फिर छाएगा पौराणिक फिल्मों का दौर
भारत धार्मिक देश है, जाहिर है हिंदी सिनेमा का इतिहास पौराणिक फिल्मों से शुरू हुआ है। ऐसी फिल्मों का दर्शक वर्ग काफी बड़ा होता था। बाद के दौर में छोटे पर्दे पर रामायण, महाभारत जैसे धारावाहिक लोकप्रिय हुए। रविवार सुबह जब ये धारावाहिक प्रसारित होते थे, सड़कें खाली हो जाती थीं और लोग टीवी के इर्द-गिर्द जमा होकर भक्तिभाव के साथ इन्हें देखा करते थे। मशीनी होते समाज में आस्था पर आधारित फिल्में थोड़ी शांति प्रदान करती हैं। इस बार पौराणिक फिल्मों के बारे में लिख रहे हैं प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक महेश भट्ट।

हर सफल इंसान के पीछे किसी स्त्री का हाथ होता है। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संगीतकार-गायक बप्पी लाहिरी इस बात में पूरा विश्वास रखते हैं। वे अपनी सफलता का श्रेय पत्नी चित्राणी को देते हैं। उनका मानना है कि कोई पुरुष तभी सफलता अर्जित कर पाता है जब उसे उसकी जीवनसंगिनी का सहयोग प्राप्त हो। बप्पी लाहिरी ने इस धारणा को भी गलत साबित कर दिया कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में शादियां लंबे समय तक नहीं टिकती हैं। वे और चित्राणी गत 32 वर्षो से सुखी वैवाहिक जीवन व्यतीत कर रहे हैं। जुहू स्थित अपने लाहिरी हाउस में सखी से हुई उनकी खास मुलाकात।

अपनी पहली फिल्म माई नेम इज एंथोनी गोंजाल्विस में अपने बेहतरीन अभिनय से निखिल ने दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बना ली है। जल्द ही उनकी नई कॉमेडी फिल्म भी रिलीज होने वाली है। इसके अलावा वे मणिरत्नम की भी फिल्म में काम कर रहे हैं। निखिल वास्तविक जीवन में कैसे हैं और किस तरह उन्होंने फिल्मी दुनिया में कदम रखा, वे खुद ही बता रहे हैं सखी को।

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