जब बनाना चाहें अपना घर

      
जब बनाना चाहें अपना घर

घर बनाना खर्चीला और समय खपाने वाला काम है, जिसमें मानसिक तनाव भी बहुत होता है। महानगरों में फ्लैट संस्कृति के फैलने का एक कारण यह भी है कि अपना घर बनाना बहुत आसान नहीं रहा। जमीन मिलना और सही लोकेशन पर मिलना ही मुश्किल है, इसके बाद आसमान छूती कीमतें आम खरीदार की जेब को माफिक नहीं आतीं। इसके बावजूद लोग अपनी जरूरत के मुताबिक घर बनवाते हैं, रेनोवेट कराते हैं या फ्लैट खरीद कर उसे मन-मुताबिक सजाना चाहते हैं। समस्या यह है कि घर का काम पूरा होते-होते लोगों का बजट अकसर ऊपर चला जाता है और नतीजा होता है मानसिक परेशानी। यूं भी घर बनाने के बाद कुछ वर्ष उसे व्यवस्थित करने की मारामारी में निकल जाते हैं। खासतौर पर आर्थिकमंदी के इस दौर में तो यह सब और मुश्किल हो चुका है। इसलिए यह जरूरी है कि घर बनाने से पूर्व सर्वे किया जाए, विशेषज्ञों की राय ली जाए और इसके बाद एक बजट तैयार किया जाए। एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि अगर आपकी इच्छा 30 लाख रुपये खर्च करने की है तो अपना बजट 25 लाख रुपये का ही बनाएं। क्योंकि ऐसा संभव है कि घर का काम पूरा होने तक लेबर चार्ज या जरूरी सामग्री की कीमत बढ जाए या फिर कुछ ऐसे काम भी कराने पड जाएं तो आपके बजट में नहींथे। योजनाबद्ध ढंग से कार्य करने से उस मानसिक परेशानी से बचा जा सकता है, जिससे ज्यादातर लोग जूझते हैं। घर बनाने में ईट-सीमेंट-गारे के बाद जिन चीजों पर सर्वाधिक खर्च आता है, वे हैं फ्लोरिंग और वॉल्स। इसके बाद आते हैं पीओपी, बिजली फिटिंग जैसे कार्य और अंत में फर्नीचर और कर्टेन्स जैसी एक्सेसरीज।

चाहे अपना घर बनवा रहे हों, फ्लैट खरीद कर उसमें काम करवाना चाहते हों या रेनोवेशन कराना चाहते हों तो उसके लिए जरूरी है कि एक सही बजट तैयार करें।

मंदी ने बदली मानसिकता

आम्रपाली ग्रुप्स के चेयरमैन और मैनेजिंग डाइरेक्टर अनिल शर्मा कहते हैं, विश्वव्यापी आर्थिक मंदी का प्रॉपर्टी मार्केट पर भी प्रभाव पडा है। अब लोग लग्जरी फ्लैट्स के बजाय सादे फ्लैट्स खरीद रहे हैं। 25 से 30 लाख रुपये तक की कीमत वाले फ्लैट्स सर्वाधिक बिक रहे हैं। क्योंकि मध्यवर्ग की सीमा इससे अधिक नहीं है। बडे-बडे डिवेलपर्स अब आम आदमी के बजट के अनुसार घर बना रहे हैं। लोग कम रेंज के घर पसंद कर रहे हैं, भले ही वे प्राइम लोकेशन से थोडी दूर स्थित हों। दरअसल फिलहाल निवेश के लिहाज से कम, जरूरत के हिसाब से घर अधिक खरीदे जा रहे हैं। वे लोग ही घर ले रहे हैं, जिन्हें इसकी बेहद जरूरत है।

कैसे तैयार करें बजट

जे. डी. इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी में कार्यरत आर्किटेक्ट संतरास के अनुसार घर बनाने या रेनोवेट कराने से पूर्व बजट तैयार करने के लिए ये दो कदम उठाएं।

पहला कदम

पहले तय करें कि आपको कितना खर्च करना है। इससे आप हर मद के लिए एक फिक्स बजट बना सकेंगे, जहां भी लगेगा कि खर्च बजट से बाहर जा सकता है, वहां पहले ही उसे नियंत्रित करने की कोशिश करेंगे। यह भी जरूरी है कि मुश्किल वक्त के लिए अपने पास कुछ पैसा अवश्य सुरक्षित रखें।

दूसरा कदम

जो-जो काम आपको कराने हैं, उनकी एक सूची तैयार कर लें। इसके लिए थोडा समय अवश्य लें। मार्केट सर्वे करें और आसपास बन रहे घरों में होने वाले कार्र्यो को देखें। इसके बाद किसी सही आर्किटेक्ट की सलाह लें।

आर्किटेक्ट संतरास कहते हैं, आजकल मध्यवर्गीय लोग आमतौर पर अपार्टमेंट्स या सोसाइटी में फ्लैट खरीदते हैं। सामान्य तौर पर

1. बीएचके के लिए 750 स्क्वेयर फुट

2. बीएचके के लिए 1200 स्क्वेयर फुट 3. बीएचके के लिए 1600 स्क्वेयर फुट का एरिया चलन में है।

वन बेडरूम नवविवाहित युगल या कंपनी द्वारा अपने कर्मचारियों की रिहाइश के लिए खरीदे जाते हैं। टू बेडरूम फ्लैट्स की बिक्री सर्वाधिक होती है, जबकि तीन बेडरूम वाले फ्लैट्स बडे परिवार वाले लेते हैं।

आमतौर पर फ्लैट्स में रहने वाले लोग अपनी बढती जरूरतों के मुताबिक रेनोवेशन कराते हैं। फ्लैट्स में सबसे पहले यह ध्यान रखना पडता है कि ज्यादा तोड-फोड न हो और काम भी बन जाए। बाथरूम में प्लंबिंग, तोड-फोड, इलेक्ट्रिकपॉइंट्स शिफ्टिंग जैसे तमाम पहलुओं पर यह ध्यान देना पडता है कि इससे आसपास में रहने वाले लोग डिस्टर्ब न हों। अपने कार्र्यो की सूची बनाने के बाद आर्किटेक्ट से सलाह लें, क्योंकि वही एक सही एस्टीमेट बना सकता है। पूरी लागत में सामान की ढुलाई से लेकर लेबर चार्ज तक शामिल होता है। यदि काम पांचवीं-दसवीं मंजिल पर हो रहा है तो लिफ्ट से सामान चढाने-उतारने में भी अतिरिक्त व्यय होता है।प्रत्यक्ष कार्यो के अलावा प्लंबिंग, बिजली, वॉल पुट्टी, पीओपी जैसे काम भी होते हैं। अंत में फर्नीचर एवं अन्य एक्सेसरीज की लागत निकाली जाती है।

अगर कारपेंटर तलाश रहे हैं तो अपने आसपास काम करने वाले कारपेंटरों का काम अवश्य देख लें, ताकि उनके काम की गुणवत्ता जान सकें, उनके लेबर चार्ज जान लें। इसके अलावा जहां वे काम कर रहे हैं, वहां के लोगों से उनका व्यवहार कैसा है और जो समय वे आपको देंगे, वह आपकी दिनचर्या के मुताबिक होगा या नहीं, इन सारे पहलुओं पर भी ध्यान दें।

संतुलित रहे आपका बजट

अगर आप अपना खर्च नहींबढाना चाहते, अपने बजट को संतुलित रखना चाहते हैं तो कुछ बातों को ध्यान में रखें-

1. पुराने सामान का नया उपयोग

फिजूलखर्ची से बचने का यह एक अच्छा उपाय हो सकता है। पुराने सामान को नया रंग-रूप भी दिया जा सकता है। सामानों को नए ढंग से व्यवस्थित करने से भी उनकी खूबसूरती बढाई जा सकती है। यदि कम खर्च में काम चलाया जा सकता हो तो नया लेकर बजट को क्यों सीमा से बाहर करें!

2. हर इच्छा पूरी हो जरूरी नहीं

इंटीरियर शो-रूम में जाएं तो जरूरी नहीं कि हर वो चीज जो खूबसूरत दिखे, खरीद लें। घर तो रोज बनता है, एक बार में ही परफेक्ट लुक आ जाए, यह जरूरी नहीं। धीरे-धीरे सामान जोडने की जो खुशी होती है, वह एक बार में ही सारा सामान खरीद लेने में कभी नहींआ पाती। न ही इससे घर में आप सर्वश्रेष्ठ चीज रख पाते हैं। इसलिए जब खर्च करने की स्थिति हो और वास्तव में खरीदने की इच्छा हो, तभी सामान खरीदें।

3. योजना बनाएं

पहले ही तय कर लें कि अपने घर में फर्नीचर, कलर स्कीम और स्टाइल कैसा रखना चाहेंगे, उसी के हिसाब से बजट बनाएं। इससे आप व्यर्थ समय और पैसे नहीं गंवाएंगे। बेहतर हो अपने कंप्यूटर पर नेट सर्च करें और ऑनलाइन स्टोर्स पर भी क्लिक करें।

4. धैर्य का आनंद लें

कई बार अपना घर बनाने वाले एक बार में ही दो-तीन फ्लोर का कंस्ट्रक्शन पूरा कर लेना चाहते हैं, जिसके लिए उनका बजट इजाजत नहीं देता। सही रास्ता यह है कि यदि एक फ्लोर बनाकर आपका काम चल जा रहा हो तो पहले उसका ही कंस्ट्रक्शन कराएं। उस पर आने वाली कुल लागत को देखें और इसके बाद ही आगे का काम शुरू करें बेहतर होगा कि जरूरत भर का निर्माण-कार्य पहले करा लें। कुछ समय रहने के बाद यह भी समझ में आने लगता है कि कहां-कहां क्या-क्या गडबडियां की गई हैं। इसलिए दूसरे फ्लोर का काम कराने में आप उन गलतियों से बच जाते हैं।

5. दबाव में न आएं

घर बनाने के दौरान सबसे मुश्किल होता है, क्रोध और तनाव पर काबू पाना। कारीगरों-मजदूरों-कॉन्ट्रेक्टर से बहस से पारा चढने लगता है तो आसमान छूती कीमतें होश उडाने लगती हैं। कभी लगता है कि समय जरूरत से ज्यादा लग रहा है और कारीगर ढंग से काम ही नहीं कर रहे। ऐसे हजारों कारण परेशान करने के लिए काफी होते हैं। जरूरी है कि दबाव में न आएं, सहज रहने की कोशिश करें, क्योंकि परेशानियां तो आएंगी ही। एक बार काम पूरा होने के बाद अपने घर में रहने का सुख सब कुछ भुला देगा।

इंदिरा राठौर
 
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