मैं 34 वर्षीया विवाहिता और दो बच्चों की मां हूं। मेरी शादी को सात वर्ष हो चुके हैं। मेरी ससुराल में काफी अधिक मात्रा में खेत, मकान आदि पैतृक संपत्ति है। मेरे ससुर जी की मृत्यु कुछ माह पहले हुई है। मेरे पति के दो भाई और दो बहनें हैं। मेरे सास-ससुर शुरू से ही मेरे साथ रहते आ रहे हैं। ससुर जी के गुजरते ही मेरे पति के भाइयों ने संपत्ति के बंटवारे के लिए झगडा शुरू कर दिया है। मेरी सास का कहना है कि जब तक वह जिंदा हैं, जायदाद अपने हाथों में रखना चाहती हैं और उनकी मृत्यु के बाद ही उनके बेटे आपस में संपत्ति का बंटवारा करें। पर वे इस बात को सुनने को तैयार नहीं हैं। चूंकि सास हमारे साथ रहती हैं, इस वजह से वे हमें भी भला-बुरा कहते हैं और उन्हें हम पर भी शक होता है कि हमने ही सास को यह सिखाया है किवह अभी संपत्ति का बंटवारा न करें। इस वजह से हमारे परिवार का माहौल तनावपूर्ण हो गया है। हमें पैतृक संपत्ति का कोई लालच नहीं है। पर हम चाहते हैं कि हमारे परिवार का माहौल शांतिपूर्ण बना रहे। आप ही बताएं कि मुझे क्या करना चाहिए?
ए.बी. कानपुर
आपकी सास जो कर रही हैं, वह सही कर रही हैं। आज के स्वार्थी समाज में अकसर देखा गया है कि माता-पिता की पैतृक संपत्ति पर कब्जा पाते ही बेटे उनके साथ बेरुखी से पेश आने लगते हैं। आपकी सास समझदार हैं, जो इस मानसिकता को समझती हैं। इसलिए जो तनाव परिवार में हो रहा है, उसे शांति से नजरअंदाज करने के अलावा और कोई उपाय नहीं है। न आप सास से यह कहें कि वे अपनी जायदाद का बंटवारा करें, न ही आप खुद इस मामले में पहल करें। लेकिन आपकी सास अपनी वसीयत बनवा कर रखें तो समझदारी होगी।
मैं 24 वर्षीया कामकाजी युवती हूं। मेरी समस्या यह है कि कुछ ही महीने पहले मेरी सगाई हुई है। रिश्ता पक्का करते समय मेरे माता-पिता ने अपने स्तर पर लडके और परिवार के बारे में काफी छानबीन की थी और मुझे भी सब कुछ ठीक ही लग रहा था, इसलिए मैंने शादी के लिए हां कर दी। अब सगाई के बाद जब भी मैं अपने मंगेतर से मिलती हूं तो मुझे उसकी बातों से ऐसा लगता है कि उसके साथ मेरे विचार नहीं मिलते। जब मैं उससे पहली बार मिली तो उसने सबसे पहले मुझसे मेरी तनख्वाह और बचत के बारे में पूछा। मेरी एक छोटी बहन विकलांग है और उसके इलाज और पढाई का खर्च मैं ही उठाती हूं, क्योंकि मेरे माता-पिता की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। उस लडके के व्यवहार से ऐसा लगता है कि वह बहुत स्वार्थी इंसान है। वह अपनी बातों से बार-बार यह जाहिर करने की कोशिश करता है कि अपनी बहन के ऊपर मेरा पैसे खर्च करना उसे पसंद नहीं है। कई बार मुझे ऐसा लगता है कि ऐसे व्यक्ति के साथ जीवन बिताना मेरे लिए बहुत मुश्किल होगा। कई बार जी चाहता है कि मैं शादी से इनकार कर दूं। आप ही बताएं कि मुझे क्या करना चाहिए?
के. एन., दिल्ली
आपके साथ मुझे पूरी सहानुभूति है। पर मेरी राय में आपको स्वयं इस मुद्दे पर सोचना होगा कि आपके मंगेतर शादी से पहले ही आप पर इतना रौब झाडते हैं, आपके नेक कामों में भी वे दखलंदाजी करते हैं तो फिर शादी के बाद उनका आपके प्रति कैसा रवैया होगा? यह आपकी अच्छाई है कि आप अपनी विकलांग बहन और वृद्ध माता-पिता की देखभाल दिल से करती हैं। आज के युग में लडके और लडकियों के बीच किसी तरह का भेदभाव नहीं रह गया और लडके की तरह पढी-लिखी आत्मनिर्भर लडकियां भी अपने माता-पिता की देखभाल करती हैं, जो कि निश्चित रूप से प्रशंसनीय है। एक बार आप अपने मंगेतर से स्पष्ट रूप से बात करें और उसे बता दें कि उसका इस तरह से रोक-टोक करना आपको पसंद नहीं है। यदि फिर वे अपनी आदतों से बाज नहीं आते तो बेहतर यही होगा कि ऐसे स्वार्थी युवक से शादी करने का खयाल आप अपने दिमाग से निकाल दें।
मैं 28 वर्षीया विवाहिता हूं। मेरी शादी को छह माह हुए हैं। मेरी समस्या यह है कि मेरे पति बहुत ही कमजोर दिल के इंसान हैं। उनमें
जरा भी आत्मविश्वास नहीं है। कोई उनके साथ बुरा व्यवहार करे तो भी वे उसे डांट नहीं पाते। हमारा संयुक्त परिवार है और चार भाइयों में मेरे पति सबसे छोटे है। हमारा अपना फैमिली बिजनेस है। हमारे सास-ससुर भी हमारे ही साथ रहते हैं। मुझे हमेशा इस बात की चिंता सताती रहती है कि अगर मेरे पति का ऐसा ही स्वभाव रहा तो वे आगे चल कर अपनी गृहस्थी कैसे चला पाएंगे। घर के लोगों का व्यवहार भी उनके साथ अच्छा नहीं है। इस वजह से मैं अपने पति को लेकर बहुत चिंतित रहती हूं कि वह भविष्य में अपने जीवन के बडे निर्णय कैसे ले पाएंगे?
ए.ए., जयपुर
आपके शादीशुदा जीवन की अभी शुरुआत ही हुई है और छह महीने का समय एक-दूसरे को जानने के लिए काफी नहीं होता। फिर भी अगर आपको अंदाजा हो गया है कि आपके पति कमजोर दिल के इंसान हैं और उनमें निर्णय लेने की क्षमता नहीं है, तो यह भी समझें कई बार ऐसा भी होता है कि ऐसे नर्म दिल इंसान अंदर से बहुत मजबूत होते हैं। ईश्वर उन्हें सच्चाई की ताकत देता है, जिसके बल पर वे बडी से बडी लडाई लड सकते हैं। किसी से कटु व्यवहार करना उनकी फितरत में
नहीं होता। शादी के बाद अपने जीवनसाथी का स्वभाव बदलना किसी भी इंसान के हाथ में नहीं होता। पर आप इतना तो कर ही सकती हैं कि अगर आपके पति सीधे-सादे हैं तो आप खुद को मजबूत बनाने की कोशिश करें और परिवार की जिम्मेदारियां खुद उठना शुरू कर दें। अगर वे अपनी बात कहने से कतराते हैं तो आपको अपनी आवाज बुलंद करनी होगी। जीवन में जब भी जरूरत पडे आप खुद अन्याय के खिलाफ लडने के लिए तैयार रहें। आपको सास-ससुर के साथ भी अपने रिश्ते को मधुर रखना होगा, ताकि जब भी जरूरत हो वे आपके साथ हों। आप अपने पति को धीरे-धीरे दुनियादारी सिखाने की कोशिश करें। आपको दोहरी जिम्मेदारी निभानी होगी।
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