60 संकल्प नववर्ष के

      
60 संकल्प नववर्ष के

कितने संकल्प होते हैं पूरे

अध्ययन बताते हैं कि जहां 52 फीसदी लोग अपने संकल्पों को पूरा करने के प्रति आश्वस्त दिखते हैं, केवल 12 प्रतिशत लोग ही अपने संकल्प पूरे कर पाते हैं। 22 प्रतिशत पुरुष संकल्पों में थोडी फेरबदल करने पर ज्यादा सफल होते हैं। मसलन 10 किलो वजन घटाना है तो बजाय एक बार में इसे घटाने के यह संकल्प लें कि एक महीने में 2 किलो वजन घटाना है। इसमें ज्यादा सफलता मिलती है। इसी तरह वे स्त्रियां भी 10 प्रतिशत तक ज्यादा सफल रहती हैं, यदि वे ऐसे संकल्प लेती हैं, जिनमें उनके परिवार वाले या दोस्त उनकी मदद करते हैं।

संकल्प का अर्थ है खुद से कोई वायदा करना। हालांकि संकल्प हम सिर्फ खुद के लिए नहीं लेते, कई बार सामूहिक और संस्थागत कल्याण के लिए भी लेते हैं। सभी चाहते हैं कि नए साल की ताजा शुरुआत एक बेहतर भविष्य के संकल्प के साथ हो। लिहाजा बीते वर्ष की सारी कडवाहटों, विफलता और नासमझी को अलविदा कहते हुए कुछ नया-सकारात्मक और अच्छा करना चाहते हैं। इसके लिए लेते हैं कुछ संकल्प। एक बार फिर से आ रहा है नया साल और इस बार कुछ ऐसे संकल्प लें, जिन्हें आसानी से पूरा किया जा सके।

सेहत का रखूंगी ख्याल

1. हर बार भूल जाती हैं! पहली जनवरी का पहला संकल्प लें वेइंग मशीन खरीदें, ताकि बढते जा रहे वजन को नियंत्रित कर सकें। गलत तो नहीं समझीं! वजन घटाने का मतलब साइज जीरो बिलकुल नहीं है। सिर्फ अतिरिक्त फैट कम करें, एनरोक्सिया की मरीज न बनें।

2. देर से सोने-जागने का नुकसान झेल रही हैं। लौटें फिर से पढाई के दिनों में, जल्दी सोएं-जल्दी जागें। (नाइट शिफ्ट वालों को स्पेशल छूट)

3. मॉर्निग वॉक, योग, ध्यान व व्यायाम। कामकाजी स्त्रियों के पास वक्त होता है क्या! फिर भी मुश्किल नहीं है कुछ भी गर ठान लीजिए।

4. बच्चों की पिट्जा-बर्गर-केक की फरमाइशें पूरी करते-करते कब खुद इनकी गिरफ्त में आई, पता नहीं चला। नए मेन्यू में इन चीजों को कम कर दें, वर्ना खुद बर्गर बन जाएंगी।

5. ऑफिस की भागमभाग में ब्रेकफस्ट भूल जाती हैं। बचपन में मां की दी गई हिदायतें याद करें कि घर से बगैर कुछ खाए कभी न निकलो।

6. खाने की बात चली है तो पानी, जूस, दुग्ध उत्पाद और हरी सब्जियों-फलों के महत्व को बिलकुल न भूलें।

7. स्त्रियों में हड्डियों की समस्या ऑस्टियोपरोसिस तेजी से फैल रही है। एनीमिया के आंकडे भी ज्यादा हैं। वर्ष में दो बार स्वास्थ्य जांच कोई बुरा ख्याल तो नहीं!

8. चाय-कॉफी-चॉकलेट..! मुश्किल है लेकिन कम करें।

9. बीमारी को अंतिम समय तक टालते जाना हम स्त्रियों के लिए कोई नई बात नहीं। इस वर्ष प्लीज ऐसा न करें।

10. अंत में सौ मर्जो का एक इलाज! खुश रहें। यह ऐसी बात है, जो सचमुच स्वस्थ रहने में मदद करती है।

आईना कहता है-खूबसूरत हूं मैं

1. खूबसूरत हर स्त्री होती है, लेकिन मेकअप से एक नई आभा आती है, इसमें कोई शक नहीं। हर बार एक से मेकअप, हेयर स्टाइल से ऊब चुकी हैं न! नए वर्ष में खुद पर कुछ प्रयोग आजमाएं, पर ज्यादा नहीं।

2. वैनिटी बॉक्स से सारे पुराने कॉस्मेटिक्स हटाएं। इनकी भी एक्सपायरी डेट होती है। पुरानी लिपस्टिक्स, नेल पॉलिश, फाउंडेशन का मोह त्यागें।

3. समय की कमी है, फिर भी महीने में एक बार फेशियल और स्पा जरूरी है। मेनीक्योर व पेडीक्योर को भी नजरअंदाज न करें।

4. रात में थकान-सुस्ती के कारण घर पहुंच कर सोने से पहले मेकअप उतारना व चेहरा साफ करना भूल जाती हैं। इस वर्ष आलस्य दूर भगाएं।

5. परफ्यूम, बॉडी स्प्रे, डियो.. उफ खुशबू के इस संसार में कितना कनफ्यूजन है। ये चुनें या वो चुनें। लेकिन पक्का वादा करें कि इस साल अपने मूड को खुश रखने वाली खुशबू चुन लेंगी।

6. मेकअप किट में इतने बेकार, गंदे ब्रश क्यों दिखते रहते हैं? संकल्प लें, सारे ब्रश मेकअप के बाद साफ करके रखेंगी।

7. कॉस्मेटिक्स की भीड में खोकर घरेलू नुसखों पर नजर डालनी छोड दी थी। इस वर्ष हल्दी, खीरे का रस, बेसन, दही जैसी चीजें आजमाएं।

8. प्रदूषण, थकान और सुबह-शाम काम ही काम..। यानी शाम तक आईने में दिखता एक बुझा हुआ चेहरा। अपनी त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए कुछ हेल्थ सप्लीमेंट्स या विटमिंस भी ले सकती हैं।

9. एलबम में अपनी पुरानी तसवीरें देख कर शोक मनाने से कुछ नहीं मिलेगा। वह छरहरापन व साफ-बेदाग त्वचा भला कहां लौटेगी! कभी हम खूबसूरत थे, नई लडकियों को देख कर यह सोचने से सिर्फ कुंठा मिलेगी। खुद को यथार्थ में स्वीकारें, क्योंकि आईना झूठ नहीं बोलता।

10. भरपूर नींद..सचमुच एक जमाना गुजर गया चैन की नींद सोए। अच्छी नींद का अर्थ है-साफ त्वचा, खूबसूरती, ठीक वजन और हां- अगला दिन पूरी तरह टेंशन फ्री। दिनचर्या को नियमित करें, भरपूर सोएं।

आतंकवाद को मिटाने का संकल्प है मधुर भंडारकर

(फिल्म निर्माता)

26 नवंबर 2008 को मुंबई पर भयानक आतंकी हमले ने सबका चैन खत्म कर दिया है। नए वर्ष के बारे में जो सोचा था, सब भूल गया हूं। बॉलीवुड ने करोडों का नुकसान झेला है। फिल्म फैशन के बाद मैंने फिल्म जेल पर रिसर्च शुरू की थी, लेकिन अब सुरक्षा कारणों से रिसर्च करने का मौका मिलेगा भी या नहीं, नहीं जानता। मेरा संकल्प तो यही है कि आतंकवाद का खात्मा हो।

घरवालों के लिए चाहिए कुछ वक्त श्रेयस तलपडे

(फिल्म कलाकार)

नागेश कुकनूर की फिल्म इकबाल से मुझे पहचान मिली। अब नए वर्ष में मेरा संकल्प है कि हर भूमिका, हर किरदार के जरिये लोगों के दिल में जगह बना सकूं। यह भी दुआ करता हूं कि नया वर्ष आम आदमी के लिए शांतिपूर्ण हो। पिछले वर्ष फिटनेस पर ज्यादा ध्यान नहीं दे सका, इस वर्ष मेरे एजेंडा में यह है। सबसे जरूरी संकल्प है कि वर्ष 2009 में पत्‍‌नी दीप्ति व माता-पिता के साथ समय बिताना चाहूंगा। उम्मीद है, मेरा यह संकल्प पूरा हो सकेगा।

प्रस्तुति : पूजा सामंत, एस. सुशीला

फैशन वह जो अच्छा लगे

1. सबसे पहले वार्डरोब को व्यवस्थित करें। कुछ पुराने कपडों को निकाले बिना नई ड्रेसेज के लिए जगह नहीं बनेगी। माना कि पुरानी ड्रेसेज के प्रति बहुत भावुक हैं, लेकिन थोडा कठोर बनना होगा, तभी नया फैशन सही ढंग से आपके वार्डरोब में समा पाएगा।

2. ब्रैंड्स के पीछे दौडने के बजाय वह खरीदें जो अच्छा लगे व जंचे। कलात्मक और आधुनिक हो। कम खर्च में बात बने तो बुरा क्या है!

3. हमेशा फीके रंग तो नहीं पहनतीं आप? इसलिए कि पति या ब्वॉय फ्रेंड को यही रंग पसंद हैं। रंगों का मूड पर बेहद सकारात्मक प्रभाव पडता है। इसलिए वही पहनें-जो आपके मूड के अनुरूप हो।

4. स्वस्थ रहने का संकल्प ले रही हैं, लिहाजा मॉर्निग वॉक के लिए एक-दो जोडी बेहतरीन ट्रैक सूट, स्पोर्ट शू तो वार्डरोब में होने ही चाहिए। कुछ खूबसूरत इनरवेयर या बीच वेयर भी हों तो क्या कहने!

5. कई बार फैशन, रुचियों, मूड और अवसर के बीच तालमेल नहीं बैठ पाता। समझ ही नहीं आता कि इस पार्टी में क्या पहनें, शादी में क्या पहनें। फैशन डिजाइनर या स्टाइलिस्ट से राय लेने में कोई बुराई नहीं।

6. वार्डरोब में चुनिंदा चीजें रखने का मतलब यह नहीं कि पुरानी सारी ड्रेसेज हटा लें। फैशन घूम-फिर कर वहीं लौट आता है, इसलिए कुछ पसंदीदा पुरानी ड्रेसेज भी रखें।

7. मशहूर मॉडल और अभिनेत्री दीपिका पादुकोण का कहना है कि जल्दी तैयार होना हो तो वार्डरोब में एक ब्लैक ड्रेस जरूर रखें। क्योंकि जब कुछ समझ में न आए तो काला रंग साथ देता है। अमल करके देखें।

8. फैशन का अर्थ यह नहीं कि जरूरत से ज्यादा चीजों का संग्रह करें। जितना अधिक संग्रह होगा, उतना ही व्यवस्थित करना मुश्किल होता है। इस वर्ष कोशिश करें कि चुनिंदा और अच्छी ड्रेसेज ही खरीदें।

9. एक्सेसरीज की बात तो रह ही गई। अब इतना समय भी कहां है कि हर ड्रेस के साथ मैच करती ज्यूलरी-एक्सेसरीज भी हो। कुछ ऐसी ज्यूलरी जरूर हो, जो हर ड्रेस के साथ मैच कर जाए।

10. फैशन क्या है? यह सवाल अहम है। क्या जो चल रहा है-वही फैशन है? फैशन है अपने काम, रुचि, समय, सुविधा और मूड के हिसाब से ड्रेसिंग सेंस। यह सेंस जरूरी है।

आर्थिक मंदी के दौर में बचत

1. मुश्किल है फिर भी बचत जरूरी है। आर्थिक मंदी और बेतहाशा बढती महंगाई के इस दौर में खर्चो पर नजर रखें, बजट बना कर अनावश्यक खर्चे कम करें, तभी सबका भला होगा। आमीन!

2. इस साल लोन की बकाया किस्तें चुका दें, और हां-फिर से एक नया लोन न लें, पछताना पड सकता है।

3. कुछ पैसा आपातकाल के लिए जरूर रखें। इसे अपनी नजर से भी बचा कर रखें। क्या मालूम कब क्या जरूरत आ पडे।

4. फोन व बिजली के लंबे-लंबे बिल आजकल घर का बजट सबसे ज्यादा बिगाडते हैं। घर वालों से गुजारिश करें कि कम से कम एक कमरे से दूसरे कमरे में बात करने के लिए तो मोबाइल का इस्तेमाल न करें।

5. अनावश्यक खर्चे घटाने की बात चल रही है लेकिन कभी अपने शू रैक को देखें। बेशुमार सैंडिल्स-शूज की भरमार है। इस वर्ष पर्स, जूते-चप्पलों पर कम खर्च करें। शादी-पार्टी के लिए क्यों नई ड्रेस जरूरी है? पुरानी से काम चल सकता है। (दोस्त कब काम आएंगे!)

6. साल के अंत में तब जागती हैं आप, जब पूरी तनख्वाह और कई बार उससे भी ज्यादा टैक्स में कट जाती है। इस वर्ष पहले से कुछ निवेश कर लें, पॉलिसी ले लें। ईमानदारी से टैक्स अदा करना अच्छी आदत है।

7. क्रेडिट कार्ड्स ने तो बचत का सारा जज्बा ही मार डाला है (क्रेडिट कार्ड कंपनियां माफ करें)। पुराना जमाना ही अच्छा था कि बाजार जाओ तो जरूरत भर कैश वॉलेट में रखो। इससे अनावश्यक खरीदारी से बचेंगी और बजट बढने के तनाव से मुक्ति भी मिलेगी।

8. आर्थिक मंदी के दौर में सही निवेश बेहद जरूरी है। गोल्ड या जमीन में निवेश करने के बारे में सोच सकती हैं। (पैसे जेब में बच सकें तो)

9. पिछले वर्ष शेयर बाजार, इक्विटी-म्युचुअल फंड के चक्करों में बहुत घूम चुकी हैं। इस वर्ष सोच-समझ कर पैसे लगाएं, पछताएं नहीं।

10. बचत व बाजार का सबसे कारगर नुसखा है-विंडो शॉपिंग। बाजार की जानकारी रखना अच्छी बात है। मॉल्स में ढेरों चीजें देख कर न ललचाएं। कई बार राशन के साथ घर में आया काफी सामान फिजूल होता है। इससे बची रहें तो बहुत अच्छा हो।

संकल्प पूरे करें कुछ ऐसे

1.  असंभव संकल्प न लें। यथार्थवादी और आसान लक्ष्य बनाएं।

2. संकल्प लेना काफी नहीं, उनके लिए गंभीरता भी जरूरी है। समर्पण भावना से उनके लिए काम करें।

3. यदि घर वालों या दोस्तों के संकल्पों से आपके संकल्प मिलते हों तो उनसे संकल्प बांटें। इससे उन्हें पूरा करना आसान हो सकता है।

4.  संकल्प थोडे-थोडे समय के लिए लें। मसलन मुझे अमुक काम तीन महीने में कर लेना है। ऐसे ही लक्ष्य बनाएं और इस पर भी नजर रखें कि कैसे उन्हें पूरा कर पा रहे हैं। 5. निजी डायरी में अपने संकल्प लिखें। विकास प्रक्रिया का विवरण भी लिखें। कोई चूक हो तो उसे भी दर्ज करें, ताकि आइंदा इसकी पुनरावृत्ति न हो। छोटे संकल्प पूरे हों तो खुद को शाबासी भी दें।

6.  रिमाइंडर रखें, जो लक्ष्य की याद दिलाता रहे। सुबह साढे चार बजे उठ कर योग करना है तो सुबह की प्यारी नींद छोडनी ही होगी।

7.  इतने ज्यादा संकल्प न लें कि उन्हें याद ही न रख सकें। दो या तीन संकल्प लें और उन्हें ही पूरा करें।

8.  पुराने संकल्प पूरे नहीं हुए तो न पछताएं। बीती ताहि बिसार दे..यानी बीते हुए को भूल कर आगे के बारे में सोचें। अतीत की विफलता पर सिर न धुनें, भावीसंकल्प पूरा करने के बारे में सोचें।

9.  थोडा लचीलापन भी है जरूरी। संकल्प इतने भी जरूरी न हो जाएं कि उसके लिए अन्य जिम्मेदारियों को भूल जाएं। हर चीज का महत्व है, लिहाजा एक बेहतर तालमेल बिठाना आवश्यक है।

10.  संकल्पों को पूरा करने के लिए खुद को समय देना होगा। सबसे बडा संकल्प तो यही होना चाहिए कि खुद को समय दें।

करियर की खातिर

1. खुद को अपडेट करें इस वर्ष। नया सीखना, लेकिन अपनी मौलिकता को भी बचाए रखना बेहद जरूरी है।

2. ऑफिस राजनीति से दूर रह कर ईमानदारी से अपना काम करें। काम से ही आपकी पहचान है और यही आपका प्रमुख संकल्प होना चाहिए।

3. जरा सी सुस्ती-मतलब करियर में ब्रेक। बेहतर अवसर व संपर्क महज इसलिए भी खोते हैं, क्योंकि ई मेल रोज नहीं देखतीं। संकल्प लें कि जरूरी मेल्स का जवाब तुरंत दें।

4. कई बार अच्छा काम करने के बावजूद इसलिए सफलता नहीं मिलती कि खुद को प्रेजेंटेबल नहीं बना पातीं। इस पहलू पर भी ध्यान दें।

5. सहकर्मियों से तालमेल बिठा कर काम करें। टीम वर्क के महत्व को समझें और अपने कार्य में ज्यादा पारदर्शिता लाएं।

6. काम का तनाव तब ज्यादा हावी होता है, जब प्राथमिकता तय नहीं कर पातीं। रोज के लक्ष्य बनाएं और उन्हें पूरा करें। यह जरूरी संकल्प है।

7. काम को हलके ढंग से न लें। जो भी कर रही हैं, वह महत्वपूर्ण है।

8. एक जरूरी संकल्प है सही करियर का चुनाव। खुद से पूछें कि जो काम कर रही हैं, क्या उसमें संतुष्ट हैं? रुचि के मुताबिक काम तलाशें।

9. अपने काम की हाइटेक मार्केटिंग इस प्रतिस्पर्धी जमाने में जरूरी है, इसके लिए चाहिए एक प्रभावशाली रेज्यूमे। जॉब सर्च वेबसाइट्स में खुद को रजिस्टर करना भी अच्छा विचार है।

10. करियर के मामले में खरगोश व कछुआ वाली कहानी प्रासंगिक है। खरगोश बहुत तेज चला, थक कर कहीं सो गया। कछुआ धीमे चला लेकिन गंतव्य तक पहुंच गया। धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय, माली सींचे सौ घडा ऋतु आए फल होय। धैर्य और निरंतर गतिशीलता करियर ही नहीं, जीवन के हर पहलू में काम आती है।

बडे पर्दे पर छाने का है संकल्प

रेशमी घोष (टीवी कलाकार)

अब तक कभी संकल्प नहीं लिया। जो मिल गया उसी को मुकद्दर समझ लिया। लेकिन इस वर्ष अपनी सोच बदलने की कोशिश कर रही हूं। नच बलिए-4  में खिताब जीतूं, यही संकल्प है मेरा इस वर्ष। इस साल मैं और अमित गुप्ता शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं। लिहाजा यह साल मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण होगा। इस नए वर्ष में बडे पर्दे की ओर मुडने का भी संकल्प है। जिस मकसद से मैं कोलकाता से मुंबई आई थी, उसमें कामयाब होऊं, दुआ करती हूं।

इस वर्ष है लोगों को हंसाने का संकल्प

जूही परमार (टीवी कलाकार)

पिछले साल की शुरुआत में मैंने संकल्प लिया था कि मुझे टीवी की दुखी औरत (कुमकुम) की छवि से इतर कुछ नया करना है। इसलिए मैंने कॉमेडी सर्कस में काम करना शुरू किया और अपनी नई छवि कायम की। मेरे बारे में कहा जा रहा है कि छोटे परदे की यह कुमकुम हंसाने का भी माद्दा रखती है। नए साल की शुरुआत में मैं अपनी जिंदगी का एक और नया सफर शुरू करने जा रही हूं। इसमें मेरे हमसफर होंगे सचिन श्रॉफ। मेरी शादी मेरे घर, यानी जयपुर में हमारे परिवार वालों की मौजूदगी में होगी। हनीमून तो छुट्टियों पर निर्भर करेगा। फिलहाल तो आप सबकी शुभकामनाएं चाहिए।

प्रस्तुति : राजेश श्रीवास्तव

दुनिया बहुत हसीन है, इसे बचाएं-संवारें

1. बडी सी इस दुनिया का सबसे निजी हिस्सा है हमारा परिवार। व्यस्तता के बावजूद एक समय का खाना परिवार के साथ जरूर खाएं।

2. जीवनसाथी को ताने देने से बाज आएं। दूसरे को बदल नहीं सकते, बेहतर होगा कि खुद को बदल लें। झगडा कहीं तो खत्म होना चाहिए।

3. बच्चों के होमवर्क या परीक्षा का मतलब है-मां का सिरदर्द। कोशिश करें कि बाहरी दुनिया का गुस्सा बच्चों पर न उतारें।

4. माना कि घर की व्यवस्था आपका विभाग है, लेकिन उसमें घर के अन्य सदस्यों का सहयोग लें, इससे आपसी संबंध मजबूत होते हैं।

5. पीटीएम में जाने से पहले खुद को संयत रखने का प्रयास करें, ताकि शिक्षकों की शिकायतों पर त्वरित प्रतिक्रिया से बचें।

6. पडोसियों की शिकायतों पर कान देना कम करें। दिल से निकालें कि आपके बच्चे सबसे शैतान हैं। वे शैतानी नहीं करेंगे तो क्या बूढे करेंगे।

7. कोई दोस्त है न रकीब है-तेरा शहर कितना अजीब है.., ये शिकायतें कम करें। इस वर्ष कुछ नए दोस्त बनाएं। पुराने दोस्तों से मिलना-फोन करना न भूलें। इसके लिए पहली तारीख सबसे सही होगी।

8. गिले-शिकवों से जिंदगी में लज्जत आती है, लेकिन तकरार इतनी न बढे कि प्यार ही खत्म हो जाए। यह बात पति, बच्चों, दोस्तों से लेकर पूरे सामाजिक संबंधों पर लागू होती है। इसका ध्यान इस साल जरूर रखें।

9. जिम्मेदारियों से निजात मिले तो समाज के बारे में सोचें। मगर, सच यह है कि समस्याएं कभी कम नहीं होंगी। इतना तो कर सकती हैं कि तनख्वाह का एक हिस्सा सामाजिक कार्यो के लिए दें। इसे मन से करें।

10. परिवार व संबंध तभी सुरक्षित रहेंगे, जब दुनिया सुरक्षित होगी। इसलिए पर्यावरण के प्रति सजग रहें। संकल्प लें कि एक पौधा जरूर लगाएंगी अपने आसपास। साथ ही प्लास्टिक और पॉलीथिन बैग्स को भी कहें अलविदा इस नए वर्ष में!

इंदिरा राठौर
 
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