मैंने एक्टिंग में डारेक्ट एंट्री ली है: निखिल
मैंने एक्टिंग में डारेक्ट एंट्री ली है: निखिल

निखिल का रुझान बचपन से ही फिल्मों में था। उनके मन में अभिनेता बनने की चाह भी थी, लेकिन परिवार के डर के कारण उन्होंने कभी अपनी वह इच्छा जाहिर नहीं की। वे इलाहाबाद केसिनेमाघरों में छुप-छुप कर अपने आदर्श अमिताभ बच्चन की फिल्में देखने जाया करते थे। बडे होने पर निखिल ने अपने परिवार की इच्छानुसार एमबीए किया और विडियोकॉन कंपनी में नौकरी करने लगे। उस दौरान उनकी मुलाकातें शाहरुख खान जैसे लोकप्रिय सितारों से होती रहीं और अभिनय में उनकी दिलचस्पी बढती गई।

पिछले वर्ष ई निवास की फिल्म माई नेम इज एंथोनी गोंजाल्विस में निखिल को ब्रेक मिला। उनका आत्मविश्वास और अभिनय लोगों के दिलों को छू गया। इस समय निखिल की कॉमेडी फिल्म खलबली प्रदर्शन के लिए तैयार है और वे अगली फिल्म मणिरत्नम जैसे प्रसिद्ध फिल्मकार के साथ कर रहे हैं। आइए करते हैं निखिल द्विवेदी से खास मुलाकात।

आप जैसे गैर फिल्मी पृष्ठभूमि के लोगों के लिए इंडस्ट्री में स्थान बनाना कितना मुश्किल होता है?

बहुत मुश्किल है, लेकिन नामुमकिन नहीं है। इसका दोष मैं निर्माता-निर्देशकों को नहीं दूंगा, बल्कि इसके जिम्मेदार दर्शक हैं। हमारे देश में सरनेम से पहचानने का चलन है। फिर चाहे वह राजनीति हो, बिजनेस हो या फिल्म। यदि किसी फिल्मी खानदान का लडका या लडकी बडा होता है तो उसे देखने की जिज्ञासा आम लोगों में अधिक होती है। यही वजह है कि निर्माता उन पर पैसा लगाते हैं। हमारे देश में टैलेंट की कमी नहीं है, बस उन्हें एक ब्रेक मिलने की जरूरत होती है। इन मुश्किलों से जो लडता है, वही बाद में स्टार बनकर उभरता है।

आपको पहला ब्रेक कितने संघर्ष के बाद मिला?

मैंने संघर्ष किया है, लेकिन चुपके-चुपके। अन्य लोगों की तरह न तो मैंने मॉडलिंग की है, न एक्टिंग का प्रशिक्षण लिया है और न ही ऑडिशन के लिए लंबी कतारों में लगा हूं। मैंने एक्टिंग में डायरेक्ट एंट्री मारी है। ई निवास से पहली मुलाकात याद है। मैंने उनसे कहा था कि मैं छोटे-मोटे रोल नहीं करूंगा। शायद उन्हें मेरा आत्मविश्वास भा गया और उन्होंने मुझे माई नेम इज एंथोनी गोंजाल्विस के लिए साइन कर लिया।

फुर्सत के पलों में क्या करते हैं?

सामान्यतया मैं बहुत कम ख्ाली रहता हूं। फिल्मों की शूटिंग, मीटिंग्स और फिर दोस्तों के साथ समय कैसे गुजर जाता है, पता ही नहीं चलता। मैं मुंबई में अकेले रहता हूं। घर जाने का समय भी बडी मुश्किल से मिल पाता है। लेकिन हां, जब इन सब जिम्मेदारियों को पूरा करने के बाद थोडा बहुत समय मिलता है तो फिल्में देखता हूं, किताबें एवं मैग्जींस पढता हूं। मैं जीवन के एक पल को भी जाया नहीं करता। मेरा मानना है कि वर्तमान के एक-एक पल का ऐसे उपयोग करना चाहिए, ताकि हमारा आने वाला कल सुखद हो।

पैसा आपकी जिंदगी में कितना महत्व रखता है? क्या आप अपने माता-पिता को पैसे भेजते हैं?

मुझे पढाई के दिनों में सौ रुपये जेब खर्च के लिए मिलते थे। मैं उतने पैसों में मुंबई जैसे खर्चीले शहर में पूरा महीना कैसे काटता था, मैं ही जानता हूं। मैंने शुरुआती दिनों में इतना संघर्ष किया है कि एक-एक रुपये की कीमत जानता हूं। मैं पैसे बहुत सोच-समझकर खर्च करता हूं। मैं अपने पैसों को बैंक में जमा कर देता हूं। मेरे पापा स्वाभिमानी हैं।

वे मुझसे पैसा नहीं लेते। यदि मैं उन्हें कुछ खरीदकर देने की कोशिश करता हूं तो वे लेने से मना कर देते हैं। वे कहते हैं कि पैसा खर्च मत करो, उसे जमा करो। भविष्य में तुम्हारे काम आएंगे।

आप किस महिला से ज्यादा प्रभावित रहे हैं? महिलाओं का कितना योगदान है आपके जीवन में?

मेरे जीवन पर नानी और दादी का काफी प्रभाव रहा है। उनसे मैंने जिंदगी के बारे में सीखा है। उनके अलावा मेरी मां ने बहुत सपोर्ट किया है। मैं इकलौता बेटा हूं। मेरी बहन नहीं है। वह कमी खलती है।

किसी को पता नहीं था कि मैं एक्टर बनना चाहता हूं, लेकिन बाद में सबने मेरा उत्साह बढाया और हर तरह से सपोर्ट किया। मेरी कई महिला मित्र हैं। मुझे लगता है कि हर इंसान के जीवन में स्त्रियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। पुरुष के जीवन में स्त्री की भूमिका को कोई नजरअंदाज नहीं कर सकता।

मणिरत्नम की फिल्म रावण के लिए आपने वजन बढाया है। अपनी सेहत के साथ इस तरह केप्रयोग काफी मुश्किल होते होंगे?

हां, मैंने पांच किलो वजन बढाया है। वजन घटाना और बढाना काफी मुश्किल होता है, लेकिन हम ऐसी फील्ड में हैं कि ऐसे प्रयोग करने पडते हैं। भूमिका के अनुसार वजन, लुक और पहनावा सब बदलना पडता है। हाल ही में जब मुझे वजन बढाना था तो जो मिलता था जमकर खाता था। अभी नई फिल्म के लिए मुझे वजन कम करना है। इसलिए आजकल मैं डाइटिंग कर रहा हूं। मैं अपनी फिटनेस को लेकर सजग रहता हूं। शूटिंग के दौरान भी वक्त निकालकर मैं हेल्थ क्लब जरूर जाता हूं।

फिट रहना हमारी फील्ड की मांग है। मेरे अनुसार आज के प्रदूषणयुक्त वातावरण में सबको अपनी सेहत के लिए वक्त निकालना चाहिए। खुद को फिट रखना चाहिए ताकि कोई बीमारी छू न सके।

आपके लिए फैशन क्या है? क्या ब्रैंडेड कपडों को ज्यादा महत्व देते हैं?

जो कपडे मुझे अच्छे लगते हैं मैं वही पहनता हूं। वही मेरे लिए फैशन है। मैं ब्रैंडेड कपडों के पीछे नहीं भागता। मेरी अलमारी में ब्रैंडेड और नॉन ब्रैंडेड कपडे शामिल हैं। यह भी नहीं है कि मैं केवल विदेश से खरीदारी करना पसंद करता हूं। हां, मैं सीजन का खयाल जरूर रखता हूं। सीजन के मुताबिक कपडे पहनना सेहत के लिए अच्छा होता है।

आप अपनी आगामी फिल्मों के बारे में बताएं। क्या करियर की मौजूदा स्थिति से खुश हैं?

इस वक्त मैं मणिरत्नम की रावण, शिवम नायर की एक कॉमिक थ्रिलर और शशांक शाह की मैट्रिक पास फिल्में कर रहा हूं। रामगोपाल वर्मा के साथ एक फिल्म की बात चल रही है। सभी फिल्मों में दर्शक मेरा अलग-अलग अंदाज देखेंगे। मैंने बहुत कम समय में फिल्म इंडस्ट्री में पहचान बनाई है। लगातार फिल्में कर रहा हूं। कल की तुलना में आज मेरे पास बहुत कुछ है। मैं खुश हूं।

आपका लक्ष्य क्या है?

मेरा लक्ष्य अच्छा काम करना है। फिल्म इंडस्ट्री में अपना ऊंचा मकाम बनाना है। संघर्ष जारी है। उम्मीद है एक दिन लक्ष्य को हासिल कर लूंगा।

रघुवेंद्र सिंह
 
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