जब गुरू-गोविंद दोनों मिले

      
जब गुरू-गोविंद दोनों मिले

मैं आश्चर्यचकित होकर गुरू (शंभु महाराज) को देख रही थी। गुरू जी सफेद कुर्ता और सदरी पहने हुए सबसे ऊपर अंतिम सीढी पर खडे थे। मैं नीचे से उन्हें देख रही थी। गुरू जी हंसते हुए मुझे ऊपर आने का इशारा कर रहे थे। मैंने सीढी पर ऊपर चढने के लिए पैर रखा ही था कि ऐसा लगा जैसे मुझे कोई हिलाकर आवाज दे रहा है। गहरी नींद से जागी ही थी कि मेरी बहन ने मुझसे कहा कि उठो-रेडियो में तुम्हारा नाम पद्मश्री के लिए एनाउंस हो रहा है। मुझे तुरंत सुबह का सपना याद आ गया। यह घटना सन् 1973 की है। उस समय मैं उभरती कलाकार थी। एक यात्रा केदौरान मैं नेपाल में थी तथा पशुपतिनाथ की परिक्रमा कर रही थी। परिक्रमा करते हुए मेरे दिल में अनायास खयाल आया कि हे प्रभु, मुझे पद्मश्री दिलवा दें। पूजा के बाद हम निवास स्थल पर वापस आ गए। रात को जब मैं सोई तो मुझे यह सपना दिखाई दिया। इस घटना और सपने के संयोग से मैं आज भी रोमांचित हो जाती हूं। आखिर भगवान और गुरू दोनों ने अपनी भक्ति का चमत्कार दिखा दिया।

एक और सपने का रहस्य मैं आज तक नहीं समझ पाई। यह सपना बार-बार एक नियमित अंतराल के बाद दिखाई देता है। इस सपने में मैं एक नीली आभा लिए महल को देखती हूं। मुझे सपने में एहसास होता है कि यह तो मेरा घर है लेकिन मैं वहां रहती नहीं हूं। मैं अंदर नहीं जा पा रही हूं। एक बार प्रवेश ले भी लेती हूं लेकिन कोई मुझे पहचान नहीं पा रहा है। एक कमरे में बहुत सारी पेंटिंग्स हैं जिन पर कपडा ढका हुआ है। बाहर गार्डन में जाती हूं, वहां पेड सूखे हुए हैं। फव्वारा है, लेकिन पानी की जगह सूखी है।

विश्लेषण

मनुष्य के जीवन में उसके इष्ट और गुरू दोनों का स्थान महत्वपूर्ण माना गया है। यही कारण था कि उमा शर्मा ने जब पशुपतिनाथ से वर मांगा, उसी रात उन्हें सपने में गुरू के दर्शन हुए। हमारी इच्छा अथवा कामना का संबंध मन और चित्त की एकाग्रता से होता है। इन दोनों की एकाग्रता की स्थिति में कुछ खास तरंगें निकलती हैं। इनमें से कुछ तरंगें गुरुत्वाकर्षण की सीमा पार कर अंतरिक्ष में फैल जाती हैं। जब हम मन और चित्त को एकाग्र कर किसी इष्ट गुरू अथवा आत्मा का ध्यान करते हैं तो यह खास तरंगें उन तक भी पहुंच जाती हैं। इस सारी प्रक्रिया के पीछे हमारी इच्छाशक्ति का भी योगदान होता है। इसी इच्छाशक्ति के कारण हमारी विचार तरंगें निर्दिष्ट स्थान पर पहुंच कर वापस लौट आती हैं। हमारे शरीर में मौजूद विशेष ऊर्जा का आत्मा की विशेष ऊर्जा से संपर्क होता है तथा आह्वान करने वाले की आत्मा से अशरीरी आत्मा का संपर्क स्थापित हो जाता है। यही अच्छी आत्माएं अथवा गुरू हमारी इच्छा पूर्ति में सहायक होती हैं। उमा शर्मा का सपनों में सीढी पर ऊपर चढना सफलता का संकेत है। गुरू जी का हंसते हुए दिखना आंतरिक शक्ति का संकेत है। दूसरा सपना एक महल के संदर्भ में उन्होंने बार-बार देखा। जाना-पहचाना महल तथा उस स्थान पर स्वयं को अजनबी महसूस करना संकेत देता है कि वह किसी प्रकार की सुधार योजना बना रही हैं लेकिन कोई समझ नहीं पा रहा है। बगीचे में सूखे पेड-पौधों तथा बिना पानी के फव्वारा देखने का अर्थ है भावी योजना के लिए पर्याप्त आर्थिक संसाधनों की कमी। लेकिन महल में प्रवेश करने का अर्थ है कि योजना का आरंभ संभव है।

सपने में बिल्डिंग देखना

सपने में छोटी अथवा बडी बिल्डिंग देखना एक अच्छा संकेत है। इसका अर्थ है आपकी योजना सफल होगी। यदि आप मौजूदा घर में कुछ अतिरिक्त विस्तार दे रहे हैं तो इसका अर्थ है कि आपके जीवन में सुखद परिवर्तन आने वाला है। लेकिन सपने में खराब आकार की तथा गिरने वाली बिल्डिंग देखने का अर्थ है- आप जो योजना बना रहे हैं अथवा निर्णय ले रहे हैं इसका नतीजा नुकसान के रूप में सामने आएगा। महिलाओं के सपने में घर उनके शरीर का प्रतीक होता है। जैसे छत का अर्थ है सिर, दरवाजे और खिडकी यौनांग, ग्राउंड फ्लोर यानी निचले तल और फ‌र्स्ट फ्लोर (प्रथम मंजिल) आंतरिक अंगों के संकेत हैं। सुंदर तथा खाद्य पदार्थो से भरी रसोई देखना खुशहाली भरे समय का संकेत है। बेसमेंट देखने का संकेत है कि पैरों में रक्त संचार का ध्यान रखें। यदि पुराने घर को बार-बार देखें तो ध्यान रखें आप बुढापे की चिंता कर रहे हैं। दूसरों के साथ नई बिल्डिंग बनाते देखने का अर्थ है-अच्छे मित्र आपके साथ हैं। खाली घर देखना-शुभ अवसर का हाथ से निकल जाना। टूटे-फूटे घर में रहना-अपने स्वास्थ्य पर पूरी नजर रखें। घर टूट जाना-उद्देश्य की प्राप्ति नहीं होना।

पुरुष के सपने में घर उसकी महत्वाकांक्षा प्रोफेशनल सफलता और सुरक्षा से जुडा होता है।

पूनम वेदी, टैरो कार्ड रीडर

सखी प्रतिनिधि
 
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