कंटेंपरेरी लुक में ट्रेडिशनल विद्या
कंटेंपरेरी लुक में ट्रेडिशनल विद्या

शाहिद के साथ फिल्म किस्मत कनेक्शन को सफलता मिली, पर आपके ओवर वेट की भी चर्चा हुई।

हां, मैं ओवर वेट हो गई थी। मैंने योगा, जिम और मेडीटेशन के साथ एरोबिक्स यानी जितना कुछ कर सकती थी किया। अब मेरा वजन सात-आठ किलो कम हो चुका है। किस्मत कनेक्शन के प्रमोशनल इवेंट्स के दौरान ही मैंने ठान लिया कि मुझे स्लिम होना ही है।

अपनी खूबसूरती बरकरार रखने के लिए क्या करती हैं आप?

मेरी दादी और नानी दोनों के पास घरेलू नुसखों का खजाना है। मैं आजतक किसी पार्लर में नहीं गई। इन्हीं नुसखों को मेरा पूरा परिवार अपनाता है। शाकाहारी होने में मेरा यकीन है क्योंकि इससे मेरा सिस्टम काफी अच्छा रहता है। दही-छाछ और सैलेड से मेरी स्किन हेल्दी रहती है।

क्या इस मुकाम पर आने के बाद संतुष्ट हैं?

जी हां, मेरे अय्यर तमिल ब्राह्मण परिवार का ग्लैमर व अभिनय की दुनिया से कोई लेना-देना नहीं था। सेंट जेवियर्स कॉलेज से मैं सोशियोलॉजी में ग्रेजुएशन कर एम.ए. कर रही थी कि दादा (प्रदीप सरकार) की नजर मुझ पर पडी। मैंने कुछ कमर्शियल्स उनके साथ किए, जिसमें सर्फ का विज्ञापन फेमस हुआ। फिर हम पांच धारावाहिक, एक दक्षिण भारतीय फिल्म और फिर परिणीता की। मुझमें श्रीदेवी जैसा ग्लैमर नहीं, पर फिर भी मैं चल रही हूं। सफलता पाने के लिए मैंने उसूलों के साथ समझौते नहीं किए।

आने वाली फिल्म इश्किया में आप काफी सेंसुअस लगी हैं?

इस रोल और फिल्म के बारे में कुछ ज्यादा तो नहीं कह सकती, कृष्णा का किरदार अग्रेसिव है। मैं खुद एक्टर हूं, सो लालची भी हूं। रोल की जरूरत हो तो बोल्ड होना पडता है।

क्या नसीरूद्दीन और अरशद वारसी जैसे स्टार्स के साथ हिचक महसूस हुई?

या.. ऑफकोर्स हुई। नसीर जी की बेटी हीबा कॉलेज में मेरी सहपाठी थी। मैं स्वयं उनकी फैन हूं। ऐसे में बोल्ड सीन देना कठिन था। इसको सहज बनाने के लिए अरशद और नसीर जी ने मुझसे दोस्ती बढाई।

क्या आपने फिल्म पा के लिए मेकओवर करवाया?

मुझे इंडियन परिवेश में रहना भाता है। यह मेरा स्टाइल स्टेटमेंट है। फिल्म पा में मेरे दो तरह के किरदार यानी गेटअप्स हैं। इसलिए कंटेंपरेरी लुक जरूरी था।

आपके पसंदीदा डिजाइनर कौन हैं?

मुझे सब्यसाची मुखर्जी के डिजाइन पसंद है। डिजाइनर टैग के बिना भी मुझे कुछ पसंद आता है तो खरीद लेती हूं।

आपके लिए फैशन और स्टाइल क्या हैं?

मेरे लिए फैशन कंफर्ट का दूसरा नाम है। हमारे परिधान हमें डिफाइन करें। वे हमारे व्यक्तित्व व भावनाओं को परिभाषित करें। परिधानों की एस्थेटिक वैल्यू भी हो। मेरे लिए सादगी बहुत मायने रखती है।

क्या आपको लगता है कि चर्चा में रहने के लिए एंडोर्सिंग करना जरूरी है?

कई सारे सितारे एंडोर्सिग में व्यस्त हैं। इसमें नाम भी है व पैसा भी। लेकिन लोकप्रिय सितारों को ही तो ब्रैंडिंग का मौका मिलता है।

पूजा सामंत
 
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