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<title>Sakhi - Yahoo! Jagran News</title>
<description>Yahoo! Jagran Hindi News</description>
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<copyright>Copyright (c) 2009  Yahoo! Inc. All rights reserved.</copyright>
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<lastBuildDate>Tue, 24 Nov 2009 18:41:40</lastBuildDate>
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	<title>Yahoo! Jagran Hindi News - Sakhi</title>
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	<item>
		<title>मेरा लाडला भाई है बख्तियार: देलनाज पॉल</title>
		<link>http://in.jagran.yahoo.com/sakhi/?edition=200911&amp;category=20</link>
		<description>
		मुझे ऐसा लगता है कि भाई-बहन का रिश्ता अपने आप में बेहद प्यारा होता है। इस मामले में मैं अपने आप को बेहद खुशनसीब  मानती हूं कि मेरे दो भाई हैं। चूंकि बख्तियार  टीवी कलाकार है, इसलिए उससे तो सभी परिचित हैं लेकिन हम कुल तीन भाई-बहन हैं। मेरे बडे भाई डॉ.पोरस  ईरानी अपने परिवार के साथ बेंगलूर में रहते हैं और बख्तियार  मुझसे छह साल छोटा है। मेरे दोनों ही भाई मुझे बेहद प्यार करते हैं। हालांकि अब शादी के बाद हम तीनों भाई-बहन अपनी-अपनी जिंदगी में अति व्यस्त हैं। बावजूद इसके हम तीनों के बीच स्नेह का एक ऐसा अनकहा बंधन है जिसने आज भी हमें एक दूसरे से जोडे रखा है।  
 
आलराउंडर है बख्तियार 
 
परिवार का सबसे छोटा बेटा होने के कारण बख्तियार  पूरे घर में सबका बेहद लाडला है। मैं उससे 6  साल बडी हूं। उम्र के इस फासले की वजह से मैं उसके साथ मां की तरह पेश आती हूं और मेरे प्यार में डांट-फटकार भी शामिल होती है। मुझे आज भी याद है, जिस दिन बख्तियार का जन्म हुआ था, उस दिन हमारे घर में सब बेहद खुश  थे। बचपन से ही बख्तियार  को हमारे पूरे परिवार का भरपूर प्यार और संरक्षण मिला है। इस मामले में वह बहुत खुशनसीब  है। उसे कभी भी किसी चीज के लिए तरसना नहीं पडा। व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ करियर के मामले  में भी वह काफी खुश किस्मत  रहा है क्योंकि बख्तियार  से पहले मैं टीवी धारावाहिकों में आ चुकी थी। मेरे साथ मेरे पति राजीव और उनके बडे भाई ने भी उसे काफी सहारा दिया। दूसरे कलाकारों की तरह उसे अपना मकाम बनाने के लिए संघर्ष नहीं करना पडा। मुझे खुशी  है कि बख्तियार  ने भी अपने पहले शो बाटलीवाला  से ही अपनी प्रतिभा का परिचय दे दिया। रिअलिटी शो बिग बॉस सीजन-3 में भी उसे अपनी पत्नी तनाज के साथ शिरकत करने का मौका मिला है।  </description>
	 	 <pubDate>2009-11-01 05:30:04</pubDate>
	 	
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	<item>
		<title>संगीत हमें करीब लाया: उस्ताद दिलशाद खान</title>
		<link>http://in.jagran.yahoo.com/sakhi/?edition=200911&amp;category=20</link>
		<description>
		आपके खूबसूरत घर का क्रेडिट किसे जाता है? 
 
परवीन: इसका जवाब खान साहब देंगे। 
 
खान साहब: मैं हमेशा से वर्कहॉलिक रहा हूं। संगीत और रियाज के सिवाय मैं और कुछ नहीं सोचता। अकसर रियाज के दौरान परवीन मेरे पास आती और मुझसे चेक साइन करवा कर ले जाती। एक दिन पता चला कि मेरे पैसे आधे रह गए हैं। जब मैंने परवीन से पूछा तो परवीन ने कहा कि आइए आपको कुछ दिखाना है। पहले तो मेरी समझ में नहीं आया मगर जैसे ही मैंने इस घर में प्रवेश किया मेरी रूह प्रसन्न हो गई। मैं इनकी समझदारी का कायल हो गया। </description>
	 	 <pubDate>2009-11-01 05:30:04</pubDate>
	 	
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		<title>थोड़ी कोशिश थोड़ा प्यार</title>
		<link>http://in.jagran.yahoo.com/sakhi/?edition=200911&amp;category=20</link>
		<description>
		उफ, इन पुरुषों को सुधारने की कोशिश ही बेकार है। ये उद्गार किसी एक स्त्री के नहीं अनेक स्त्रियों के होंगे। इसी गंभीर समस्या को लेकर सखी ने बातचीत की कुछ स्त्रियों से और इस बात की तह तक जाने की आखिर परेशानी कहां है?  
 
हमारी रोजमर्रा की जिंदगी पहले जैसी आसान नहीं रही। बढती व्यस्तता और जिम्मेदारियों के बोझ ने स्त्री, विशेषकर कामकाजी स्त्री को और कठिन परिस्थितियों में ला खडा किया है। ऐसे में जहां उसकी कार्यक्षमता पहले से दोगुनी हुई है, वहीं चुनौतियों और जिम्मेदारियों में भी खासी बढोतरी हुई है। आइए काउंसलर डॉ.अनु गोयल से जानें कि समस्या है कहां और इनका हल क्या है? 
 
अनुशासन की कमी </description>
	 	 <pubDate>2009-11-01 05:30:04</pubDate>
	 	
	</item> 
	

	<item>
		<title>प्यार के साथ पारदर्शिता जरूरी है</title>
		<link>http://in.jagran.yahoo.com/sakhi/?edition=200910&amp;category=20</link>
		<description>
		रिअलिटी शो में सर्वश्रेष्ठ दंपती की ट्रॉफी जीतने पर क्या प्रतिक्रिया है आपकी? 
 
कुलजीत- प्रतिक्रिया देने से पहले यह जान लें कि मेरा रिअलिटी शो से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं था। मैं मोहल्ले की छोटी-मोटी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के बारे में सोच भी नहीं सकती थी, फिर यह तो नेशनल टेलीकास्ट था? इसमें हिस्सा लेने के लिए इन्होंने मुझे कठिनाई से राजी किया।  
 
घुग्गी जी, क्या यह सच है कि कुलजीत को इस रिअलिटी शो में हिस्सा लेने के लिए आपने मजबूर किया? </description>
	 	 <pubDate>2009-10-01 05:30:04</pubDate>
	 	
	</item> 
	

	<item>
		<title>नई उम्र के नए सूत्र</title>
		<link>http://in.jagran.yahoo.com/sakhi/?edition=200910&amp;category=20</link>
		<description>
		रिश्तों को निभाने के लिए तय किए गए ऐसे अनेक  नियम  हैं जो हकीकत के धरातल पर आते ही न जाने कब कहां धराशाई हो जाते हैं। पति-पत्नी की आशाएं और अपेक्षाएं अलग होती हैं। रिश्तों को समझने और निभाने की समझदारी भी दोनों की अलग-अलग होती है। हालांकि आजकल रिश्तों को निभाने की जिम्मेदारी दोनों पर बराबर की है और दोनों बराबरी के स्तर पर इन्हें निभाते भी हैं फिर भी तकरार कई बार चरमसीमा पर पहुंच जाती है। तो आखिर कैसे तय करें अपने रास्ते को? क्या इस समस्या का कोई हल नहीं? इसके लिए काउंसलर डॉ.गौरव गुप्ता का कहना है कि ऐसा नहीं कि इस समस्या का हल नहीं है। जरूरत है इन्हें समझने और समझाने की। ये मंत्र आधुनिक पीढी की आम समस्याओं का विश्लेषण करके तय किए गए हैं। आइए कोशिश करें इन नियमों और उनकी वास्तविकता को जानने की। 
 
निजता का सवाल है 
 
विवाह का बंधन दो इंसानों के बीच बंधता है। जब यह मजबूत होता है तभी दोनों परिवारों के सदस्य इसमें आ जुडते हैं। कभी-कभी पेरेंट्स अपने बच्चों को ज्यादा सामाजिक बनाने के फेर में नाइंसाफी करने से भी पीछे नहीं हटते। यहां तक कि वे युवा दंपतियों के साथ हनीमून पर जाने में भी परहेज नहीं करते। शादी के तुरंत बाद हनीमून की परंपरा बनाई ही इसलिए गई है जिससे दोनों एक-दूसरे को ठीक से समझ सकें। उन्हें समय चाहिए, जो कुछ दिन अकेले रहकर ही मिल सकता है। घर वालों की दखलदांजी से यह स्पेस उन्हें नहीं मिल पाता। साथ चिपके रहने से हर मामले में ये घर वाले न चाहते हुए भी दखल दे रहे होते हैं। यदि नवदंपतियों के बीच किसी प्रकार की समस्या आती है तो पूरा परिवार विशेषज्ञ की भूमिका में आ जाता है। सब अपनी तरफ से सलाह देने लगते हैं। यह समझना जरूरी है कि अपनी समस्याएं स्वयं हल करनी पडती हैं। अपने रिश्तों की डोर कभी भी दूसरे के हाथों में नहीं थमानी चाहिए। कोशिश करें कि अपने निर्णय अपने आप लें। रिश्तों की बेहतरी में जितना समय और प्रयास लगाएंगे उतना ही फायदा मिलेगा। शादी आपको बेहतर इंसान बनने में मदद करती है। </description>
	 	 <pubDate>2009-10-01 05:30:04</pubDate>
	 	
	</item> 
	

	<item>
		<title>स्पर्श की भाषा</title>
		<link>http://in.jagran.yahoo.com/sakhi/?edition=200909&amp;category=20</link>
		<description>
		क्या आपने कभी यूं ही एकांत क्षणों में स्नेह से साथी की बांह पकडी और खुद के भीतर एक पवित्र सी स्नेह भावना महसूस की? गहरी उदासी भरे पलों में पति ने आपके माथे पर प्यार भरा एक चुंबन दिया और आपको लगा, मानो एक पल में ही सारा तनाव खत्म हो गया। रोते बच्चे को मां ने प्यार से दुलारा और उसके आंसू थम गए। हॉस्पिटल के बेड पर पडे मरीज की हथेलियों पर डॉक्टर ने हौले से अपनी हथेलियों का स्पर्श दिया और वह कष्ट में भी मुस्करा उठा..। 
  
क्या है स्पर्श 
 
हम सभी स्पर्श की भाषा समझते हैं। अकसर किसी से मिलते समय हम उससे हाथ मिलाते हैं। इससे संबंधों में एक गर्मजोशी का एहसास होता है। आमतौर पर किसी से दोबारा मिलने के लिए हमारा प्रिय वाक्य होता है-कीप इन टच। चिट्ठी में संबोधन के बाद सबसे पहले शब्द होते हैं बडों को चरण स्पर्श और छोटों को स्नेह-प्यार या आशीष। हम डॉक्टर से हीलिंग टच के बारे में बात करते हैं। अपने छोटे बच्चों को अच्छे और बुरे स्पर्श में फर्क करना सिखाते हैं। सार्वजनिक स्थलों पर हम सभी दूसरों से अपेक्षित फासला रखना बेहतर समझते हैं और कोशिश करते हैं कि गलती से भी किसी को न छू लें। क्योंकि इसका संदेश विपरीत भी जा सकता है। इन सबके बीच हम एक बेहद बुनियादी, प्यारी सी बात भूल जाते हैं और वह है-स्वस्थ मानवीय स्पर्श। समाज में, परिवार में, किसी से बातचीत में हम इस स्पर्श की मूक भाषा को व्यक्त करना भूल ही जाते हैं। </description>
	 	 <pubDate>2009-09-01 05:30:04</pubDate>
	 	
	</item> 
	

	<item>
		<title>बहन की सफलता से मिलती है सच्ची खुशी</title>
		<link>http://in.jagran.yahoo.com/sakhi/?edition=200909&amp;category=20</link>
		<description>
		जिन बहनों में उम्र का फासला अधिक नहीं होता, उनका रिश्ता आम तौर पर दो बहनों से अधिक दो सहेलियों जैसा होता है। लेकिन हमारे मामले में स्थिति थोडी अलग है। उम्र का फासला कम होने पर भी मैं अपनी छोटी बहन उर्वशी का ठीक उसी तरह खयाल रखती हूं, जैसे कि एक मां अपनी बेटी का खयाल रखती है। उसकी खुशियों का खयाल रखना मैं अपना कर्तव्य समझती हूं।  
 
यादें बचपन की 
 
बचपन में अगर उर्वशी कोई गलती करती तो बडी बहन होने के नाते मुझे ही डांट खानी पडती थी। दिल्ली कीरत्ना देवी स्कूल में हम साथ-साथ पढे हैं। मैं उर्वशी से एक साल बडी हूं। इसलिए मैं उससे एक क्लास आगे थी। मेरी सारी किताबें न केवल उर्वशी को मिलतीं, बल्कि पढाई में भी मैं उसकी मदद करती थी। हमें कभी दोस्तों की जरूरत ही नहीं पडी क्योंकि हम हमेशा साथ होते थे। स्कूल में हम सारे खेल का हिस्सा हुआ करते थे, वह चाहे बैडमिंटन हो, बॉलीवॉल हो या फिर कबड्डी। हम सब में आगे थे, हमने साथ-साथ कई ट्रॉफियां जीती हैं। वैसे खेलकूद, पढाई-लिखाई के साथ हम शरारतों में भी आगे थे। </description>
	 	 <pubDate>2009-09-01 05:30:04</pubDate>
	 	
	</item> 
	

	<item>
		<title>समर्पित भाव से निभाएं अंतरंग रिश्ते</title>
		<link>http://in.jagran.yahoo.com/sakhi/?edition=200909&amp;category=20</link>
		<description>
		आजकल अधिकतर दंपतियों के जीवन में अशांति, मानसिक तनाव, असंतोष और एक-दूसरे के प्रति अनाकर्षण पनपता जा रहा है। यह सही है कि वर्तमान जीवनशैली और अधिक से अधिक सुख-सुविधाएं जुटाने की भागमभाग में आम दंपती इतने थक चुके होते हैं कि एक-दूसरे पर ध्यान देने का समय भी उन्हें नहीं मिल पाता। नतीजा यही कि उनके दांपत्य में खटास आने लगती है। बात-बात पर कहासुनी, नोकझोंक और आरोप-प्रत्यारोप रोज की बात बन जाती है और शरीर एवं मन से जुडे इस कोमल रिश्ते में दरार पडने लगती है। कहने का अर्थ यह है कि पति-पत्नी का जीवन खुशहाल तभी रह सकता है, जब वे दोनों एक-दूसरे को भरपूर समय दें। एक-दूसरे का पर्याप्त ध्यान रखें और एक-दूसरे की इच्छाओं का सम्मान करें। इन सभी बातों की आवश्यकता सबसे अधिक उन अंतरंग क्षणों में महसूस होती है, जब वे दोनों पूरी तरह एक-दूसरे को समर्पित होते हैं।  
 
विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि दांपत्य जीवन की खुशहाली नब्बे प्रतिशत उनके संतुष्ट सेक्स संबंधों पर निर्भर करती है। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि यौन संबंध की महत्ता को समझा जाए और इस एक पहलू को आनंददायक बनाने के लिए पति-पत्नी दोनों ही साझा प्रयास करें। सेक्स जीवन को खुशहाल बनाए रखने के लिए कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। 
 
दांपत्य का आधार है सेक्स  </description>
	 	 <pubDate>2009-09-01 05:30:04</pubDate>
	 	
	</item> 
	

	<item>
		<title>समझें कल्पना और हकीकत का फर्क</title>
		<link>http://in.jagran.yahoo.com/sakhi/?edition=200909&amp;category=20</link>
		<description>
		जाडे की एक खुशनुमा दोपहर फिरदौस गार्डन में टहलती हुई प्रियंका अचानक रोमांटिक मूड में आ गई। रंगीन तितलियों की तरह छितराए हुए पैंजी के फूलों को देखकर वह लगभग मचलती हुई अपने पति संजय से बोली, संजू प्लीज पैंजी के फूलों का एक गुच्छा तोडकर ले आओ न, देखो कितने प्यारे लग रहे हैं जैसे.. अभी उसका वाक्य पूरा भी नहीं हुआ था कि संजय उसे झिडकते हुए बोल पडा, जी हां, अब मेरा यही काम तो रह गया है कि आपके लिए फूल तोडूं, चोर कहलाऊं और माली की फटकार खाऊं।  
 
क्यों, तब तो कैसे आसमान से तारे तोडकर लाने की बात करते थे। आज फूल तोडने में ही सारी आशिकी जवाब दे गई। प्रियंका तुनकते हुए बोली। 
 
अरे तब की बात और थी। संजय लापरवाही से बोला, तब तो तुम्हें पटरी पर लाने के लिए सौ जतन करने पडते थे। लेकिन अब तो गाडी लाइन पर आ गई है। </description>
	 	 <pubDate>2009-09-01 05:30:04</pubDate>
	 	
	</item> 
	

	<item>
		<title>प्यार में बाधक नहीं बढ़ती उम्र</title>
		<link>http://in.jagran.yahoo.com/sakhi/?edition=200908&amp;category=20</link>
		<description>
		अधिकतर विवाहित स्त्रियां बच्चों के बडे होने केबाद पति के साथ संबंधों को नजरअंदाज करने लगती हैं। अपने मन में धारणा बना लेती हैं कि सेक्स के लिए अब उनकी उम्र नहीं रही। पति द्वारा पहल करने पर या तो बहाना बनाने लगती हैं या फिर उन्हें भी यह समझाने का प्रयास करने लगती हैं कि व्यक्तिगत सुख के बजाय अब घर-गृहस्थी के दायित्वों की पूर्ति और बच्चों के करियर पर ध्यान देना अधिक आवश्यक है। उनकी ऐसी सोच से पति-पत्नी के रिश्तों में दूरियां बढने लगती हैं और तनाव, मानसिक अशांति के चलते कभी-कभी स्थिति भयावह भी हो जाती है। इससे बचने के लिए जरूरी है कि किसी भी प्रकार की नकारात्मक सोच को अपने मन के भीतर न पनपने दें। यह न भूलें कि पति-पत्नी के रिश्ते को जोडे रखने की महत्वपूर्ण कडी है उनका सेक्स जीवन। शारीरिक संबंधों के प्रति आपकी थोडी सी भी उदासीनता दांपत्य संबंध को नीरस और कमजोर बना सकती है। 
 
मन को समझाना जरूरी 
 
सेक्स विशेषज्ञों और मनोचिकित्सकों की स्पष्ट राय है कि वास्तव में मेनोपॉज शारीरिक अवस्था से अधिक हमारी मानसिक सोच पर निर्भर करता है। चालीस की उम्र पार करते ही अगर हम स्वयं को बूढा समझने लगेंगे तो उसका प्रभाव हमारी जीवनचर्या पर पूरी तरह पडेगा। एक-दूसरे की भावनाओं का खयाल रखते हुए यदि पति-पत्नी शारीरिक संबंध स्थापित करते हैं तो पचास की आयु के बाद भी लंबे समय तक संतुष्ट सेक्स जीवन का आनंद लिया जा सकता है। </description>
	 	 <pubDate>2009-08-01 05:30:04</pubDate>
	 	
	</item> 
	
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