दुनिया में रहकर भी फकीर हैं: यश चोपड़ा
दिल को भीतर तक छू लेने वाली रोमांटिक फिल्मों के निर्माता हैं यश चोपड़ा, जिनकी अभिनेत्रियां अपने श्वेत-धवल परिधानों के कारण याद रहती हैं । 1958 में आई थी फिल्म धूल का फूल। तब से वक्त, लमहे, चांदनी, डर जैसी तमाम हिट फिल्में दीं उन्होंने। उन्हें फक्र है कि वह पूरी दुनिया में फिल्में वितरित करते हैं। जितना कमाते हैं, फिर से फिल्मों में लगा देते हैं, फिर चाहे सफलता मिले या विफलता। इन्हींयश चोपड़ा पर लिख रहे हैं सुप्रसिद्ध निर्माता-निर्देशकमहेश भट्ट।

जिंदगी किसी पहेली से कम नहीं होती। कभी यह हंसाती है तो कभी रुलाती है। जिंदगी को लेकर हर किसी का अलग-अलग नजरिया होता है। इस संदर्भ में मॉडल एवं अभिनेत्री मुग्धा गोडसे क्या सोचती हैं, वे बता रही हैं सखी को।

हिंदी-बांग्ला फिल्मों का जाना-पहचाना चेहरा हैं प्रियांशु चटर्जी। मूल रूप से दिल्ली के रहने वाले प्रियांशु ने कुछ वर्षो पूर्व जब फिल्मों में कदम रखा, तब वे चार्टर्ड एकाउंटेंट का कोर्स कर रहे थे। एकाएक उन्होंने फिल्मों का रुख कर लिया। उनकी पहली फिल्म तुम बिन को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला। पिछले दिनों उनकी फिल्म चिंटू जी रिलीज हुई। इस अवसर पर सखी कार्यालय में उनसे हुई मुलाकात के कुछ अंश यहां प्रस्तुत हैं।
 
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