सहेलियों सा मधुर रिश्ता है हमारा

      
सहेलियों सा मधुर रिश्ता है हमारा

बहुत भावुक है गौहर: निगार खान

हम कुल पांच भाई-बहन हैं। हमारे पापा जफर अहमद खान एक प्राइवेट फर्म में ऑफिसर थे, अब वह रिटायर हो चुके हैं। मेरी मां रजिया खान हाउसवाइफ हैं। वैसे तो सभी भाई-बहनों के साथ मेरा रिश्ता मधुर है, लेकिन मेरे जीवन में मेरी छोटी बहन गौहर के लिए खास जगह है। दरअसल बचपन से ही हम दोनों की रुचियां एक जैसी थीं। हम अपने स्कूल में होने वाले नाटकों में अभिनय किया करते थे, लेकिन तब हमने यह नहीं सोचा था कि आगे चलकर हम अभिनय के क्षेत्र में अपना करियर बनाएंगे। संयोगवश हम दोनों इसी क्षेत्र में आ गए।

हमारा रिश्ता बहनों से अधिक दो सहेलियों जैसा है। एक-दूसरे को हम जितना प्यार करते हैं, उतना ही लडते भी हैं। मगर हम दोनों बहनों की ख्ासियत यह है कि हममें कभी भी एक-दूसरे के प्रति द्वेष या ईष्र्या की भावना नहीं आती। गौहर की खूबी यह है कि वह जितनी अच्छी इंसान है उतनी ही अच्छी दोस्त, बहन, बेटी और अदाकारा भी है। बहुत ही भावुक और सच्चे दिल की इंसान है। मैंने आज तक उसके मुंह से किसी के लिए कोई बुरी बात नहीं सुनी। लेकिन गौहर में एक खामी जरूर है कि जब तक मैं उसके साथ दोस्ताना व्यवहार करती हूं तब तक तो वह खुश रहती है, पर जैसे ही मैं उसकी बडी बहन बनने की कोशिश करती हूं तो वह मुझसे नाराज हो जाती है।

गौहर जितनी भावुक है अंदर से उतनी ही मजबूत भी है। कई बार अपने फैसले पर उसे मजबूती से खडी देखकर मुझे ऐसा लगता है जैसे मैं छोटी हूं और वह बडी। वह अकसर मुझसे कहती है यदि आप सही हैं तो किसी से न डरें और न ही अपना आत्मविश्वास खोएं। मुझे यह कहने में जरा भी संकोच नहीं होता कि बडी बहन होने के बावजूद मैंने उससे यह सब बातें सीखी हैं।

बेहद मूडी है निगार: गौहर खान

मेरी बडी बहन निगार  मेरे लिए फ्रेंड,  फिलॉसफर और गाइड की तरह है। अपनी जिंदगी से जुडा कोई भी फैसला लेने से पहले मैं निगार  से सलाह जरूर लेती हूं। निगार  मुझसे चार साल बडी है लेकिन उम्र का यह फासला हमारे लिए कोई मायने नहीं रखता। हमारा रिश्ता बेहद दोस्ताना है। बचपन में हम दोनों बहनें फिल्मी गानों पर खूब डांस किया करते थे। बचपन से ही हमारी पसंद और रुचियां बिलकुल एक जैसी रही हैं। निगार  स्वभाव से बहुत मूडी है, वह किसी के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहती है लेकिन जब उसका मूड खराब हो जाता है तो वह किसी से बात नहीं करती। कभी-कभार हमारे बीच छिटपुट वाद-विवाद हो जाते हैं। लेकिन हम अपने झगडे को कभी भी बहुत गंभीरता से नहीं लेते। वैसे भी बहन होने के नाते एक दूसरे से झगडना हम अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते हैं।

प्रीतंभरा प्रकाश
 
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