भारत में एक नहीं, बहुत सी ऐसी जडी- बूटियां हैं, जिनमें ऐसे गुण हैं, जिनसे भयंकर रोग ठीक हो सकते हैं। केवल भारत में ही नहीं, विदेशों में भी इस पर अनेक रिसर्च हो रहे हैं। ऐसे ही गुण मिले हैं अश्वगंधा, तुलसी व गिलोई में, जिससे वे फेफडे व गर्भाशय के कैंसर के इलाज में कारगर हैं। इस शोध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता भी मिल गई है। शोध करने वाले चिकित्सकों ने कैंसर से मुकाबला करने वाले तत्वों को इन पौधों में खोज निकाला है। उनका मानना है कि प्रतिरोधक क्षमता बढाने वाले सीडी 3, सीडी 4 व सीडी 8 मुख्य रूप से कैंसर को रोकने का काम करते हैं। शोध में देखा गया कि कैंसर के हमले के दौरान ये सेल्स नष्ट हो जाते हैं, जिससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता खत्म हो जाती है। तुलसी, अश्वगंधा व गिलोई में ऐसे तत्व मिले हैं, जो सीडी 3, सीडी 4 व सीडी 8 की संख्या को बढाने में सहायक होते हैं। इस पर किए गए प्रयोगों के परिणाम बेहतर आए हैं। हमारा आयुर्वेद सदियों से भारतीय जडी-बूटियों से असाध्य रोगों को ठीक करने का काम कर रहा है। उनके द्वारा इलाज करने से शरीर पर विपरीत प्रभाव भी नहीं पडते, क्योंकि वे सभी नैचरल पदार्थ हैं, उनके साइड इफेक्ट न के बराबर हैं।
ज्यादा विटमिन खतरनाक भी
अकसर लोग कमजोरी होने पर या संतुलित आहार न लेने की स्थिति में विटमिन गोलियों का सेवन करते हैं। लेकिन अगर आप उन गोलियों को अधिक मात्रा में ले रहे हैं तो अब सजग हो जाइए। वे खतरनाक हद तक नुकसान पहुंचा सकती हैं आपको। यूरोप में अनुसंधानकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया कि ताजे फल और सब्जियों के रूप में विटमिन लेने के स्थान पर जो लोग विटमिन की गोलियां लेते हैं, उन्हें खतरा हो सकता है। इस अतिरिक्त खुराक से मृत्युदर बढ सकती है। इस अध्ययन के विश्लेषण से पता चलता है कि अगर विटमिनों की खुराक अलग-अलग ली जाए तो बीटा कैरोटीन मृत्यु दर को 7 प्रतिशत बढा देता है।
विटमिन ए 16 प्रतिशत व विटमिन ई 4 प्रतिशत की वृद्धि करता है। पर विटमिन सी और सेलेनियम की गोलियों का ऐसा असर नहीं होता।
विटमिन सी के परिणाम बिल्कुल विपरीत हैं, क्योंकि वह नुकसानदेह नहीं। सेलिनियम भी ऐसा है। अनुसंधानकर्ताओं ने माना कि सेलेनियम एकमात्र ऐसा विटमिन है, जिसकी अतिरिक्त खुराक चाहे अकेले ली जाए या अन्य विटमिन के साथ, वह मृत्यु दर के खतरे को दस प्रतिशत घटाती है। इसलिए खतरों से बचना चाहते हैं तो कोशिश करें कि शरीर के लिए आवश्यक पोषण व विटमिन भोजन के माध्यम से ही लें, गोलियों या दवाओं के माध्यम से नहीं।
धूम्रपान का होने वाले बच्चे पर असर
धूम्रपान से होने वाले अनेक कष्टकारी रोगों की तरफ वैज्ञानिक पहले ही चेतावनी दे चुके हैं। इस विषय पर सालों से काम हो रहा है, लेकिन अब हाल ही में नए अध्ययन से पता चला है कि जो माता या पिता अधिक मात्रा में धूम्रपान करते हैं, उनके बच्चे में कोई विकार आ जाने की संभावना रहती है। शोधकर्ताओं ने बताया कि धूम्रपान के सेवन से पुरुष के वीर्य में रसायनिक बदलाव आ जाते हैं, जिससे उनकी आने वाली पीढी में कुछ विकार आ सकते हैं। यहां तक कि स्वयं धूम्रपान न करने वाली भी जो स्त्रियां गर्भवती होने पर यह धुआं अप्रत्यक्ष रूप से ही अपने भीतर ग्रहण कर रही होती हैं, उनके होने वाले बच्चे पर भी इस धुएं का विपरीत प्रभाव पड रहा होता है। यदि अपने होने वाले बच्चे को सुरक्षित रखना चाहते हैं तो धूम्रपान से अब ही तौबा कर लीजिए। आपकी व आपके पूरे परिवार की सुरक्षा आपके इस निर्णय में है, यह मत भूलिए।
गुस्सा करे नुकसान आपका
यदि आपको गुस्सा अधिक आता है और आप नियंत्रण से बाहर हो जाते हैं तो आप अपने को शांत करने के तरीके जल्दी ही ढूंढ लीजिए, वरना मुसीबत हो जाएगी। नए शोध से पता चला है कि बात-बात पर गुस्सा करने वाले लोगों को बीमार होने की स्थिति में ठीक होने में अधिक समय लगता है। ओहियो यूनीवर्सिटी के शोधकर्ताओं की अगुवाई में किए गए एक शोध के परिणामों से यह बात सामने आई है कि अधिक गुस्सा करने से उनके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है और इसी कारण उन्हें ठीक होने में समय लगता है।
खट्टा खाने के बाद की तकलीफ
यदि नीबू या इमली जैसी खट्टी चीज खाने के बाद आपके मुंह में तकलीफ होती है तो जान लीजिए कि आपकी लार ग्रंथियों में पथरी यानी स्टोन है, जो रुकावट पैदा कर रहा है। लार सॉल्ट्स, जो लार ग्रंथियों से निकल कर नलियों के द्वारा मुंह में पहुंचते हैं, कभी-कभी नलियों में अटक जाने के कारण आगे खिसक नहीं पाते। उस रुकावट से मुंह में सूजन व दर्द हो जाता है। यह दिक्कत तब और बढ जाती है, जब आप खाना खा रहे हों। उस समय होता यह है कि खट्टी चीजें सेलाइवल जूसेस के बहाव को तेज कर देती हैं, लेकिन रास्ता ब्लॉक होने के कारण वे आगे नहीं बढ पाते। ऐसे में नलियां अवरुद्ध होने पर व ग्रंथियों में ज्यादा लार जमा हो जाने पर इन्फेक्शन भी हो सकता है। आप किसी डेंटिस्ट को दिखाएं। वह नलियों के दोनों ओर दबाव डालकर स्टोन निकाल देगा। इसके बाद भी फायदा न होने पर ऑपरेशन कराना होगा।
डिप्रेशन से बचें
हर इंसान की जिंदगी में ऐसा समय आता है, जब कि वह अपने को दुखी, असहाय व लाचार समझने लगता है। उसे पता भी नहीं चलता कि वह कब डिप्रेशन का शिकार हो गया। इसका सबसे पहला लक्षण होता है स्मरण शक्ति का कमजोर हो जाना। डिप्रेशन आपको खराब स्थिति में पहुंचाए, इससे पहले सचेत हो जाएं। इसके प्रमुख कारण होते हैं-
1. संतुलित भोजन ना करना : ठीक से खाना ना खाने पर शरीर तो कमजोर होता ही है, उसका खराब प्रभाव दिमाग पर भी पडता है। शरीर, दिल और दिमाग के लिए सही खाना बहुत जरूरी है।
2. नकारात्मक विचार: आत्मविश्वास की कमी व नकारात्मक विचार वाले लोग भी जल्दी डिप्रेशन के शिकार होते हैं।
3. अन्य कारण: कुछ बीमारियां या तकलीफें ऐसी होती हैं, जो डिप्रेशन को बढाती हैं, जैसे थॉयरॉयड या शुगर। अकसर बच्चे को जन्म देने के बाद स्त्री डिप्रेशन की शिकार हो जाती है।
उपचार : डिप्रेशन में व्यक्ति खुद को दुख के सागर में डूबा महसूस करने लगता है। कुछ दवाएं आपको डिप्रेशन से बाहर निकालने में मदद करती हैं, लेकिन उनके साइड इफेक्ट भी होते हैं। डिप्रेशन से बचने के लिए मेडिटेशन सबसे बेहतर उपाय है। |