थोड़ी समझदारी जरूरी

      
थोड़ी समझदारी जरूरी

इसमें संदेह नहीं कि शादी के बाद हर रोज की जरूरतें और उनको लेकर हुई तकरारें जीवन केचैन को खत्म कर देती हैं। शादी को लेकर जो सपने मन में संजोए होते हैं उन्हें बिखरते देर नहीं लगती। ऐसे में संबंधों में लगाव और मधुरता बनाए रखने के लिए विशेषज्ञ क्या सलाह देते हैं आइए जानें-

41. खुशी की वजह खोजें

विवाहित दंपतियों के लिए यह सुनहरा नियम है कि उन्हें उन बातों को खोज निकालना होगा जिनसे साथी को खुशी मिले। हम सब अलग-अलग इंसान हैं और हर व्यक्ति दूसरे से भिन्न है। इसलिए यह जरूरी नहीं कि जिस बात पर एक खुश हो दूसरा भी उससे प्रसन्न रहे। यदि यह जानने की कोशिश करें कि सामने वाला क्या चाहता है तथा उसे किस काम में खुशी मिलती है तो निश्चित जानिए कि इससे संबंध मधुर बनेंगे।

42. घरेलू कामों में हाथ बंटाएं

शोध बताते हैं कि जो दंपती कामकाजी हैं, वे दोनों ही अति व्यस्त और काम के तनाव से ग्रस्त होते हैं। इससे दोनों में बराबरी का भाव पनपता है और साथ ही यह भी एहसास होता है कि कौन ज्यादा जिम्मेदार तरीके से काम कर रहा है। दंपती इस बारे में एकदम स्पष्ट होते हैं कि कौन, किससे, कैसी घरेलू जिम्मेदारी पूरी करने की उम्मीद कर रहा है। महत्वपूर्ण नियम यही है कि दोनों साथी आपसी रजामंदी से घरेलू कार्यो का बंटवारा कर लें।

43. तनाव में भी नम्रता बरतें

जब लोग तनाव या गुस्से में होते हैं तब वे अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाते। दंपतियों को यह सीखना बहुत जरूरी है कि वे कैसे अपनी भावनाओं पर संतुलन बनाएं और एक-दूसरे पर उन्हें न निकालें। जिस समय आप विचलित मन: स्थिति से गुजर रहे हों और दूसरे का आदर करने में अक्षम हों, उस समय संवेदनशील मुद्दों को मत उठाइए। यदि जरूरत है, तो पहले मन पर काबू पाइए, शांत होइए और बातचीत करने से पहले अपने दिमाग में एक बार रिहर्सल कर लीजिए। इस बात का प्रण कर लें कि किसी भी स्थिति में अपने साथी का अनादर आप नहीं करेंगे। चाहे झगडा कितना भी बडा हो और मुद्दा कितना भी महत्वपूर्ण हो।

44. कम्युनिकेशन कला सीखें

अच्छे और सुखद संबंधों के लिए अपने विचारों, भावनाओं, आवश्यकताओं और इच्छाओं को सीधे व सही तरीके से व्यक्त करना सीखें। आपको एक अच्छे श्रोता के गुण भी विकसित करने होंगे। अपने साथी को विचारों, भावनाओं और जरूरतों को आसान तरीकों से अभिव्यक्ति करने के लिए सुरक्षित अवसर दें।

45. प्यार बरकरार रखें

अपने संबंधों को मजबूत करने के लिए साथ समय गुजारें। शादी से पहले आप बहुत सा समय साथ गुजारते हैं। जब साथ नहीं होते तब भी बात करने के बहाने ढूंढते रहते हैं। लेकिन शादी के बाद कुछ दंपती साथ समय गुजारने की कोशिश नहीं करते न ही एक-दूसरे की भावनाओं की पहले की तरह परवाह करते हैं। इससे आपसी प्यार कम होने लगता है। या दूसरे शब्दों में कहें तो आप दोनों ही अपने प्यार को सही तौर पर जाहिर नहीं कर पाते। मधुर संबंधों के लिए आपको एक-दूसरे के साथ क्वालिटी टाइम बिताना होगा। अकेले डेट पर जाएं, मौज-मस्ती करें लेकिन संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा न करें। अपने प्रयासों से प्यार को जिंदा रखें।

46. स्वस्थ शारीरिक संबंध रखें

शारीरिक निकटता स्त्री और पुरुषों में अलग-अलग होती है। दोनों को एक-दूसरे की जरूरत को समझना और पूर्ति करना आना चाहिए। वैवाहिक जीवन की शुरुआत में ये संबंध अच्छे रहते भी हैं लेकिन बच्चों के आने के बाद पहले जैसी निकटता नहीं रह पाती। फिर भी ये समझना जरूरी है कि आपको इन संबंधों की तरफ विशेष तवज्जो देनी होगी।

47. आपसी सहमति से काम करें

सुखद वैवाहिक जीवन बिताने वाले अपनी साथी की सहमति के बिना कोई काम नहीं करते। दंपतियों को चाहिए कि वे एक-दूसरे की भावनाओं और पसंद को समझते हुए निर्णय लें। आपको यह समझना होगा कि कौन सा विषय एक-दूसरे के लिए कितना महत्वपूर्ण है तथा जो निर्णय लेने जा रहे हैं वह कितना सही है और कितनी खुशी देगा आपके साथी को। समझौते के लिए हरदम तैयार रहें।

48. परिवर्तन के लिए तैयार रहें

कई बार संबंध इसलिए खराब हो जाते हैं क्योंकिलोगों को लगता है कि जो परिवर्तन रिश्तों के लिए चाहिए उनके लिए वे बदलाव लाने आसान नहीं। यह बात याद रखें कि थोडे से परिवर्तन रिश्ते में भारी सुखद बदलाव ला सकते हैं। इस बात को विशेषज्ञों ने भी माना है। वैसे भी ऐसा कोई इंसान नहीं जिसका वैवाहिक जीवन वैसा ही चला आ रहा हो जैसा विवाह पूर्व था। कुछ न कुछ परिवर्तन आने लाजिमी हैं। कुछ समय बाद ये परिवर्तन आपको बिलकुल भिन्न लेकिन महत्वपूर्ण जगह दिलाएंगे। चाहें तो इस मामले में किसी सलाहकार की मदद भी ले सकते हैं।

49. एक-दूसरे का शुक्रिया अदा करें

आशाओं और खुशियों को लाने में संतोष और धन्यवाद जैसे भाव महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हर रिश्ते के कुछ नकारात्मक व कुछ सकारात्मक पहलू होते हैं। हमेशा सकारात्मक बातों को देखिए। अपने साथी के प्रति प्यार और आदर भाव को प्रतिदिन जाहिर करने के मौके ढूंढिए। किसी विशेष अवसर का इंतजार मत करिए।

50. समानुभूति उत्पन्न करें

अपने को उस स्थिति में रखकर देखें जैसे कि अपना जूता जब काट रहा हो तो दूसरे को इसका एहसास भी नहीं हो सकता कि कितनी तकलीफ हो रही है। अपने को समान भाव से देखेंगे तभी परेशानी का सही अंदाजा लगा पाएंगे। हर व्यक्ति के अनुभव अलग होते हैं। जब आप अपने साथी की भावनाओं को ठीक से समझ पाएंगे तभी सफल वैवाहिक जीवन के मूल मंत्र का पालन कर पाएंगे।

(मैरिज काउंसलर डॉ. अनु गोयल से बातचीत पर आधारित)

प्रीति सेठ
 
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