आपसी समझ है हमारे रिश्ते की बुनियाद
आपसी समझ है हमारे रिश्ते की बुनियाद

आप दोनों की पहली मुलाकात कब हुई? क्या यह प्रेम विवाह था या अरेंज मैरिज?

बप्पी- इसे लव कम अरेंज मैरिज समझ लीजिए। चित्राणी मेरा पहला प्यार है। मैं जब 23 साल का था तब उनसे पहली बार मिला था। पहली मुलाकात में ही मैं उन्हें अपना दिल दे बैठा था। सन् 1976 की बात है। मुंबई के तारदेव स्थित फेमस स्टूडियो में वह मेरे गाने की रिकार्डिग में आई थीं। वह गाना था-प्यार मांगा है तुम्हीं से, न इंकार करो, मुझे प्यार करो..। मैंने स्टूडियो से लौटते ही तुरंत उन्हें फोन मिलाया और कहा, आई लव यू। चित्राणी ने भी हां कह दी। मैंने बिना देर किए उनके मम्मी-पापा से बात की और फिर हमारी शादी हो गई।

चित्राणी जी, क्या आपको भी बप्पी दा से पहली नजर में प्यार हुआ था?

चित्राणी- पता नहीं, लेकिन जब उन्होंने प्रपोज किया तो मैं न नहीं कह सकी। पर मुझे नहीं पता था कि बात इतनी जल्दी शादी तक पहुंच जाएगी। मैं उस समय केवल 18 वर्ष की थी और मुंबई के के.सी. कॉलेज में पढ रही थी।

आप दोनों की किस खासियत ने एक-दूसरे को प्रभावित किया?

बप्पी- मैं बहुत अंधविश्वासी हूं। मेरा नंबर नौ है और इनका नंबर छह है। दोनों का योग शुभ होता है। कम लोग जानते हैं कि मैं स्वयं ज्योतिष का जानकार हूं। चित्राणी सच बोलती हैं। मुझे उनमें एक गृहिणी के सारे गुण दिखाई दिए और मुझे ऐसी ही जीवनसंगिनी चाहिए थी जो मेरा घर संभाल सके। सही देखभाल कर सके, क्योंकि मैं अपने माता-पिता का इकलौता बेटा हूं।

चित्राणी- दादा बहुत अच्छे इंसान हैं। हमेशा दूसरों के हित के बारे में सोचते हैं। कभी झूठ नहीं बोलते, किसी का दिल नहीं दुखाते और किसी का अपमान नहीं करते। इनके जैसा इंसान सदियों में पैदा होता है। यह प्रतिदिन पूजा-पाठ करते हैं और गुस्सा कभी नहीं होते। एक लडकी को अपने पति में और क्या खूबियां चाहिए? फिर वह मुझे पसंद क्यों नहीं आते!

आप दोनों की शादी कब हुई? क्या शादी में किसी प्रकार की अडचन आई?

बप्पी- 24 जनवरी, 1977 को हमने शादी की। विस्तार से मिसेज लाहिरी बताएंगी।

चित्राणी- मुलाकात के कुछ ही महीने बाद 1976 में दादा के जन्मदिन यानी 27 नवंबर को हमारी सगाई हो गई थी और 24 जनवरी 1977 को बंगाली रीति-रिवाज से हमारी शादी हुई। हम दोनों ब्राह्मण हैं। हमारी शादी में किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई। हमारे यहां शादी के बाद पत्नी के नाम के साथ पति का सरनेम जुड जाता है। आजकल तो अपने सरनेम के साथ पति का सरनेम जोडने का फैशन चल गया है।

आप दोनों एक-दूसरे को प्यार से क्या कहकर बुलाते हैं?

बप्पी- मैं उन्हें हमेशा मिसेज लाहिरी कहकर बुलाता हूं।

चित्राणी- हमारे यहां पति का नाम लेने का रिवाज नहीं है। दूसरों से बात करते समय मैं उन्हें दादा कहकर संबोधित करती हूं।

कहा जाता है कि शादी के बाद, खासकर बच्चा पैदा होने के बाद पति-पत्नी के बीच का प्यार कम हो जाता है। क्या आप दोनों ने कभी इस बात को महसूस किया?

बप्पी- (हंसते हुए) मैंने आज तक ऐसा महसूस नहीं किया। आज भी जब मैं रिकॉर्डिग केलिए जाता हूं तो मिसेज लाहिरी स्वयं मुझे नाश्ता कराती हैं। यदि रात को मैं देर से घर आता हूं तो वह मेरा इंतजार कर रही होती हैं। मेरे बिना वह डिनर नहीं करतीं।

चित्राणी- दादा हमेशा एक से रहे, बल्किशादी के बाद वह और ज्यादा रोमैंटिक हो गए। उनका प्यार मेरे लिए और बढ गया। वे मेरे बिना एक पल भी नहीं रह पाते। मेरी सास दादा से कहती थीं कि तुम चौबीस घंटे में जितनी बार चित्राणी का नाम लेते हो, यदि उतनी बार भगवान का नाम लेते तो वे तुम्हारे सामने प्रकट हो जाते। दादा ने शादी के बाद मुझे एक दिन भी मायके में नहीं रहने दिया। वे केवल दिन में कुछ घंटों के लिए मुझे अपने मम्मी-पापा के साथ रहने की इजाजत देते हैं। इसी बात से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि दादा मुझसे कितना प्यार करते हैं।

आप दोनों के बीच किस बात को लेकर मनमुटाव होता है?

बप्पी- हमारे बीच लडाई-झगडा कभी नहीं होता। मैं एडजस्ट करने में यकीन करता हूं। हर इंसान में अच्छाई और बुराई दोनों होती हैं, लेकिन पति-पत्नी समझदार हैं तो वे कभी छोटी-छोटी बातों पर लडाई नहीं करते।

चित्राणी- हमारी शादी को 32 वर्ष हो गए, लेकिन आजतक हमारे बीच कभी लडाई नहीं हुई। लोगों को यह बात ताज्जुब में डाल सकती है। मेरे पास दादा से नाराज होने की या फिर उनसे लडाई करने की कोई वजह तो होनी चाहिए। वे ड्रिंक नहीं करते, सिगरेट नहीं पीते, लडकियों के पीछे नहीं भागते, मुझे पूरा समय देते हैं। हमेशा परिवार के साथ रहते हैं। उनमें कोई बुराई नहीं है। मैं उनसे किस बात पर लडूं? मैंने पिछले जन्म में बहुत पुण्य किए होंगे तभी दादा मुझे पति के रूप में मिले। मैं बहुत खुशकिस्मत हूं। हां, यदि मैं कभी रूठती हूं तो वे गाकर फौरन मुझे मना लेते हैं।

आप दोनों आउटिंग के लिए कहां जाना पसंद करते हैं?

बप्पी- हम सपरिवार घूमने जाते हैं। मैं, मिसेज लाहिरी, बेटा बप्पा और मेरी बेटी रीमा हमेशा साथ घूमने निकलते हैं। मैं अकेले कहीं नहीं जाता। मिसेज लाहिरी को शोज में भी अपने साथ लेकर जाता हूं।

चित्राणी - शादी के बाद से हम घूम ही रहे हैं। दादा हमें अकसर लंदन, पेरिस, ऑस्ट्रेलिया लेकर जाते रहते हैं। दादा फाइव स्टार होटल में ठहरते हैं। वे आरामपसंद व्यक्ति हैं।

क्या आप दोनों एक-दूसरे के लिए खाना बनाते हैं?

बप्पी- मैं आज तक किचन में नहीं गया। मिसेज लाहिरी को मेरा किचन में जाना पसंद नहीं है। मेरा पसंदीदा खाना वे स्वयं ही बनाती हैं। वह बेहतरीन कुक हैं।

चित्राणी- हमारे घर में नौकर-चाकर हैं, लेकिन दादा का खाना मैं स्वयं बनाऊं ऐसी इच्छा मेरी हमेशा रहती है। उनकी पसंदीदा डिश फिश करी है। यह डिश हमेशा मैं खुद ही बनाती हूं। आप यदि संतुष्ट हैं तो कुछ भी करने में आपको खुशी मिलती है।

32 वर्षो के अपने सफर को किन शब्दों में बयां करेंगे?

बप्पी- मेरे लिए शब्दों में बयां करना मुश्किल है। मैं गाकर बता देता हूं।

दिल में हो तुम, आंखों में तुम, बोलो तुम्हें कैसे चाहूं, पूजा करूं, सजदा करूं, जैसे कहो वैसे चाहूं। चित्राणी आई लव यू...

चित्राणी- मैं बहुत भाग्यशाली हूं कि मुझे पति के रूप में दादा मिले। आज तक वे मुझसे कभी रूठे नहीं, मुझ पर गुस्सा नहीं हुए, न ही कभी चिल्लाए या चीखे। इसलिए लगता ही नहीं कि हमारी शादी को 32 वर्ष हो गए हैं। मैं चाहूंगी किहमारा आने वाला कल भी यूं ही हंसते-मुसकराते गुजर जाए।

आपको क्या लगता है, फिल्म इंडस्ट्री में शादियां क्यों नहीं टिकतीं? वैवाहिक जीवन की सफलता का आधार क्या मानते हैं?

बप्पी- वैवाहिक जीवन को सफल बनाने के लिए पति-पत्नी के बीच अच्छी समझ होनी चाहिए। अमिताभ-जया जी, शाहरुख-गौरी व सायरा-दिलीप जी जैसे लोग भी हैं, जो वर्षो से साथ हैं। लोगों को उनसे रिश्ता निभाना सीखना चाहिए। यदि आप सफल होना चाहते हैं तो अपने परिवार को खुश रखिए। मैंने हमेशा अपने परिवार को प्राथमिकता दी। मिसेज लाहिरी ने भी हर कदम पर मेरा साथ दिया। मम्मी-पापा के निधन के बाद उन्होंने मेरे घर को संभाला और हमारे बच्चों की परवरिश की। हम दोनों एक-दूसरे की खूबियों और कमजोरियों को जानते हैं और उनसे तालमेल बैठाकर चलते हैं। इसलिए आज तक हमारे बीच कभी लडाई-झगडा नहीं हुआ और हम सुखपूर्वक रह रहे हैं।

चित्राणी- मेरी और दादा की आपसी समझ बहुत अच्छी है। दादा ने आजतक मुझे कभी किसी चीज के लिए मना नहीं किया। वैवाहिक जिंदगी को सफल बनाने के लिए पति और पत्नी दोनों को एडजस्ट करना चाहिए। छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज करना चाहिए। एक यदि गरम होता है तो दूसरे को नरम हो जाना चाहिए। विश्वास हर रिश्ते की मजबूती और सफलता का आधार है। पति-पत्नी को एक-दूसरे पर पूरा विश्वास होना चाहिए। वैवाहिक जीवन को सफल बनाने का यही आधार है।

रघुवेंद्र सिंह
 
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