वैकल्पिक चिकित्सा: विधियां कितनी कारगर
चिकित्सा विज्ञान की मुख्य धारा में शामिल विधियों की अपनी सीमाओं, कुछ पेशेवरों की लोभवृत्ति और महंगाई ने अधिकतर आबादी को प्रभावित और परेशान किया है। ऐसी स्थिति में लोग एलोपैथ, आयुर्वेद और होमियोपैथी के अलावा चिकित्सा की अन्य वैकल्पिक विधाओं के प्रति आकर्षित हुए हैं। कुछ लोग इनका उपयोग बहुत सजग तरीके से पूरक, सावधानी या विकल्प के तौर पर कर रहे हैं। जबकि ऐसे लोग भी हैं, जो पूरी तरह इन विधियों पर ही आश्रित हो गए हैं। क्या हैं चिकित्सा की वैकल्पिक विधाओं की सीमाएं और किस हद तक इनका प्रयोग उचित है, इस संबंध में जानकार लोगों के विचार।
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दिल जो न कह सका
छोटी-छोटी बातें जो रह गई अनकही स्त्री का अंतर्मन भावनाओं का अथाह सागर होता है और
इस सागर में जाने कितनी ही बातें लहरों की तरह हिलोरें मार रही होती हैं, जिन्हें वह कहना तो चाहती है पर सही मौके पर कह नहीं पाती। अपने अंतर्मन में छिपी कुछ ऐसी ही बातों को आपके
साथ बांट रही हैं साहित्यकार पद्मा सचदेव।
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चर्चा में रहे सितारे
महंगाई ने सिनेमाहॉल तक आम आदमी का जाना भले मुश्किल कर दिया हो, पर इधर फिल्मी दुनिया के सितारे लगातार चर्चा में रहे। भूमि विवाद के मामले में बिग बी को तो सुप्रीम कोर्ट ने राहत दे दी, लेकिन बेचारे
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न करें बिजली का दुरुपयोग
आज यह स्लोगन हर जगह नजर आता है कि बिजली की फिजूलखर्ची को रोकिए, पर आम आदमी उसकी तरफ इतना ध्यान नहीं देता, जितना देना चाहिए। दरअसल वह यह नहीं जानता कि इसके प्रति वह सजग न रहकर अपना कितना नुकसान कर रहा है।
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वृद्धावस्था और जीवन है बदहाल
पिछले वर्ष लागू हुए घरेलू हिंसा कानून का दायरा बहुत बड़ा है। अभी भी लोग इसके बारे में बहुत जानकारी नहीं रखते। यहां उससे जुड़े व कुछ अन्य सवालों के जवाब दे रही हैं सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता कमलेश जैन।
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बेबसी का दूसरा नाम है बुढ़ापा
बुढ़ापा किसी भी इंसान के उम्र का वह दौर होता है, जब वह स्वयं को बहुत थका हुआ और अकेला महसूस करता है। आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से भी ज्यादा बड़ी समस्या उदासी और अकेलेपन की होती है। मुंबई के 84 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक कृष्णकांत पटेल की जीवन के अनुभव भी कुछ ऐसे ही हैं।
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आप कितनी हैं अच्छी/बुरी?
हर व्यक्ति के व्यक्तित्व के दो पहलू होते हैं अच्छा और बुरा, सकारात्मक और नकारात्मक।
कभी-कभी इन दोनों में से कोई एक व्यक्तित्व पर हावी हो जाता है। इस क्विज में हिस्सा
लेकर जानिए कि आप कैसी हैं। अच्छा या बुरा कौन सा पहलू आपके व्यक्तित्व पर हावी है।
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नई जॉब का प्रेशर
नौकरी पाने की चाह पूरी होने पर नई जॉब के साथ तालमेल व नए लोगों के बीच
काम करने का डर दबाव बन कर दिलो-दिमाग में छाया रहता है। कई बार ऐसे में आप
सामान्य कार्यो को भी गलत कर देते हैं। ऐसे समय में आप इस तनाव से कैसे मुक्त रहें
और नई जॉब के साथ कैसे तालमेल बैठाएं, बता रहे हैं मैक्स अस्पताल के वरिष्ठ
मनोचिकित्सक डॉ.समीर पारेख।
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कैसा विलक्षण संयोग था
जब मैं पहली बार गर्भवती हुई, उस वक्त मेरी उम्र 30 वर्ष थी। देर से गर्भ धारण करने के कारण बच्चे में अपंगता की संभावना को ध्यान में रखते हुए मैंने उससे जुडी सभी जांच करवाई। पहली बार जांच कराने
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बेबस सही लेकिन बेमकसद नहीं
ब्रजमोहन कौर मैनी जीना एक कला है। कुछ लोगों को जिंदगी बहुत-कुछ देती है, लेकिन वे
खुश नहीं रहते। जबकि कुछ हौसलेमंद लोग तमाम विपरीत स्थितियों के बीच भी फूल-से
खिलकर अपनी खुशबू से गुलशन को महका जाते हैं। ऐसी ही शख्सीयत हैं 72 वर्षीय ब्रजमोहन कौर मैनी, जिन्हें जन्म के महज छह-साढ़े छह महीने बाद ही पोलियो ने घेर लिया, जिससे उनके धड़ के नीचे का हिस्सा अपंग हो गया। बावजूद इसके, वह इस उम्र तक बेहद रचनात्मक और सक्रिय हैं। कर्मठता, आत्मविश्वास और जिंदगी के जज्बे से भरपूर ऐसी स्त्री हैं, जिनसे जीने की कला सीखी जा सकती है।
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