन्हें। |